बिहार : अनाथालय की 2 लड़कियों ने सहरसा के दो अधिकारियों पर लगाया यौन शोषण का आरोप

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Oct 2018 8:37 PM

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– पूर्णिया बालिका गृह भेजी गयी दो लड़कियों ने घर जाने के आठ महीने बाद सहरसा के दो अधिकारियों पर लगाया यौन शोषण का आरोप– अधिकारियों ने कहा, उन्हें आरोप या जांच की नहीं है कोई जानकारी– एक अफसर ने कहा, उन्होंने आज तक देखा ही नहीं है पूर्णिया, इंट्री रजिस्टर व सीसीटीवी से जांच […]

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– पूर्णिया बालिका गृह भेजी गयी दो लड़कियों ने घर जाने के आठ महीने बाद सहरसा के दो अधिकारियों पर लगाया यौन शोषण का आरोप
– अधिकारियों ने कहा, उन्हें आरोप या जांच की नहीं है कोई जानकारी
– एक अफसर ने कहा, उन्होंने आज तक देखा ही नहीं है पूर्णिया, इंट्री रजिस्टर व सीसीटीवी से जांच कराये डीएम

सहरसा (प्रतिनिधि) :बिहारके सहरसा में कलेक्ट्रेट गेट पर वर्षों से अवैध रूप से चल रहे आकांक्षा अनाथ आश्रम को सील कर देने के साल भर बाद भी इसकी कहानी समाप्त होती नहीं दिख रही है. जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किये जाने कारण अब अधिकारियों पर ही घिनौने आरोप लगने लगे हैं. 17 सितंबर 2017 को यहां से दो लड़कियों को पूर्णिया बालिका गृह भेजा गया था. बालिका गृह की संचालिका ने 20 फरवरी 2018 को कागजी खानापूर्ति के बाद उन दोनों लड़कियों को सौरबाजार प्रखंड के रूपौली गांव स्थित उसकी दादी को सौंप दिया. घर जाने के आठ माह बाद मधेपुरा जाकर सांसद से इस दोनों लड़कियों ने बालिका गृह में प्रवास के दौरान दुष्कर्म की शिकायत की.

इन दोनों लड़कियों ने वहां मीडिया के समक्ष सहरसा के दो अधिकारियों पर सहरसा से पूर्णिया जा शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाया. लड़कियों का यह बयान मीडिया में आया और इस आधार पर पूर्णिया डीएम ने जांच कमेटी गठित कर दी है.

टीवी पर देखा, स्पष्टीकरण नहीं मांगा है कोई
हालांकि, सहरसा के दोनों पदाधिकारियों ने ऐसे किसी भी आरोपों को सिरे से खारिज करते ऐसे किसी भी आरोप अथवा जांच से स्वयं को अनभिज्ञ बताया है. पदाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने भी सिर्फ मीडिया में यह बातें देखी और सुनी है. न तो उनसे कोई स्पष्टीकरण मांगा गया है और न ही सरकार अथवा प्रशासन की ओर से उनसे कुछ पूछा ही गया है. एक पदाधिकारी ने तो कहा है कि आज तक उन्होंने पूर्णिया देखा तक नहीं है. हालांकि, पूछने पर उन्होंने बताया कि ऐसे किसी भी होम में प्रवेश करने वालों की इंट्री होती है और इसमें सीसीटीवी भी लगे होते हैं. पूरी जांच-पड़ताल कर सच्चाई उजागर की जा सकती है. यदि जांच कमेटी बनी है और उन्हें आरोपी बनाया गया है तो वे हर दृष्टिकोण से सामना को तैयार हैं.

डीएम पर भी लगाया था गलत आरोप
यहां सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर सहरसा के अवैध अनाथ आश्रम में रहते या पूर्णिया के बालिका गृह में पांच माह तक रहने के दौरान यह शिकायत क्यों नहीं की गयी. इन लड़कियों को घर वापसी के आठ माह बाद ही ऐसा क्यों लगा कि शिकायत करनी चाहिए. कहीं यह अवैध अनाथ आश्रम के संचालक शिवेंद्र कुमार की चली चाल तो नहीं है. क्योंकि साल 2014 में जब सहरसा में चल रहे इस अवैध अनाथ आश्रम की जांच की गयी थी और इसे पूर्ण से अवैध पाते इसे हटाने का निर्देश जारी किया गया था. तब संचालक शिवेंद्र ने राज्य मानवाधिकार आयोग को पत्र लिख जिला प्रशासन की शिकायत की थी. शिवेंद्र ने तत्कालीन डीएम पर भी लड़कियों को हवश का शिकार बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाया था. प्रशासन के आदेश पर अवैध अनाथ आश्र्रम खाली कराने गये तत्कालीन अंचल अधिकारी पर भी संचालिका के कपड़े फाड़ने व गाली-गलौज कराने का आरोप लगा चुका है.

संदिग्धों की लाइडिटेक्टर से हो जांच
बीते वर्ष तत्कालीन डीएम बिनोद सिंह गुंजियाल के आदेश पर पांच अधिकारियों ने जांच की तो एक बार फिर इस आश्रम को फर्जी और पूरी तरह अवैध पाया. डीएम के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम ने 17 सितंबर की अहले सुबह सभी बच्चों को अन्यत्र शिफ्ट करा संचालक व उसकी संचालिका पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. तत्कालीन एसडीपीओ ने कहा था कि शहर के कतिपय सफेदपोश व कथित समाजसेवियों का इस अवैध अनाथ आश्रम के संचालन में प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से सहभागिता थी. उन्होंने वैसे सभी लोगों पर कार्रवाई करने की बात कही थी. लेकिन, उनके स्थानांतरण के बाद से ही यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया. जिसके कारण संचालक सहित प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से जुड़े लोग अब नया प्रपंच रचने लगे हैं. उनके शिकार जिले के दो पदाधिकारी हुए हैं. पता नहीं इसकी आंच आगे कहां तक जायेगी. लोगों ने प्रशासन से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने एवं सील के समय जब्त किये सामानों को सार्वजनिक करने एवं वैसे सभी संदिग्धों की लाइडिटेक्टर से जांच की मांग की है.

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