नयी उम्मीदों के साथ नये साल का जश्न आज

Published at :31 Dec 2015 6:43 PM (IST)
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नयी उम्मीदों के साथ नये साल का जश्न आज

नयी उम्मीदों के साथ नये साल का जश्न आज बीते साल की कमियों से लेंगे सीख, कुछ नया करने का लेंगे संकल्पप्रतिनिधि, सहरसा मुख्यालयनये साल 2016 का स्वागत है. साथ ही यह भी कामना है कि यह साल भी जिले के सभी लेगों के लिए मंगलकारी, सुखकारी व नूतन संदेशों से भरा हो. नया साल […]

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नयी उम्मीदों के साथ नये साल का जश्न आज बीते साल की कमियों से लेंगे सीख, कुछ नया करने का लेंगे संकल्पप्रतिनिधि, सहरसा मुख्यालयनये साल 2016 का स्वागत है. साथ ही यह भी कामना है कि यह साल भी जिले के सभी लेगों के लिए मंगलकारी, सुखकारी व नूतन संदेशों से भरा हो. नया साल आता है और हमारे बीते वर्ष की उपलब्धि, कमी, गलती व नाकामियों का लेखा-जोखा सामने रख देता है. नये वर्ष का मौका हमें उन उपलब्धियों से प्रेरणा लेने की सीख देता है तो गलतियों को फिर नहीं दुहराने की बात भी बताता है. बीते वर्ष की कमियों को दूर कर जीवन को सुखमय बनाने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है. संभवत: इन्हीं कारणों से बच्चों से लेकर बूढ़ों तक में नये साल का उत्साह भरा होता है. वे हरसंभव प्रयास से नये साल के पहले दिन को यादगार बनाना चाहते हैं. ईश्वर सुमिरन से करेंगे शुरुआतप्राचीन काल से ही संपूर्ण जिले में आध्यत्मिकता व धार्मिकता का गहरा प्रभाव रहा है. जिले की संस्कृति भी ऐसी रही है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत ईश्वर के सुमिरन से ही होती रही है. नये साल के मौके पर जिले के सभी छोटे-बड़े मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. मंदिरों के व्यवस्थापक भी लोगों की सुविधा के लिए करे-कमान होते हैं. जिला मुख्यालय स्थित रक्तकाली-चौंसठ योगिनी धाम, शंकर चौक स्थित शिव मंदिर, महावीर चौक स्थित बजरंगबली मंदिर, श्री बड़ी दुर्गा स्थान, कॉलेज गेट दुर्गा मंदिर में भक्तों की भीड़ जुटेगी. वहीं जिले के महिषी स्थित तरास्थान, कंदाहा के सूर्य मंदिर, महपुरा के कारूस्थान, नकुचेश्वर शिव मंदिर, दिवारी के विषहरा स्थान, बनगांव के बाबाजी कुटी, देवना स्थित महादेव मंदिर, वनदुर्गा मंदिर, नवहट्टा के देवनवन मंदिर, सिमरी बख्तियारपुर के काठो स्थित मटेश्वरधाम, विराटपुर के चंडी स्थान में श्रद्धालुओं का सैलाब आएगा. मनाएंगे पिकनिक, खायेंगे पकवाननये साल के पहले दिन को यादगार बनाने के लिए पश्चिम के देशों से उधार ली गयी पिकनिक मनाने की परंपरा अब यहां भी सिर चढ़ कर बोलने लगी है. नये साल पर पिकनिक मनाने में भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है. हालांकि बच्चे अपने घरों के छत पर ही दोस्तों के साथ खाना बना खाने की तैयारी में जुटे हैं. वहीं स्पीकर लगा डांस की भी तैयारी है. कई ग्रुपों ने यही व्यवस्था खेतों में भी की है. जहां वेज-नॉनवेज बनाने की तैयारी है. जबकि कई लोग परिवार के साथ घुमने भारत-नेपाल सीमा स्थित कोसी बराज के लिए निकल चुके हैं. नये वर्ष के मीनू में अनिवार्य रूप से शामिल हो चुके नॉनवेज की भी मांग लगातार बढ़ती ही जा रही है. मटन, चिकेन व मछली की दुकनों में अहले भीड़ से ही भीड़ जुटने लगी है. फोटो- नववर्ष 1- भेजी जा रही रक्तकाली मंदिर की तसवीर लगा देंगे.

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