जिले में संभावित बाढ़ को लेकर जिला प्रशासन ने कसी कमर, आपदा प्रबंधन को किया गया सतर्क

Published by :ARUN KUMAR
Published at :14 Apr 2026 6:10 PM (IST)
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जिले में संभावित बाढ़ को लेकर जिला प्रशासन ने कसी कमर, आपदा प्रबंधन को किया गया सतर्क

आपदा प्रबंधन को किया गया सतर्क

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समीक्षा बैठक में डीएम ने अधिकरियों के दिये कई जरूरी निर्देश

पूर्णिया. जिले में संभावित बाढ़ की पूर्व तैयारियों को लेकर जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई. इस बैठक में डीएम ने जिले के सभी 14 प्रखंडों में बाढ़ सुरक्षा, राहत सामग्री, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर गहन समीक्षा की और अधिकारियों को कई आवश्यक निर्देश दिये. समीक्षा के क्रम में पाया गया कि जिले में 01 जनवरी 2026 से 13 अप्रैल 2026 तक औसत सामान्य वर्षा 45.0 मिमी के मुकाबले 64.9 मिमी वास्तविक वर्षा दर्ज की गयी जो सामान्य से 44.2 प्रतिशत अधिक है.जिले की मुख्य नदियों (महानंदा, कनकई, परमान, दास, कोशी, सौरा और कारी कोशी) से मुख्य रूप से बायसी, अमौर, बैसा, डगरूआ, रूपौली और धमदाहा जैसे प्रखंड प्रभावित होते हैं. समीक्षा में पाया गया कि बाढ़ के दौरान विशेष सहायता प्रदान करने के लिए संबंधित अधिकारियों ने संकटग्रस्त समूहों की पहचान कर ली गयी है.

सभी तटबंध वर्तमान में सुरक्षित

गर्भवती महिलाओं धातृ महिलाओं बच्चों दिव्यांगों निराश्रित व्यक्तियों की सूची तैयार की गई है. जिले के सभी तटबंध वर्तमान में सुरक्षित है. संवेदनशील स्थलों पर अस्थायी झोपड़ी, बालू भंडारण और बालू भरे बोरों की व्यवस्था मानसून पूर्व करने के निर्देश दिए गए हैं.कटाव निरोधक कार्यकुल 32 स्थलों (अमौर-15, बैसा-04, बायसी-13) पर बाढ़ निरोधात्मक कार्य कराए जा रहे हैं. सड़कों और पुलों के नीचे पानी की निकासी सुगम बनाने के लिए सफाई का कार्य प्रगति पर है.

जिले में पर्याप्त मात्रा में नाव उपलब्ध

जिले में पर्याप्त मात्रा में नाव उपलब्ध है एवं एकरारनामा किया जा रहा है. 307 बाढ़ शरण स्थल चिन्हित किए गए हैं. इसके अतिरिक्त, भोजन वितरण के लिए 256 सामुदायिक रसोईकेंद्रों का चयन किया गया है.जिला भंडार में पर्याप्त मात्रा में पॉलीथीन शीट्स उपलब्ध हैं. सूखा राशन के पैकेट (चावल, दाल, आलू, चूड़ा, गुड़ आदि) के दर निर्धारण की प्रक्रिया जारी है.

103 मेडिकल टीम का गठन

103 मेडिकल टीमों (18 चलंत, 45 स्थायी, 40 अस्थायी) का गठन किया गया है. सभी आवश्यक दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है.पशुओं के लिए 36 सहायता केंद्र26 उप-केंद्र कार्यरत हैं. पशुओं के लिए 42 ऊंचे शरण स्थल चयनित किए गए हैं. प्रशिक्षण एवं समुदायिक जागरूकता हेतु एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से अब तक 1,400 बच्चों को सुरक्षित तैराकी का प्रशिक्षण दिया गया है. बाढ़ प्रवण प्रखंडों में सामुदायिक स्वयंसेवकों को एसडीआरएफ द्वारा प्रशिक्षित किया गया है.

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