18 वर्षों से सेवा दे रहे एमपीडब्ल्यू कर्मियों का दो दिवसीय घेराव शुरू, लंबित मांगों पर सरकार को अल्टीमेटम

लोहरदगा में प्रदर्शन करते स्वास्थ्यकर्मी. फोटो: प्रभात खबर
झारखंड एमपीडब्ल्यू कर्मचारी संघ ने 18 वर्षों से लंबित समायोजन की मांगों को लेकर लोहरदगा में धरना प्रदर्शन शुरू किया है. सरकार को 27 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया गया है, अन्यथा आंदोलन को राज्यव्यापी और उग्र करने की चेतावनी दी गई है.
लोहरदगा से गोपी कृष्ण कुंवर की रिपोर्ट
Lohardaga News: झारखंड एमपीडब्ल्यू कर्मचारी संघ ने वर्षों से लंबित अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है. शुक्रवार से लोहरदगा में सिविल सर्जन कार्यालय के समक्ष दो दिवसीय शांतिपूर्ण धरना एवं घेराव आंदोलन शुरू किया गया. आंदोलन में बड़ी संख्या में एमपीडब्ल्यू कर्मियों ने भाग लिया और सरकार से जल्द उनकी मांगों पर निर्णय लेने की अपील की. कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को राज्यव्यापी स्तर पर और उग्र किया जाएगा.
2008 से सेवा देने के बावजूद समायोजन नहीं
संघ का कहना है कि वर्ष 2008 से स्वास्थ्य विभाग में लगातार सेवा देने के बावजूद आज तक उनका समायोजन नहीं किया गया. कई बार सरकार और विभागीय अधिकारियों से आश्वासन मिला, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसी कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है.
13 जुलाई से चरणबद्ध आंदोलन जारी
एमपीडब्ल्यू कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत 13 जुलाई 2026 से चरणबद्ध तरीके से की गई थी. पहले चरण में 13 से 16 जुलाई तक सभी कर्मियों ने काला बिल्ला लगाकर अपने नियमित कार्य किए और सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया. दूसरे चरण में 17 से 20 जुलाई तक कर्मियों ने हाथों में मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन किया. इसके बाद 21 से 23 जुलाई तक नियमित कार्य करते हुए सांकेतिक भूख हड़ताल की गई. अब आंदोलन के अगले चरण में 24 और 25 जुलाई को सिविल सर्जन कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जा रहा है. संघ का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, लेकिन यदि सरकार ने समय रहते निर्णय नहीं लिया तो आगामी चरणों में इसे और व्यापक बनाया जाएगा.
27 जुलाई तक का अल्टीमेटम
संघ ने सरकार को 27 जुलाई तक का समय दिया है. कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि इस अवधि तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो राजधानी रांची के डोरंडा स्थित नेपाल हाउस में स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव कार्यालय का घेराव किया जाएगा. कर्मचारियों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी सरकार उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करती है, तो विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 में एमपीडब्ल्यू कर्मी अपनी प्रतिनियुक्ति का सामूहिक बहिष्कार करेंगे. इससे मेले में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है.
समायोजन और नई नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने की मांग
एमपीडब्ल्यू कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगों में वर्ष 2008 से स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एमपीडब्ल्यू कर्मियों का पूर्ण समायोजन शामिल है. संघ का कहना है कि वर्षों से सेवा देने वाले कर्मियों को नियमित करने के बजाय विभाग ने क्षेत्रीय कार्यकर्ता एवं बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पदों पर नई नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति जारी कर दी है. कर्मचारियों का कहना है कि पहले लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मियों का समायोजन किया जाना चाहिए. इसके बाद ही नई नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए. इसलिए उन्होंने संबंधित विज्ञप्ति को तत्काल रद्द करने की मांग भी उठाई है.
18 वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने हैं एमपीडब्ल्यू
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि एमपीडब्ल्यू कर्मी पिछले 18 वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. वे वेक्टर जनित रोग नियंत्रण, पल्स पोलियो अभियान, टीबी नियंत्रण कार्यक्रम, कुष्ठ उन्मूलन अभियान, नियमित टीकाकरण, एमसीडी कार्य, मेडिकल ड्यूटी और श्रावणी मेला जैसे बड़े आयोजनों में लगातार अपनी सेवाएं देते रहे हैं. इसके बावजूद उन्हें आज तक स्थायी सेवा का लाभ नहीं मिला. संघ का कहना है कि विभाग की अधिकांश जमीनी स्वास्थ्य योजनाएं एमपीडब्ल्यू कर्मियों के सहयोग से ही सफल होती हैं, लेकिन उनके भविष्य को लेकर सरकार ने कोई ठोस नीति नहीं बनाई है.
कई कर्मचारी रिटायरमेंट के करीब
एमपीडब्ल्यू कर्मचारी संघ ने कहा कि वर्ष 2008 में कार्य शुरू करने वाले कई कर्मचारी अब सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके हैं. कई कर्मियों का सेवा अवधि के दौरान निधन भी हो चुका है, लेकिन उनके समायोजन या सेवा सुरक्षा को लेकर विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई. संघ का कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद कर्मचारियों को अस्थायी स्थिति में रखना उनके साथ अन्याय है. यदि सरकार समय रहते निर्णय नहीं लेती है तो इससे हजारों परिवार प्रभावित होंगे.
सरकार से सकारात्मक पहल की अपील
धरना-प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार से संवेदनशीलता दिखाते हुए उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की. उनका कहना है कि वे किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते, बल्कि वर्षों से लंबित मांगों का न्यायसंगत समाधान चाहते हैं. कर्मचारियों ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित किए बिना उन्होंने चरणबद्ध और शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाया है. अब सरकार को भी उनकी समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर पहल करनी चाहिए.
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बड़ी संख्या में कर्मचारी रहे मौजूद
धरना कार्यक्रम में झारखंड एमपीडब्ल्यू कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रभाकर पाठक के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए. इस दौरान राजेश्वर महतो, नितिन कुमार गुप्ता, मेकयास अहमद, विकास कुमार महतो, मनीष प्रसाद केसरी, अकरम इरफान, सीताराम खरवार, आलोक कुमार, मनीष कुमार, सीताराम उरांव, गंधुर उरांव, देवेंद्र कुमार गिरी, रामकुमार महतो, मंसूर अंसारी, राजेश्वर किशोर तिर्की, आफताब आलम, शादाब कुरैशी, विनोद ताना भगत, रामनरेश भगत सहित बड़ी संख्या में एमपीडब्ल्यू कर्मी उपस्थित रहे. संघ ने दोहराया कि यदि सरकार ने 27 जुलाई तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन का अगला चरण राजधानी रांची में होगा और आवश्यकता पड़ने पर श्रावणी मेला 2026 में सामूहिक प्रतिनियुक्ति बहिष्कार जैसे बड़े कदम भी उठाए जाएंगे.
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लेखक के बारे में
By कुमार विश्वत सेन
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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