पेड़-पौधे पृथ्वी के फेफड़े, जिनकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य : डॉ अरुण जयसवाल

Published by : Dipankar Shriwastaw Updated At : 07 Jun 2026 5:55 PM

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गायत्री शक्तिपीठ में रविवार को व्यक्तित्व परिष्कार सत्र का आयोजन बड़े ही प्रेरणादायक वातावरण में किया गया.

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गायत्री शक्तिपीठ में रविवार को व्यक्तित्व परिष्कार सत्र का हुआ आयोजन

सहरसा. गायत्री शक्तिपीठ में रविवार को व्यक्तित्व परिष्कार सत्र का आयोजन बड़े ही प्रेरणादायक वातावरण में किया गया. जिसमें पर्यावरण दिवस के अवसर पर विशेष रूप से पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला गया. इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ अरुण कुमार जायसवाल ने मौजूद जनसमूह को संबोधित करते कहा कि पर्यावरण केवल प्राकृतिक संसाधनों का समूह नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन की आधारशिला है. उन्होंने बताया कि आज बढ़ते प्रदूषण, वृक्षों की कटाई एवं अनियंत्रित औद्योगिकीकरण के कारण पर्यावरण असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो रही है. जो आने वाले समय में गंभीर संकट का रूप ले सकती है. उन्होंने आगे कहा कि हम वह अंतिम पीढ़ी हैं जो पर्यावरण त्रासदी का दंश झेल रहे हैं. हम ही वह पहली पीढ़ी हैं जो इसे रोक भी सकते हैं. हमने इसे अभी सही नहीं किया तो आने वाले समय में आने वाली पीढ़ी इस बात को लेकर के कभी नहीं कोसेगी कि बुरे लोगों ने संसार को बुरा बनाया. वह हमें इसलिए भी माफ नहीं करेगी अच्छे लोगों ने अच्छा काम, शुद्ध पर्यावरण एवं शुद्ध वातावरण हमारे लिए छोड़ा.

उन्होंने कहा कि हम सभी व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करें जैसे वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग एवं स्वच्छता पर ध्यान दें तो पर्यावरण को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है. पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि हम प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर नहीं चलेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. उन्होंने मौजूद श्रोताओं को प्रेरित करते कहा कि व्यक्ति का सच्चा विकास तभी संभव है जब वह समाज एवं प्रकृति दोनों के प्रति जागरूक हो. उन्होंने जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान एवं प्रदूषण के दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे पृथ्वी के फेफड़े हैं, जिनकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है. कार्यक्रम में मौजूद युवाओं एवं महिलाओं को उन्होंने संदेश दिया कि व्यक्तित्व विकास केवल बाहरी गुणों तक सीमित नहीं है. बल्कि इसमें प्रकृति एवं समाज के प्रति जिम्मेदारी भी शामिल है. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रज्ञा मंडल, युवा प्रकोष्ठ एवं स्थानीय नागरिक मौजूद थे.

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