3500 से घट कर 400 सौ रह गये बीएसएनएल के ग्राहक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :24 Jun 2016 7:49 AM (IST)
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हर दिन संचार साधनों की मांग बढ़ रही है़ लोग एक से बढ़ कर एक अपडेट वर्जन ले रहे हैं. एक समय में टेलिफोन का भी क्रेज था़ घंटी बजी नहीं की लोग दौड़ पड़तेथे़ आज हालात बदल गये हैं. हर समय लोगो की भीड़ लगी रहने वाली डेहरी एक्चेंज में आज कोई नहीं है़ […]
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हर दिन संचार साधनों की मांग बढ़ रही है़ लोग एक से बढ़ कर एक अपडेट वर्जन ले रहे हैं. एक समय में टेलिफोन का भी क्रेज था़ घंटी बजी नहीं की लोग दौड़ पड़तेथे़ आज हालात बदल गये हैं. हर समय लोगो की भीड़ लगी रहने वाली डेहरी एक्चेंज में आज कोई नहीं है़ सिर्फ सन्नाटा है.
डेहरी (कार्यालय) : कभी जिले मेंनंबर वन स्थान पर रहने वाले व चार हजार लाइनों की क्षमता वाली बीएसएनएल की आरएसयू इलेक्ट्राॅनिक एक्सचेंज आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. एक समय था जब यहां लैंड लाइन फोन का कनेक्शन पाने वालों की हर दम भीड़ लगी रहती थी.
लेकिन आज एक्सचेंज में इक्का-दुक्का लोग ही नजर आते हैं. रोहतास उद्योग समुह के परिसर में पोस्टा ऑफिस के सामने वाली बिल्डिंग में स्थापित टेलीफोन एक्सचेंज की क्षमता में बढ़ोतरी व आधुनिकीकरण की हलचल के बीच मथुरी पुल के समीप आठ जनवरी, 2000 को इसे शिफ्ट किया गया. उक्त एक्सचेंज का उद्घाटन करने पहुंचे तत्कालीन संचार मंत्री रामबिलास पासवान ने कहा था कि यह एक्सचेंज सभी सुविधाओं से युक्त होगा और यह प्रदेश के बेहतर 10 एक्सचेंजों में शामिल होगा. उस समय उपस्थित मुख्य महाप्रबंधक केएन महादवन ने भी उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाली कई बड़ी बाते कही थीं.
हालांकि, शुरू के दिनों में संचार क्रांति के रूप में उक्त एक्सचेंज का काम भी क्षेत्र में दिखा़ लेकिन काफी कम समय में इस एक्सचेंज ने अपना गौरव खो दिया है़ तत्कालीन केंद्रीय मंत्री को घोषणाएं सही साबित नहीं हुई और अब शहरवासी उक्त एक्सचेंज से अपना कनेक्श्न कटवा चुके हैं. विभागीय लापरवाही के कारण कभी 35 सौ से अधिक उपभोक्ताओं को सुविधा प्रदान करने वाले उक्त एक्सचेंज में उपभोक्ताओं की संख्या अब घट कर चार सौ से भी कम रह गया है.
बोले ग्राहक
डालमियानगर निवासी उपभोक्ता विनय कुमार मिश्र उर्फ विनय बाबा कहते हैं कि 20 वर्षों से अधिक समय से मैं बीएसएनएल लैंड लाइन फोन का उपभोक्ता हूं. आज जैसी स्थिति में मैने कभी भी इसकी सर्विस को नहीं देखा.
कौन के कई माह तक लगातार डेड रहने के बावजूद मुझे विभागीय लापरवाही का खामियाजा भुगतते हुए बिल जमा करना पड़ा है. उपभोक्ता ओमप्रकाश पांडेय कहते हैं कि विभाग द्वारा भेजे गये बिल को समय पर मुझे प्राप्त नहीं पर कई बार बिल जमा नहीं कर पाया. जिस कारण विभाग द्वारा मेरा फोन काट दिया गया. डूपलिकेट बिल की मांग करने पर प्रिंटर खराब होने की बात बताकर अधिकारी व कर्मी अपना पल्ला झाड़ लेते हैं. ऐसी स्थिति में लापरवाही विभाग की और सजा हम उपभोक्ताओं को भुगतनी पड़ती है. आखिर हम करें तो क्या करें.
अजय कुमार सिंह कहते हैं कि टेलीफोन डेड रहने की शिकायत करने पर उसी मरम्मती कराने में कई माह विभाग द्वारा लगा दिया जाता है. समय पर बिल नहीं मिलने व प्रिंटर की खराबी के कारण डूप्लिकेट बिल नहीं दिये जाने से मैं अजीज आकर अपना कनेक्शन कटवा दिया. अब दूसरे कंपनी के मोबाइल से अपना काम निश्चित होकर करता हूं. 25 वर्षीय व्यवसायी सुधीर कुमार कहते हैं कि बचपन से मेरे घर में टेलीफोन की घंटी बजती, मैने सुनी है.
अभी भी घर के सदस्यों की यह हार्दिक इच्छा है कि लैंड लाइन फोन रखुं,लेकिन जिस एक्सचेंज का खराब प्रिंटर दो सालों में नहीं मरम्मत कराया जा सका और न ही बदला जा सका उससे बेहतर सेवा की अपेक्षा रखना मुर्खता नहीं तो और क्या माना जायेगा.
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