1.94 लाख का जुर्माना भी!

Published at :01 Apr 2016 2:10 AM (IST)
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1.94 लाख का जुर्माना भी!

बिजली विभाग ने एक बार फिर चौकाने वाला कारनामा किया है़ बिजली चोरी रोकने की जांच करने दावथ थाने के परसियां खुर्द गांव पहुंचे विभागीय अधिकारियों ने एक मृत व्यक्ति पर ही करीब दो लाख का बिजली जलाने व मारपीट करने की प्राथमिकी दर्ज करायी है. बिक्रमगंज कार्यालय : बिजली विभाग के कारनामें, तो हमेशा […]

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बिजली विभाग ने एक बार फिर चौकाने वाला कारनामा किया है़ बिजली चोरी रोकने की जांच करने दावथ थाने के परसियां खुर्द गांव पहुंचे विभागीय अधिकारियों ने एक मृत व्यक्ति पर ही करीब दो लाख का बिजली जलाने व मारपीट करने की प्राथमिकी दर्ज करायी है.
बिक्रमगंज कार्यालय : बिजली विभाग के कारनामें, तो हमेशा सुर्खियों में रहते हैं. लेकिन, इस बार विभाग द्वारा जो कारनाम किया गया है वह न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि विभागीय अधिकारियों के कर्तव्यनिष्ठा व ज्ञान का भी पोल खोल रहा है. बिजलीविभाग के आपूर्ति अवर प्रमंडल, बिक्रमगंज के सहायक अभियंता ब्रजेश कुमार ने दावथ थाने में एक प्राथमिकी दर्ज करायी है.
18 मार्च को दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में बताया गया है कि बिजली चोरी रोकने के अभियान में अपने कर्मियों के साथ 17 मार्च की दोपहर में जब वह दावथ थाना क्षेत्र के परसियां खुर्द गांव में पहुंचे, तो जांच के दौरान पाया कि रामवचन सिंह द्वारा टोका फंसाकर आटा चक्की चलाया जा रहा है.
इस संबंध में जब कार्रवाई शुरू की गयी, तो रामवचन सिंह गाली-गलौज करते हुए कर्मियों के साथ मारपीट करने लगे. इसकी सूचना दावथ थाने को दी गयी. उन पर बिजली चोरी के आरोप में 1,94,111 रुपये का जुर्माना लगाया गया है.
इधर, विद्युत आपूर्ति अवर प्रमंडल बिक्रमगंज के अधिकारी ब्रजेश कुमार ने इस मामले में कुछ भी बताने से इंकार करते हुए कहा कि यह अब कोर्ट का मामला है. इसका जवाब कोर्ट में दिया जायेगा.
20 वर्ष पहले ही हो चुकी है रामवचन िसंह की मौत !
इधर, गांव में रामबाबु सिंह, धर्मेंद्र सिंह, पप्पु सिंह, ललन सिंह सहित कई लोगों ने बताया कि जिस व्यक्ति को बिजली चोरी व मारपीट के मामले में आरोपित किया गया है, उसका निधन लगभग 20 वर्ष पहले ही हो चुका है. उनके घर में कोई आटा-चक्की न तो पहले थी और न ही आज है. यह सरासर अधिकारियों की मनगढ़त कहानी है.
बिजली अधिनियम के जानकार अधिवक्ता सतीश कुमार सिंह का कहना है कि बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा किये जा रहे प्राय: सभी बिजली चोरी की प्राथमिकी में विद्युत अधिनियम के संबंधित धाराओं का उल्लंघन किया जा रहा है. विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 126 के उप धारा-दो के अनुसार किसी भी परिसर के जांच के बाद निर्धारित औपबंधित दंड राशि की सूचना परिसर के मालिक काे नोटिस द्वारा उचित माध्यम से देनी है. उस नोटिस प्राप्ति की तिथि से एक सप्ताह के अंदर अगर काई आपत्ति दर्ज नहीं करता है, तब अग्रेतर कानूनी कार्रवाई करनी है.
इसी तरह विद्युत अधिनियम की धारा 135 की उपधारा-तीन में यह स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी परिसर के जांच के समय परिसर के स्वामी या उसके परिजन का होना आवश्यक है. वहां पायी गयी वस्तुओं की जब्ती सूची पर उसका हस्ताक्षर भी आवश्यक है. उसकी एक प्रति आरोपित को देना अनिवार्य है, लेकिन विभाग के द्वारा किसी भी मामले में ऐसा नहीं किया जाता है.
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