कम वजन के बटखरे से ठगे जा रहे ग्राहक !
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Jun 2016 7:52 AM (IST)
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अनदेखी. सासाराम के बाजारों में नहीं होती बटखरों की जांच बड़े व छोटे दुकानों में सामान का वजन कम दिया जा रहा है. माप-तौल विभाग के अफसर दो वर्ष के अंतराल पर बांट व तराजू की जांच करते हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स तराजू की प्रत्येक एक वर्ष पर. इससे ग्राहक प्रतिदिन कम तौल के शिकार हो […]
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अनदेखी. सासाराम के बाजारों में नहीं होती बटखरों की जांच
बड़े व छोटे दुकानों में सामान का वजन कम दिया जा रहा है. माप-तौल विभाग के अफसर दो वर्ष के अंतराल पर बांट व तराजू की जांच करते हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स तराजू की प्रत्येक एक वर्ष पर. इससे ग्राहक प्रतिदिन कम तौल के शिकार हो रहे हैं.
सासाराम (शहर) : एक मुद्दत के बाद माप तौल विभाग चर्चा में आया. कुछ बड़े व्यवसायियों पर हाल डाला तो बड़ा खुलासा हुआ. ये छड़ के व्यवसायी हैं. क्विंटल में 10 किलो कम किया, तो प्रतिदिन टन बेचनेवाले व्यवसायी को हजारों का अनैतिक लाभ हुआ.
वहीं, खरीदारों को बड़ा आर्थिक नुकसान. ये दुकानें अमरा तालाब में नयी नहीं थी. न जाने कितने दिनों से ये व्यवसायी लोगों की हकमारी कर रहे थे. माप-तोल विभाग के अफसरों ने जांच की, तो छह व्यवसायी पकड़े गये. इसी जांच में एक और खुलासा हुआ कि माप-तौल विभाग के अफसर दो वर्ष के अंतराल पर बांट व तराजू की जांच करते हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स तराजू की प्रत्येक एक वर्ष पर. सवाल उठता है कि एक बार की जांच के बाद क्या यह मुमकिन नहीं कि दो वर्ष तक उक्त व्यवसायी गलत बांट तराजू का प्रयोग करें. यह संभावना अधिक है.
इसके लिये जरूरी है कि बांट तराजू का औचक निरीक्षण भी होना चाहिए. यह तो हुई बड़े व्यवसायी की बात. दुकानदारों व फुटपाथियों पर कार्रवाई के लिए भी विभाग सुस्त है. जबकि, इनकी संख्या हजारों में है और उन्हीं दुकानदारों केे यहां छोटे स्तर पर ही सही सबसे ज्यादा लोग कम तौल का शिकार हो रहे हैं.
दो वर्षों पर जांच का है प्रावधान: माप तौल निरीक्षक बताते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक तराजू की जांच प्रत्येक वर्ष व मैनुअल तराजू की जांच दो वर्ष पर करने का प्रावधान है. दो वर्ष में प्रत्येक तीन माह के अंतराल पर अलग-अलग क्षेत्र की जांच की जाती है. पहले तिमाही में हुई जांच क्षेत्र का पुनः दो वर्ष उपरांत नंबर आता है. इतने लंबे अंतराल का भरपूर फायदा छोटे कारोबारी उठाते हैं. उन्होंने बताया कि लकड़ी -डंडेवाला तराजू पूरी तरह अवैध है. इस का उपयोग नहीं होना चाहिए.
ग्राहकों की आंखों के सामने होती है ठगी
बड़े दुकानदारों की बात अलग है. छोटे दुकानदार भी ग्राहकों के आंखों के सामने ही ठगी करते हैं. ग्राहक अनभिज्ञतावश कम तौल का शिकार हो कर प्रतिदिन अपना नुकसान करवाते हैं.
शहर में नकली बांट और लकड़ी-डंडेवाले तराजू की भरमार है. फल सब्जी ठेला खोमचा पर बिकने वाली वस्तुओं की खरीदारी करने समय ग्राहक दुकानदार के तराजू पर विश्वास करते है जो घातक सिद्ध होता है. अधिकांश छोटे दुकानदार बांट की जगह ईंट पत्थरों के स्वयं बनाये गये बांटों का उपयोग कर ग्राहकों को चूना लगा रहे हैं. माप-तौल निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि मैनुअल तराजू आदि की जांच दो वर्ष में एक बार की जाती है.
जबकि, इलेक्ट्रॉनिक तराजू की जांच प्रत्येक वर्ष होती है. उपभोक्ताआरिफ खान ने बताया कि दो दिन पूर्व बाजार से ढाई किलो आम की खरीदारी की. वनज कम लगा तो घर के समीप स्थित एक दुकान पर इलेक्ट्रॉनिक मशीन (तराजू) पर इसकी तौला. करीब चार सौ ग्राम वनज कम निकला. अगर छोटे व्यापारियों के बांट ओर तराजू की जांच करायी जाये तो बड़े पैमाने पर धांधली उजागर होगी.
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