एक साल में चार परीक्षा नियंत्रक देने के बाद भी पूर्णिया विवि में उजागर हो रहा अंकों का घोटाला
Published by : Abhishek Bhaskar Updated At : 29 May 2026 5:23 PM
पूर्णिया विवि
पूर्णिया. एक साल में चार परीक्षा नियंत्रक देने के बाद भी पूर्णिया विवि के परीक्षा विभाग में अंकों का घोटाला उजागर होने का सिलसिला जारी है. कभी स्मारिका में तो कभी सत्यापन के बहाने अंकों के घोटाले उजागर हो रहे हैं. वर्तमान परीक्षा नियंत्रक प्रो. अमरकांत सिंह ने टीआर में 15 को 45 बनाये जाने का दावा कर पिछले परीक्षा नियंत्रकों के लिए मुसीबत खड़े कर दिये हैं. गौरतलब है कि कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने 22 जनवरी 2025 को पूर्णिया विवि में योगदान दिया था. 7 अप्रैल 2025 को प्रो. ए के पांडेय को परीक्षा नियंत्रक के कार्य से मुक्त किया गया. जबकि प्रो. अरविंद कुमार वर्मा को परीक्षा नियंत्रक का दायित्व दिया गया. कुछ महीनों में ही प्रो. अरविंद कुमार वर्मा की जगह प्रो. संतोष कुमार सिंह को परीक्षा नियंत्रक का प्रभार दे दिया गया. उनके बाद विशेष तौर से जीएलएम कॉलेज के प्रभारी प्रधानाचार्य प्रो. यू एन सिंह को परीक्षा नियंत्रक बनाकर लाया गया. वर्तमान में प्रो. अरविंद कुमार वर्मा को डीएसडब्लू, प्रो. संतोष कुमार सिंह को सीसीडीसी और प्रो. यू एन सिंह को कुलानुशासक का कार्यभार दिया गया है. जबकि वर्तमान में टीएमबीयू भागलपुर से संबद्ध प्रो. अमरकांत सिंह परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी वहन कर रहे हैं. इस प्रकार से 16 महीने में पूर्णिया विवि को चार परीक्षा नियंत्रक की जरूरत पड़ी और इनमें से तीन को परीक्षा विभाग से मुक्त करने के बाद विवि के प्रशासनिक कार्यों में अहम जवाबदेही दी गयी. ———– परीक्षा विभाग से जुड़े चर्चित मामले 1. बीच में ही रोकनी पड़ी यूजी की परीक्षा समर्थ के नोडल पदाधिकारी और परीक्षा नियंत्रक में टकराव के बीच इस साल स्नातक प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा बीच में ही स्थगित करनी पड़ी. प्रवेश पत्र में ऐसी गड़बड़ी इससे पहले नहीं हुई थी. जबकि परीक्षा के दौरान ओएमआर सही से भरा जाये, इसके लिए स्वयं कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह को परीक्षार्थियों को जागरूक करने की नौबत आ गयी. 2. कुलसचिव ने रद्द किये सैकड़ों छात्रों के औपबंधिक प्रमाणपत्र पूर्णिया विवि के तत्कालीन कुलसचिव डॉ. घनश्याम राय की ओर से मीडिया को जारी अधिसूचना के अनुसार 10.5.2022 को कुलसचिव डॉ. घनश्याम राय ने पूर्णिया विवि में योगदान दिया. उस तिथि के बाद से विवि परीक्षा विभाग ने सभी पाठ्यक्रमों में जितने भी औपबंधिक प्रमाण पत्र वर्तमान कुलसचिव के डिजिटल हस्ताक्षर से निर्गत किये हैं जिनमें कुलसचिव की अनुमति नहीं ली गयी, उन सभी औपबंधिक प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित करते हुए निरस्त कर दिया. 3. परीक्षा नियंत्रक के डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनय कुमार सिंह के डिजिटल हस्ताक्षर के दुरुपयोग किये जाने की बात सामने आयी .. जांच कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार स्वयं पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनय कुमार सिंह ने इस बारे में रिपोर्ट की. वैसे यह खुलासा पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनय कुमार सिंह ने तब किया है जब पूर्णिया विवि में चार सत्र का दीक्षांत समारोह संपन्न हो चुका था. फरवरी 2024 में रिटायर होने के बाद करीब उन्हें पता चला कि उनके डिजिटल साइन को इस्तेमाल किया जा रहा है. 4. उत्तरपुस्तिकाओं के कोडिंग-डिकोडिंग में वित्तीय गड़बड़ी नवंबर 2021 में पूर्णिया विवि में स्नातक 2020 की उत्तरपुस्तिकाओं के कोडिंग-डिकोडिंग में वित्तीय गड़बड़ी की बात सामने आयी. तत्कालीन सहायक परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुरेश कुमार मीना ने स्वयं विवि को आवेदन देकर बताया कि कोडिंग-डिकोडिंग कार्य के समन्वयक के तौर पर उनके हस्ताक्षर का फर्जीवाड़ा कर करीब 65 हजार की अवैध निकासी की गयी है. 5. एक साथ 11 लाख उत्तरपुस्तिकाओं की खरीद का मामला पूर्व कुलपति प्रो. राजेश सिंह के कार्यकाल में करीब 11 लाख उत्तरपुस्तिकाओं की खरीद का मामला काफी सुर्खियों में रहा. सीनेट की पहली बैठक में यह मामला विधान पार्षद डॉ. संजीव कुमार सिंह ने उठाते हुए सवाल किया कि जिस विवि में एक लाख छात्र भी नहीं हैं, वहां एक बार में 11 लाख उत्तरपुस्तिकाओं की खरीद कर लेना अपने आप में संदेहास्पद प्रतीत होता है. यह मामला सीएजी तक भी ले जाया गया. इसमें बताया गया कि उत्तरपुस्तिका की आपूर्तिकर्ता एजेंसी को करीब 2 करोड़ रुपए भुगतान किया गया. 6. ओएमआर शीट पर स्नातक प्रवेश परीक्षा का विवाद पहले वर्ष में पूर्णिया विवि की ओर से स्नातक प्रवेश परीक्षा में करीब 60 हजार परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे. यह परीक्षा ओएमआर शीट पर ली गयी. बाद में कई महीने तक हड़कंव मचा रहा कि राज्यस्तर पर ओएमआर शीट पर विश्वविद्यालयों में ली गयी परीक्षाओं की रिपोर्ट ली जा रही है. 7. दो उप परीक्षा नियंत्रक ने दिया इस्तीफा तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक वन डॉ. नवनीत कुमार और तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक टू डॉ. किसलय किशोर ने विवि प्रशासन को भेजे इस्तीफे में आरोप लगाया कि कार्यवाहियों में नियम-परिनियम की उपेक्षा की जा रही है. साथ ही उनके जो पद और अधिकार हैं, उसके तहत उनकी भूमिका गौण कर दी गयी है. एकतरफा निर्णय लेकर कार्य किये जा रहे हैं. कार्रवाई केवल एक, वह भी आधी-अधूरी परीक्षा विभाग की अनियमितताओं के बीच एक परीक्षा नियंत्रक को पदमुक्त करने के कुछ दिन बाद निलंबित किया गया. 14 महीने से निलंबित प्रो. एके पांडे पर विभागीय कार्यवाही चल ही रही है. अभी तक मूल्यांकन निदेशक, टेबुलेटर, स्पेशल टेबुलेटर इत्मिनान की नींद सो रहे हैं. परीक्षा बोर्ड में ठस्से से बैठकर परीक्षाफलों पर मुहर लगानेवाले डीन भी निफिक्र हैं.
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