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निसान व ताजिये के साथ निकली मातमी जुलूस, ''नारा ए-हैदरी से गूंज उठा पूर्णिया''

Updated at : 17 Jul 2024 7:00 PM (IST)
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हर जुबां पर था वहां 'या-हुसैन-या अली' का नारा

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मुहर्रम:

हर जुबां पर था वहां ”या-हुसैन-या अली” का नारा

10वीं को इमामबाड़ों व अखाड़ों में उमड़ी भीड़

शहीदी नग्मों और मर्सिया से माहौल बना गमगीन

इमामबाड़ों में जत्था ने मांगी दुआएं, चढ़ाया चढ़ावा

पूर्णिया. पैगम्बर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन एवं उनके साथियों की शहादत की याद में मनाए जाने वाले मुहर्रम की 10वीं तारीख अकीदत के साथ मनायी गई. हालांकि पहलाम के साथ बुधवार को मुहर्रम सम्पन्न हो गया पर हुसैन की शहादत का गम 40 दिनों तक चेहल्लुम के दिन चालीसवां कर समाप्त किया जायेगा. मुहर्रम के आज आखिरी दिन भी कर्बला की याद में मजलिसे,मर्सिया, फतिया और कुरानखानी की गई. जिले के मुस्लिम बहुल इलाकों में अकीदतमंदों की काफी संख्या देखी गई जो जगह-जगह इमामबाड़ों का फेरा लगा रहे थे और सभी की जुबान पर या हुसैन-या अली का नारा था. इमामबाड़ों में फेरा लगाने और फातेहा का कार्य आज भी चला. दोपहर बाद से जुलूस की शक्ल में निशान के साथ ताजिया निकाली गई. इमामबाडों और अखाड़ों में पूरी भीड़ उमड़ पड़ी और हुसैनी परचम बुलंद हुआ। इस दौरान पूरा इलाका नारा-ए-हैदरी से गूंज उठा. बुधवार को मुख्यालय में लालगंज मिल्की, वनभाग, महबूब खां टोला, मधुबनी, मौलवीबाड़ी, खजांची, माधोपाड़ा, लाइन बाजार,खुश्कीबाग, गुलाबबाग, दमका और पोखरिया आदि इलाकों से ताजिये की जुलूस निकाली गई. यह जुलूस विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए पहले पूर्णिया सिटी इमामबाड़ा पहुंची और फिर खुश्कीबाग स्थित कर्बला में पहुंचकर पहलाम किया. बुधवार की ही देर शाम पूर्णिया सिटी के बड़ा इमामबाड़ा से दुलदुल निकाला गया जो सैयद शाहिद रजा के इमामबाड़ा होते हुए कर्बला तक गया.

दुलदुल की पांव धुलाई कर चढ़ाए गये प्रसाद

इससे पहले सिटी गुरुद्वारा में दुलदुल की पांव धुलाई हुई और प्रसाद चढ़ाए गये. दुलदुल के साथ ही अलम जुलूस निकाला गया. इस दौरान मजलिस का आयोजन किया गया. जुलूस में शामिल लोग नौहाखानी करते चल रहे थे और मर्सिया पढ़ रहे थे. जुलूस में काले लिबास पहने काफी संख्या में लोग शामिल थे, जो जंजीरी मातम कर रहे थे. जुलूस में शामिल तमाम लोग मातम मनाते हुए चल रहे थे. इस दौरान जगह-जगह पेयजल की व्यवस्था की गई थी. प्रशासन की ओर से प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारी सशस्त्र बल के साथ मातमी जूलूस को स्कोर्ट कर रहे थे.

कायम की सौहार्द की मिसाल

मुहर्रम के दौरान पूर्णिया के अमनपसंद लोगों ने फिर साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम की. अमूमन हर दरवाजे पर दुलदुल के पैर धोकर पूजे गये और इमाम हुसैन को याद किया गया. सिटी गुरुद्वारा में तो लोगों ने दुलदुल की पांव पूजा कर प्रसाद भी ग्रहण किया. दरअसल, यह परम्परा यहां वर्षों से चली आ रही है जिसका निर्वाह इस साल भी किया गया. खास तौर पर पूर्णिया सिटी में हर मजहब को मानने वाले लोग मातमी जुलूस निकलने के दौरान अपने-अपने दरवाजे पर खड़े हो गये. दुलदुल जिधर से निकला उधर ही लोग दौड़ पड़े और उसके पैर धोते हुए हजरत पैगम्बर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन एवं उनके साथियों की शहादत को नमन किया. इसमें कहीं कोई भेद-भाव नहीं दिखा और सबने आदर के साथ इस परम्परा को निभाया. इतना ही नहीं, इमामबाड़ों में भी दूसरे समुदाय के लोग पहुंचे और इसमें अपनी भागीदारी भी निभायी.

—————————————–फोटो- फोटो बाद में भेजा जायेगा

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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