शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से लेकर सर्वदलीय बैठक तक… इन पांच मुद्दों पर केंद्र को घेरेगा 'इंडिया' गठबंधन

Published by : Pritish Sahay Updated At : 08 Jun 2026 7:18 PM

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'इंडिया' गठबंधन की बैठक में विपक्ष के नेता, फोटो- पीटीआई

INDIA Alliance Meeting: विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन एक बार फिर एक्टिव हो रहा है. सोमवार (8 जून) को नई दिल्ली में हुई बैठक में गठबंधन ने नीट-यूजी और सीबीएसई परीक्षा विवाद, चुनावी पारदर्शिता, बेरोजगारी, महंगाई समेत अन्य मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है.

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INDIA Alliance Meeting: विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (INDIA) की सोमवार (8 जून) को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में बैठक हुई. बैठक में 23 दलों के प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ साझा रणनीति पर चर्चा की. गठबंधन ने कई राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी एकजुटता बनाए रखने और आगे की रणनीति तय करने पर सहमति जताई. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा- ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में पांच बिंदुओं पर सर्वसम्मति से सहमत हुए हैं. आज हमने यह तय किया है कि हम इन मुद्दों के लिए लड़ेंगे, इन पर काम करेंगे और आगे बढ़ेंगे.

NEET और CBSE विवाद पर शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग

बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि नीट-यूजी परीक्षा और सीबीएसई की उत्तर पुस्तिकाओं की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) से जुड़े मुद्दों ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इन परीक्षाओं में शामिल युवाओं के साथ विश्वासघात हुआ है. गठबंधन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की है.

चुनावी पारदर्शिता पर सीजेआई को पत्र लिखने का फैसला

‘इंडिया’ गठबंधन ने बैठक में मतदाता सूची में कथित हेरफेर, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चुनावी निष्पक्षता और ‘वोट लूट’ जैसे मुद्दों पर चिंता जताई है. गठबंधन में शामिल दलों ने फैसला किया है कि इन विषयों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को जल्द ही एक पत्र भेजा जाएगा.

विपक्षी दलों ने की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से देश की आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं और अन्य समस्याओं पर चर्चा के लिए तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है. गठबंधन का कहना है कि इन विषयों पर व्यापक राजनीतिक सहमति और संवाद की जरूरत है.

संसद के मानसून सत्र के लिए समन्वय रणनीति

बैठक में यह भी तय किया गया कि संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों के बीच समन्वय बनाए रखा जाएगा. इसके लिए प्रतिदिन नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी. साथ ही गठबंधन के नेताओं की बैठक हर दो महीने में आयोजित करने पर सहमति बनी और अगली बैठक हैदराबाद में करने का फैसला लिया गया.

‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में ये नेता हुए शामिल

‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में कांग्रेस की तरफ से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे शामिल हुए. इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़े. इसके अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती, भाकपा के डी राजा, माकपा के जॉन ब्रिटास और भाकपा (माले) लिबरेशन के दीपांकर भट्टाचार्य सहित कई अन्य नेताओं ने भी बैठक में हिस्सा लिया.

DMK और AAP ने बनाई बैठक से दूरी

बैठक में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और आम आदमी पार्टी (AAP) शामिल नहीं हुईं. आम आदमी पार्टी पहले ही सार्वजनिक रूप से गठबंधन से दूरी बना चुकी है, जबकि द्रमुक ने तमिलनाडु में कांग्रेस के उससे संबंध तोड़कर टीवीके की सरकार में शामिल होने के बाद बैठक का बहिष्कार करने का फैसला करने की घोषणा की थी. वहीं बैठक में तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के शामिल नहीं होने से जुड़े सवाल पर कांग्रेस सूत्रों ने कहा- टीवीके इस बैठक में शामिल नहीं हुई क्योंकि केवल उन पार्टियों को आमंत्रित किया गया था, जिनके संसद में सदस्य हैं.

भाजपा के बढ़ते प्रभाव के बीच विपक्षी एकता पर जोर

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की जबरदस्त हार ने विपक्षी गठबंधन को देश में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए एकजुट होने को मजबूर किया है. बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी गठबंधन के दलों से अपील की कि वे केंद्र सरकार की नीतियों और चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी एकजुटता को और मजबूत करें. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान पर हमला जारी रखे हुए है. विपक्षी नेताओं ने भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए साझा मंच को और मजबूत करने की जरूरत है.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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