हो सकता है खूनी संघर्ष

Published at :17 Jul 2016 7:00 AM (IST)
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हो सकता है खूनी संघर्ष

आदेश के बाद भी भूमि विवाद का नहीं हो सका निबटारा बिक्रमगंज (कार्यालय) : धान की रोपनी शुरू होते ही प्रखंड क्षेत्र में बंदूकें गरजने लगी हैं. राज्य सरकार के आदेश के बाद भी स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही और अर्थलोलुपता के कारण अधिकतर भूमि विवादों का निबटारा समय से नहीं हो सका है. भूमि विवाद […]

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आदेश के बाद भी भूमि विवाद का नहीं हो सका निबटारा

बिक्रमगंज (कार्यालय) : धान की रोपनी शुरू होते ही प्रखंड क्षेत्र में बंदूकें गरजने लगी हैं. राज्य सरकार के आदेश के बाद भी स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही और अर्थलोलुपता के कारण अधिकतर भूमि विवादों का निबटारा समय से नहीं हो सका है. भूमि विवाद के कारण कभी भी इलाके में खूनी संघर्ष हो सकता है. गौरतलब हो कि प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों गांवों में भूमि विवाद का मामला सीओ, एलआरडीसी और एसडीओ के कार्यालय में लंबित है.
धान की रोपनी के समय में विवादित भूमि पर खेती करने को लेकर पूर्व में कई बार संघर्ष हो चुके हैं. कई लोगों की जाने भी जा चुकी हैं. प्रखंड क्षेत्र के नोनहर, बहुआरा, मैधरा, जोन्ही, मानी, शिवपुर, दुर्गाडीह सहित दर्जनों गांवों में भूमि विवाद के मामले हैं, जहां कभी भी खून खराबा हो सकता है. सभी मामले अंचल कार्यालय, भूमि उपसमाहर्ता और एसडीओ के कार्यालय में लंबित है. बिहार सरकार द्वारा धान की खेती शुरू होने से पूर्व सभी मामले का निबटारा करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया गया था. लेकिन, अधिकारियों की लापरवाही और अर्थलोलुपता के कारण अधिकतर मामले का निबटारा नहीं हो सका है. सूत्र बताते हैं कि सभी मामले में अंचल कार्यालय के दलालों द्वारा सौदेबाजी की जाती है,
जो लोग उनकी मांगों को पूरा करते हैं विवाद का निबटारा हो या न हो उनके पक्ष में कार्य होता है. उदाहरण के तौर पर बताया जाता है कि शहर के श्रीवास्तव मुहल्ले में श्रीनिवास तिवारी के भूखंड का मामला लंबित है इसके बाद भी विरोधी पक्ष द्वारा निर्माण का कार्य किया जाता है, जब अधिकारी के पास शिकायत की जाती है तो कार्य बंद कर देता है और फिर कार्य शुरू कर देता है. इस तरह के दर्जनों मामले है,
जो पैसा के बल पर कार्य किय जाते हैं. इस संबंध में सीओ राजीव रंजन ने बताया कि हमारे अंचल में कोई भी ऐसा मामला नहीं है जहां खून-खराबा होने की संभावना है. सभी विवादित मामले का निबटारा शीघ्र कर लिया जायेगा.
दाखिल-खारिज में तोल-मोल का खेल जारी
अंचल कार्यालय से किसी भी भूखंड का दाखिल खारिज कराना इन दिनों टेढ़ी खीर हो गयी है. आरटीपीएस काउंटर पर आवेदन देने के बाद भी निर्धारित समय से कार्य नहीं होने के कारण लोग महीनों से कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं. एक तरफ भुक्तभोगी अधिकारियों और कर्मचारियों पर पैसे की उगाही करने के लिए नित्य नये-नये तरकीब अपनाने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं
महागंठबंधन के कार्यकर्ता अधिकारियों पर विपक्षी पार्टी से मिल कर सरकार को बदनाम करने की बात कह रहे हैं. गौरतलब हो कि स्थानीय अंचल कार्यालय में दाखिल खारिज के दर्जनों आवेदन पिछले एक वर्ष से भी अधिक समय से लंबित है. भुक्तभोगी बताते हैं कि अंचलाधिकारी कभी सासाराम मीटिंग में व्यस्त रहने, तो कभी कर्मचारी के नहीं होने का बहाना बना दाखिल खारिज के कार्य को लंबित कर रहे हैं. कार्यालय में कार्य करनेवाले कर्मचारी बातों-बातों में इस बात का जरूर इशारा करते हैं कि जब तक साहब का हाथ गरम नहीं करेंगे और कर्मचारी के सुविधा शुल्क की अदायगी नहीं होगा
तब तक कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ेगा. कई भुक्तभोगी बताते हैं कि पैसा देने पर निर्धारित समय से पहले ही दाखिल खारिज हो जाता है. पैसा नहीं देने वालों को कई कृत्रिम तकनीकी कारण बता कर टालमटोल किया जाता है. इस संबंध में सीओ राजीव रंजन से पूछे जाने पर कहते है कि कागजातों की जांच किये बगैर किसी का दाखिल खारिज नहीं किया जाता है. पैसा लेने का आरोप कोई लगाता है तो इससे हम पर कोई प्रभाव पड़ने वाला नहीं है.
उधर महागंठबंधन के नगर अध्यक्ष मनोज कुमार का कहना है कि ये अधिकारी विपक्षी दलों से मिल कर सरकार को बदनाम करने का काम कर रहे है. इसकी शिकायत सरकार से की जायेगी. विधायक संजय कुमार सिंह ने बताया कि सीओ की बहुत शिकायत मिल रही है. इसकी जांच करायी जायेगी. आवश्यकता पड़ेगी तो इसको सबक भी सिखाया जायेगा.
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