बनमनखी से रेफर प्रसूता के पैसे खत्म होने पर पूर्णिया के निजी अस्पताल ने निकाला

Published by : Abhishek Bhaskar Updated At : 08 Jun 2026 5:42 PM

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पूर्णिया से मानवता को झकझोर देने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. यहां पैसे की हवस में एक निजी अस्पताल ने संवेदनशीलता की सारी हदें पार कर दीं.

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फिलहाल, जीएमसीएच पूर्णिया में गंभीर स्थिति में प्रसूता इलाजरत

पूर्णिया. पूर्णिया से मानवता को झकझोर देने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. यहां पैसे की हवस में एक निजी अस्पताल ने संवेदनशीलता की सारी हदें पार कर दीं. बनमनखी के एक निजी अस्पताल में प्रसव के बाद जब महिला की हालत बिगड़ी, तो उसे लाइन बाजार के एक बड़े निजी अस्पताल रेफर किया गया. वहां चार दिनों में 40,000 रुपये खर्च कराने के बाद, जैसे ही परिजनों के पैसे खत्म हुए, अस्पताल प्रबंधन ने गंभीर स्थिति में ही प्रसूता को जबरन बाहर निकाल दिया. बेबस परिजन उसे लेकर बीती रात राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल पूर्णिया पहुंचे हैं, जहां महिला की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है. महिला की पहचान रामजानी जानकीनगर के निवासी मो इस्तिहार की पुत्री राजिदा खातून के रूप में हुई है. पीड़िता के पिता ने बताया कि अभी तक हॉस्पिटल के खिलाफ शिकायत कहीं नहीं कर सके हैं, पहले मेरी बेटी जिंदा बच जाये, ऊपर वाले से यही मन्नत करते हैं.

बनमनखी में 15 हजार लेने के बाद किया रेफर

जानकारी के अनुसार, पीड़िता को प्रसव के लिए पहले बनमनखी के एक स्थानीय निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. ऑपरेशन कर बच्चे के जन्म के बाद महिला की स्थिति अचानक बिगड़ने लगी. स्थिति को नियंत्रित न होते देख वहां के डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए पूर्णिया के मेडिकल हब कहे जाने वाले लाइन बाजार के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया. बनमनखी में प्रसव के दौरान 15 हजार रुपये लिये गये.

पूर्णिया के निजी अस्पताल ने वसूल 40 हजार

महिला के पिता ने बताया कि लाइन बाजार के उस निजी अस्पताल में चार दिनों के भीतर उनसे करीब 40,000 रुपये जमा करवा लिए गये. परिवार ने अपनी जमा-पूंजी और कर्ज लेकर जैसे-तैसे यह रकम चुकायी, लेकिन जब चौथे दिन डॉक्टरों ने और पैसों की मांग की, तो परिजनों ने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि अब उनके पास फूटी कौड़ी भी नहीं बची है.

पैसे खत्म हुए, तो परिजन के आंसू भी नहीं आये काम

महिला के पिता ने आरोप लगाया कि पैसे खत्म होने की बात सुनते ही निजी अस्पताल के डॉक्टर का रवैया पूरी तरह बदल गया. महिला की गंभीर स्थिति को नजरअंदाज करते हुए, अस्पताल प्रशासन ने उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया. परिजनों की मिन्नतें और आंसू भी काम नहीं आये.

जीएमसीएच के महिला वार्ड में भर्ती

इसके बाद निजी अस्पताल की बेरुखी और क्रूरता के बाद बेबस और लाचार परिजन किसी तरह तड़पती हुई महिला को लेकर जीएमसीएच पूर्णिया पहुंचे. महिला को तुरंत इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया है. इस वार्ड से महिला वार्ड शिफ्ट किया गया.

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