सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर मखाना मामले में आखिर हो गई पूर्णिया की हकमारी!

Updated at : 03 Apr 2026 5:39 PM (IST)
विज्ञापन
सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर मखाना मामले में आखिर हो गई पूर्णिया की हकमारी!

अगवानपुर में खुलेगा मखाना अनुसंधान केंद्र

विज्ञापन

पूर्णिया की बजाय अब सहरसा जिले के अगवानपुर में खुलेगा मखाना अनुसंधान केंद्र

डीपीआर को लेकर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर द्वारा जारी पत्र से हो रहा खुलासा

विभागीय स्तर पर अगवानपुर में अनुसंधान केंद्र खोले जाने की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू

पूर्णिया. सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर मखाना यानी मखाना अनुसंधान केन्द्र के मामले में आखिरकार पूर्णिया की हकमारी हो ही गई. तमाम राजनीतिक बयानबाजी और घोषणाओं के बावजूद मखाना अनुसंधान केन्द्र अब पूर्णिया की बजाय सहरसा जिले के अगवानपुर में मखाना अनुसंधान केंद्र खोले जाने की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू हो गई है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, के निदेशक (अनुसंधान) की पहल पर अगवानपुर के लिए डीपीआर तैयार करने के लिए शुक्रवार को एक बैठक भी आहूत किए जाने की सूचना है. इस बैठक में सम्बन्धित वैज्ञानिकों की टीम को भी रखा गया है. मखाना अनुसंधान केन्द्र को लेकर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, के निदेशक के जारी पत्र से यह बात साफ हो गई है कि पूर्णिया में मखाना अनुसंधान केन्द्र की मांग को मुकाम नहीं मिल सका. यह अलग बात है कि मौजूदा राजनीतिक हालात में इसकी मांग उठाने वाली पूर्णिया की पब्लिक को यह आशंका पहले से थी.

जानकारी के अनुसार, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, के निदेशक (अनुसंधान) की ओर से जारी एक पत्र में लिखा है कि ‘बिहार सरकार द्वारा हाल ही में अगवानपुर, सहरसा में स्वीकृत मखाना अनुसंधान केंद्र की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के उद्देश्य से अधोहस्ताक्षरी की अध्यक्षता मेंअनुसंधान निदेशालय, बीएयू, सबौर के कॉन्फ्रेंस रूम में एक बैठक बुलाई गई है. इस पत्र में कई कृषि वैज्ञानिकों को बैठक में शामिल होने को कहा गया है. पत्र में बैठक की तिथि 03 अप्रैल 2026 बतायी गई है. दरअसल, मखाना अनुसंधान केन्द्र की स्थापना को लेकर पूर्णियावासी संजीदा रहे हैं. अभी भी सबकी मांग है कि मखाना से जुड़े केन्द्र की स्थापना पूर्णिया में होनी चाहिए. मगर, इस पत्र ने पूर्णियावासियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. अब यह बात लगभग तय हो गई है कि मखाना अनुसंधान केन्द्र पूर्णिया से छिन कर दूसरे जिले को दे दिया गया.

पूर्णिया कृषि कालेज में खुलना था यह केन्द्र

गौरतलब है कि बिहार सरकार के चतुर्थ कृषि रोड मैप वर्ष 2023-28 के पृष्ठ संख्या 82 पर चौथे नंबर पर अंकित किया गया था कि सेन्टर ऑफ एक्सिलेंस फॉर मखाना पूर्णिया के भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय में स्थापित किया जाएगा. जानकारी के मुताबिक बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति उद्याान निदेशालय, कृषि विभाग के निदेशक द्वारा कई बार पत्राचार कर सेन्टर ऑफ एक्सिलेंस फॉर मखाना की स्थापना के लिए विस्तृत परियोजना को समर्पित भी किया गया है. इधर पिछले एक साल से सियासी तिकड़म के तहत सेन्टर ऑफ एक्सिलेंस फॉर मखाना को दूसरे जिले में स्थापित किए जाने की आशंका को बल मिल रहा था. फिर भी जिस तरह राजनीतिक बयान और घोषणाओं का दौर चल रहा था, उससे लग रहा था कि पूर्णिया के साथ यह साजिश नहीं होगी.

मखाना का बड़ा उत्पादक क्षेत्र है पूर्णिया

दरअसल, भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिकों की टीम द्वारा लगातार कई सालों की मेहनत के बाद पूर्णिया व कोशी प्रमंडल मखाना का बड़ा उत्पादक क्षेत्र बना और यहां मखाना उद्योग की संभावनाएं विकसित हुई. इससे रोजगार सृजन के नये अवसर भी बने हैं जिससे खेतिहर मजदूरों के पलायन पर नियंत्रण भी काफी हद तक हुआ है. वैज्ञानिकों के प्रयास से ही मखाना का जी. आई. टैग पूर्णिया को मिला जिससे किसानों को विपणन में अधिक से अधिक लाभ मिलना शुरू हुआ और उनकी सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति भी हुई.

बोर्ड की स्थापना को लेकर भी बनी है आशंका

याद रहे कि पूर्णिया में मखाना बोर्ड का मुख्यालय बनाए जाने की घोषणा 2025 में हुई थी और इस घोषणा के बीच विधानसभा चुनाव भी सम्पन्न हो गया. चुनाव खत्म होने के बाद से पूर्णिया के नागरिक उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शीघ्र ही मखाना बोर्ड के मुख्यालय निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी. मगर, अब तक इसकी कोई सुगबुगाहट नहीं दिख रही है. इस बीच अगवानपुर में अनुसंधान केन्द्र खोले जाने की बात सामने आ गई है. इससे लोगों की यह आशंका बढ़ गई है कि मखाना बोर्ड भी कहीं पूर्णिया से न छीना चला जाए. यहां के लोग राजनीतिक नेतृत्व पर भी सवाल उठा रहे हैं. वैसे, लोगों का मानना है कि आज के दौर में मखाना बोर्ड सही मायने में पूर्णिया की जरुरत है. इससे आने वाले दिनों में पूर्णिया का यह इलाका न केवल मखाना का कटोरा बनेगा बल्कि किसानों की तकदीर भी संवरेगी.

——————

आंकड़ों पर एक नजर

2012 में 12000 से 15000 हेक्टेयर में होती थी मखाना की खेती

12 वर्षों में मखाना आच्छादन का बढ़ा दोगुना से ज्यादा क्षेत्रफल

12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मखाना उत्पादकता में हुई वृद्धि2025 से हो रही 35324 हेक्टेयर में मखाना की खेती

1.25 लाख किसानों को प्रति हेक्टेयर हुआ अतिरिक्त लाभ

विज्ञापन
AKHILESH CHANDRA

लेखक के बारे में

By AKHILESH CHANDRA

AKHILESH CHANDRA is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन