पंजाब की जीत के बाद प्रीति जिंटा ने क्यों मारा ओपनर प्रियांश आर्य को पंच?
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 26 Apr 2026 3:41 PM
प्रीति जिंटा ने प्रियांश आर्य को मारा पंच
Delhi Capitals vs Punjab Kings : आईपीएल 2026 में दिल्ली और पंजाब के बीच एक हाई वोल्टेज मैच खेला गया. इस मैच का परिणाम जितना चौंकाने वाला था, उतना ही चौंकाने वाला था मैच का एक मोमेंट. मैच के उस मोमेंट में प्रीति जिंटा टीम के ओपनर प्रियांश आर्य के साथ मस्ती करती नजर आईं.
Delhi Capitals vs Punjab Kings : आईपीएल का रोमांच दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. शनिवार को दिल्ली कैपिटल्स ने बेहतरीन खेल दिखाया और 264 रन का टारगेट पंजाब किंग्स के सामने रखा. यह एक बड़ा टारगेट था, लेकिन पंजाब के शेरों ने इस बड़े टारगेट को 18.5 ओवर में ही पूरा कर लिया. पंजाब के लिए यह जीत बहुत मायने रखती है, इसलिए जश्न का अंदाज भी अनोखा था. फ्रेंचाइजी की को ओनर प्रीति जिंटा का यही अंदाज दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में नजर आया.
प्रियांश आर्य को प्रीति ने मारा पंच
पंजाब की जीत का जश्न मनाते हुए जब खिलाड़ी और ओनर एक दूसरे को बधाई दे रहे थे तो फ्रेंचाइजी की को ओनर प्रीति ने कई खिलाड़ियों की पीठ थपथपाकर, तो कई को गले लगाकर बधाई दी. प्रीति जब टीम के ओपनर प्रियांश आर्य से मिली तो पहले तो उन्हें गले लगाया और फिर उनके पेट पर पंच मारा. सेलिब्रेशन का यह अनोखा अंदाज देखकर दर्शक के साथ-साथ कमेंटेटर्स ने भी खूब मजे लिये.
प्रियांश की प्रतिक्रिया बहुत क्यूट थी
प्रीति जिंटा ने जब प्रियांश के पेट पर पंच मारा, तो उसका रिएक्शन देखने लायक था. उसने ओ मैम कहते हुए उनसे शायद शिकायत की, जिसके जवाब में प्रीति जिंटा हंसती हुई नजर आईं. गेम का यह खूबसूरत मोमेंट मस्ती भरा था. प्रीति जिंटा वैसे भी आईपीएल के दौरान काफी एनर्जेटिक अंदाज में रहती हैं और खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाती रहती हैं.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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