हो रही आंदोलन की तैयारी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :24 May 2016 1:18 AM (IST)
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पानी की कहानी. कहीं बूंद-बूंद के लाले, कहीं जलजमाव से परेशानी पानी को लेकर जिले में लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. गुस्से का कारण भी दो है. एक तरफ पानी नहीं मिल रहा, तो गुस्सास है और दूसरी तरफ गंदा पानी जमा है, तो गुस्सा है. इस दोनों समस्याओं से निबटने में प्रशासन […]
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पानी की कहानी. कहीं बूंद-बूंद के लाले, कहीं जलजमाव से परेशानी
पानी को लेकर जिले में लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. गुस्से का कारण भी दो है. एक तरफ पानी नहीं मिल रहा, तो गुस्सास है और दूसरी तरफ गंदा पानी जमा है, तो गुस्सा है. इस दोनों समस्याओं से निबटने में प्रशासन विफल साबित हुआ है. दोनों समस्याओं से निजात के लिए लोग आंदोलन करने का मूड बना रहे हैं.
सासाराम कार्यालय : पानी जीवन के लिए सब से अधिक जरूरी वस्तु है. लेकिन, यही पानी जब कहीं रूक जाये तो जीवन को नरक बना देता है. कहीं नहीं मिले तो पसीने-पसीने कर देता है. वर्तमान समय में जिले में दोनों परिस्थितियां एक साथ सामने आ खड़ी हुई है. दक्षिणी क्षेत्र कैमूर पहाड़ी व उसकी तलहटी के गांवों में पानी के लाले पड़े हैं. लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं.
प्रशासन की तरफ से टैकरों से पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. वहीं, दूसरी ओर जिला मुख्यालय सासाराम शहर के उत्तरी क्षेत्र में जमा पानी ने लोगों को परेशान कर रखा है. उत्तरी क्षेत्र के मुहल्लों में जलजमाव का नजारा कायम है. रेलवे के फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के क्रियान्वयन से स्थिति प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है. बरसात में होने वाली परेशानी से आशंकित लोग जलजमाव से मुक्ति के लिए आंदोलन करने की तैयारी में हैं. इधर, पहाड़ी गांवों के लोग पानी के लिए आंदोलन की रणनीति पर विचार-विमर्श करने लगे हैं.
शहर से पहाड़ी तक समस्या विकट
शहर के दक्षिणी क्षेत्र से लेकर कैमूर पहाड़ी के गांवों तक पीने का पानी का हाहाकार मचा है. शहर के मुहल्लों में न जलापूर्ति हो रही है और न जमीन का पानी ही पीने लायक है. वहीं, पहाड़ी के गांवों में तालाब व नदी में भी पानी नहीं बचा है. प्रशासन टैंकर से पानी की आपूर्ति कर रहा है. जो लोगों के लिए नाकाफी है. पानी के लिए कैमूरांचल विकास मोरचा के अध्यक्षा सुग्रीव खरवार आंदोलनरत हैं. पंचायत चुनाव के बाद आंदोलन करने के मूड में हैं. कहते है कि वर्षों से गरमी के दिनों में पानी की समस्या होती है. प्रशासन इसके लिए कोई ठोस योजना नहीं बना रहा है.
प्रदर्शन करने का लिया निर्णय
रेलवे के कार्य से उपजी स्थिति से परेशान शहरवासी आंदोलन की रणनीति बनाने लगे हैं. सोमवार को गोपालगंज मुहल्ले में लोगों ने बैठक की. बैठक में पहले नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी को आवेदन दे कर जलजमाव की समस्या दूर कराने की मांग करने के बाद डीएम के सामने धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है.
बैठक में उपस्थित अरुण कुमार सिंह, सुरेंद्र प्रसाद गुप्ता, संजीव कुमार, काजू कुमार, मंटू कुमार, मिथिलेश कुमार सिन्हा, अशोक कुमार सिंह, संजय कुमार शर्मा, संजय पांडेय, रितेश रंजन आदि ने बताया कि बरसात में पूरे मुहल्ले में जलजमाव की संभावना है. इसके लिए अंतिम दम तक आंदोलन होगा.
जलजमाव शहर की पुरानी समस्या
करीब पांच वर्ष पहले रेलवे ने मुगलसराय-गया रेल खंड पर फ्रेट कॉरिडोर निर्माण का कार्य शुरू किया था. लगभग उसी समय से शहर के उत्तरी क्षेत्र के पानी निकासी की व्यवस्था ध्वस्त हो गयी है.
बरसात की बात कौन कहे. गरमी में भी गोपालगंज, गौरक्षणी, गजराढ़, कुराइच, प्रेमचंद पथ आदि मुहल्लों में जलजमाव की समस्या बनी रहती है. हाल के दिनों में रेलवे ने गोपालगंज मुहल्ले के सामने तालाब को भरने का कार्य शुरू किया है. इससे आने वाले दिनों में इस मुहल्लेवासियों के लिए और कष्टकारी होने की संभावना बढ़ गयी है.
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