तेज धूप व पछुआ हवा ने घर से निकलना किया मुश्किल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 Jun 2016 7:53 AM (IST)
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वारिसलीगंज : पिछले तीन दिनों से मौसम के मिजाज में जो बदलाव आया है, उससे लोग परेशान व हलकान है. चेहरे को झुलसा देनेवाली पछुआ हवा व आग बरसाती तेज धूप ने लोगों को घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी है. इतना ही नहीं घर में पंखे की हवा भी लोगो को चुभन का […]
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वारिसलीगंज : पिछले तीन दिनों से मौसम के मिजाज में जो बदलाव आया है, उससे लोग परेशान व हलकान है. चेहरे को झुलसा देनेवाली पछुआ हवा व आग बरसाती तेज धूप ने लोगों को घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी है. इतना ही नहीं घर में पंखे की हवा भी लोगो को चुभन का एहसास करा रही है. गरमी से लोगों को न दिन में चैन है और न रात में आराम. वैसे तो सुबह आठ बजे के बाद से ही तेज धूप की तपिश का एहसास लोगों को शुरू हो जाता है. परंतु, जैसे-जैसे समय बढ़ता जाता है.
इसका तीखापन भी बढ़ता जाता है. तीन दिनों से तापमान बढ़ने का सिलसिला जो शुरू हुआ है, वह थमने का नाम नहीं ले रहा है. लू के थपेड़ों से बचने के लिए बच्चे, बुजुर्ग व महिलाओं ने दिन में घर से निकलना बंद कर दिया है. युवा व कामकाजी लोग ही आवश्यक कार्य होने पर चेहरे व शरीर को ढक कर निकलने को विवश हैं. वैसे तो बच्चों को कोचिंग व ट्यूशन के लिए घर से बाहर निकलने की वजह से सनबर्न व डिहाइड्रेशन का खतरा बना रहता है.
मौसमी फलों की बढ़ी बिक्री गरमी बढ़ने के साथ ही मौसमी फलों के बाजार में काफी मांग बढ़ गयी है. खरबुजा, लालमी, खीरा, ककड़ी आदि फलों की बिक्री में तेजी आ गयी है. वहीं, कच्चे आम को पका कर आमझोरा के रूप में उपयोग करने से गरमी में राहत मिलती है. फलत: कच्चे आम की डिमांड भी काफी बढ़ गयी है व विक्रेता ग्राहकों से इन मौसमी फलों का मनमाना दाम वसूल रहे हैं. जबकि लस्सी, कोल्डड्रिंक्स, सत्तू व जूस की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ रहती है.
डिहाइड्रेशन से बचाव पर दें ध्यान : चिकित्सकों की माने तो इस मौसम में लोगों को लू व सनबर्न के प्रकोप से बचने के लिए हमेशा सतर्क रहने की जरूरत है. इस मौसम में सर दर्द, तेज बुखार, डायरिया व डिहाइड्रेशन जैसी बीमारियां लोगों को ज्यादा प्रभावित करती है. सनवाइट के कारण स्किन में जलन व फोड़े-फुंसी की समस्या से भी लोग प्रभावित होते हैं. इस मौसम में खाली पेट नहीं रहना चाहिए. साथ ही थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी का सेवन करते रहना चाहिए. इस मौसम में पाचन प्रणाली के कमजोर होने की आशंका के मद्देनजर गरिष्ठ व तैलिय भोजन से परहेज करनी चाहिए.
गरमी से गहराया पेयजल संकट गरमी के बढ़ने के साथ भू-गर्भिय जल स्तर में गिरावट से कुएं सूखनेगये हैं. चापाकलों से भी पानी रुक-रुक कर निकल रहा है. इससे खास कर ग्रामीण क्षेत्रो में पेयजल संकट गहरा गया है. शहर में लोगों को पीने के लिए पानी का इंतजाम भी इस बार समाजसेवियों द्वारा नहीं किया गया है.
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