जर्जर हो चुका 33 हजार क्षमता का बिजली तार नहीं सह पा रहा लोडQ
Updated at : 05 Sep 2019 8:56 AM (IST)
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डेहरी (सदर) : वर्षों पहले मथुरापुर विद्युत ग्रिड से बीएमपी विद्युत उपकेंद्र को 33 हजार क्षमता का लाइन देने के लगाये गये विद्युत तार की स्थिति अच्छी नहीं है. आज भी वर्षों पहले लगाये गये बिजली के तार से बीएमपी विद्युत उपकेंद्र को 33 क्षमता की लाइन आपूर्ति हो रही है. बीएमपी विद्युत उपकेंद्र पर […]
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डेहरी (सदर) : वर्षों पहले मथुरापुर विद्युत ग्रिड से बीएमपी विद्युत उपकेंद्र को 33 हजार क्षमता का लाइन देने के लगाये गये विद्युत तार की स्थिति अच्छी नहीं है. आज भी वर्षों पहले लगाये गये बिजली के तार से बीएमपी विद्युत उपकेंद्र को 33 क्षमता की लाइन आपूर्ति हो रही है. बीएमपी विद्युत उपकेंद्र पर बढ़ते लोड के कारण ज्यादा तार से पावर लेते ही आये दिन जंपर व तार के टूटने की संभावना बनी रहती है.
पुराने हो चुके तार की जगह पर उच्च क्षमता बढ़ा कर तार नहीं लगाया गया, तो कभी भी उक्त उपकेंद्र की बिजली आपूर्ति ठप हो सकती है.
हाल के दिनों में जिस तरह से बिजली की आंखमिचौनी थी, उक्त क्षमता के तार की स्थिति को देख उपभोक्ता भी चिंतित हैं.
डालमियानगर में इएसआई अस्पताल के पीछे से 33 हजार के तार पर जुगाड़ विधि से ईंट बांध कर तार को अलग किया गया है. समय रहते विद्युत अधिकारियों द्वारा 33 हजार क्षमता के तार को उच्च क्षमता नहीं बढाया गया व दुरुस्त नहीं गया, तो कभी शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति ठप हो सकती है. हालांकि विद्युत अधिकारी कुछ दिन पहले तारों की मरम्मत करने व बदलने की बात तो कह रहे हैं. लेकिन, इसके बावजूद समस्या बरकरार है.
उपभोक्ता के आक्रोश को देख कर्मी रहते हैं भयभीत : आये दिन कभी तार टूटने से, तो कभी पावर कम होने व कभी लोड शेडिंग के कारण आये दिन घंटों बिजली आपूर्ति ठप रहती है. बिजली आपूर्ति ठप रहने से उपभोक्ताओं में आक्रोश बढ़ जाता है. उपभोक्ताओं के आक्रोश को देखते हुए विद्युत उपकेंद्र में तैनात कर्मी भी भयभीत रहते हैं. कर्मियों को भय बना रहता है कि उपभोक्ता कहीं मारपीट नहीं करने लगे.
उपकेंद्र को 20 से 22 मेगावाट की है जरूरत
बिजलीकर्मियों की मानें तो बीएमपी उपकेंद्र से बीएमपी विद्युत सेक्शन व टाउन विद्युत सेक्शन में इस उमस भरी गर्मी में 20 से 22 मेगावाट की जरूरत है. लेकिन, 17 मेगावाट से ऊपर लोड देते ही वर्षो पहले लगे 33 हजार लाइन देने के लिए लगे तार के टूटने की संभावना बनी रहती है. हालांकि, उक्त उपकेंद्र से 30 से ऊपर मेगावाट देने की क्षमता है. लेकिन, 33 हजार लाइन देने के लिए लगे तार की क्षमता अधिक नहीं होने के कारण परेशानी होती है. उक्त उपकेंद्र से अकेले टाउन विद्युत सेक्शन के डेहरी फीडर संख्या दो में आठ मेगावाट की जरूरत है.
क्या कहते हैं उपभोक्ता
उपभोक्ता वीरेंद्र कुमार, अभय कुमार, रितेश कुमार, संजीत कुमार, रामनिवास पांडेय आदि ने कहा कि आये दिन 33 हजार लाइन के तार में खराब आ जाती है. जर्जर तार को देख कर लगता है कि कभी भी बिजली आपूर्ति ठप हो सकती है. पुराने हो चुके तार को बदल कर नयी क्षमता के तार को लगाना चाहिए, ताकि बिजली आपूर्ति निर्बाध मिल सके. इस उमस भरी गर्मी में बिजली कटौती से परेशानी झेलना पड़ता है, जिससे आम लोग त्रस्त हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
मथुरापुर ग्रिड से बीएमपी विद्युत उपकेंद्र तक आनेवाले 33 हजार लाइन के तार को फसल के कटने के बाद बदला जायेगा. कुछ दिन पहले नहर पर बदला गया था. लोड शेडिंग के कारण थोड़ी समस्या आयी थी, जिसे दुरुस्त कर निर्बाध बिजली आपूर्ति की जा रही है.
अभय कुमार रंजन, कार्यपालक विद्युत अभियंता
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