मखाना अनुसंधान केंद्र छिन गया, अब मखाना बोर्ड को लेकर भी बना है संशय

अब मखाना बोर्ड को लेकर भी बना है संशय
मखाना पर खूब हुई सियासत, वादा भी हुआ लगातार पर मजबूत नहीं दिख रहा इरादा
हकमारी से हताश व निराश हो रहे पूर्णिया के लोग, राजनीतिक नेतृत्व पर उठा रहे सवाल
पूर्णिया. लगातार हकमारी से पूर्णिया के नागरिक हताश हो चले हैं. पहले एसबीआई का जोनल ऑफिस गया फिर मखाना अनुसंधान केन्द्र भी छीना चला गया और अब मखाना बोर्ड को लेकर संशय बना हुआ है. यहां के लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या सचमुच पूर्णिया में मखाना बोर्ड का मुख्यालय बनेगा या फिर पूर्णिया राजनीतिक साजिश का शिकार हो जाएगा ! यहां के लोग अब राजनीतिक नेतृत्व की मजबूती पर भी सवाल उठाने लगे हैं. लोगों का कहना है कि पिछले चुनाव के दौरान मखाना बोर्ड के लिए वादा किए जाने के बाद सियासत भी खूब हुई पर इरादा मजबूत नहीं दिख रहा है और यही वजह है कि संशय की स्थिति बनी हुई है. गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से पहले पूर्णिया की जनसभा में प्रधानमंत्री मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा कर गये थे और तबसे ही पूर्णिया के लोग मखाना बोर्ड स्थापित किए जाने का इंतजार कर रहे हैं. यह माना जाने लगा कि मखाना बोर्ड खुलने के बाद मखाना के उत्पादन, प्रोसेसिंग और निर्यात की नई संभावनाएं विकसित होंगी और बोर्ड की पहल पर मखाना उत्पाद को वैश्विक मंच मिलेगा जिससे किसानों में समृद्धि आएगी और इस क्षेत्र में रोजगार के नये अवसर भी मिल सकेंगे. प्रबुद्ध नागरिकों की यह सोच बनी कि मखाना बोर्ड किसानों को तकनीकी सहायता, अनुदान, आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयां, सीधा बाज़ार और वैश्विक स्तर पर मखाने की ब्रांडिंग व निर्यात में मदद करेगा, इससे उनकी आय बढ़ेगी और पूरा क्षेत्र आर्थिक रूप से समृद्ध होगा. मगर, महीनों गुजर जाने के बावजूद इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई जबकि उल्टे पूर्णिया कृषि कालेज परिसर में खुलने वाला मखाना अनुसंधान केन्द्र सहरसा जिले में चला गया. यही वजह है कि मखाना बोर्ड को लेकर पूर्णिया के लोग संशय में हैं.अनुसंधान केन्द्र ही नहीं मखाना बोर्ड का भी है हकदार
अगर मखाना मामले में पूर्णिया की मौजूदा स्थिति देखी जाए तो यह न केवल अनुसंधान केन्द्र बल्कि मखाना बोर्ड का भीअसली हकदार दिखेगा. हकीकत यह है कि बदलते दौर में पूर्णिया का इलाका मखाना का बड़ा उत्पादक क्षेत्र बन गया है. इसी नजरिये से पूर्णिया कृषि कॉलेज में मखाना विकास का नोडल केद्र भी स्थापित किया गया है. इतना ही नहीं, पूर्णिया कृषि कॉलेज द्वारा 2016 में मखाना बीज विकसित किया गया जो भारत सरकार द्वारा बीज प्रमाणीकरण मानकों के प्रकाशन के अधीन ‘भारत का राजपत्र’ में वर्ष 2019 में अधिसूचित है. बड़ा उत्पादक क्षेत्र होने के कारण मखाना का जीआई टैग भी पूर्णिया की संस्था ‘मिथिलांचल मखाना उत्पादक संघ’ को ही मिला हुआ है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिलों यानी पूर्णिया प्रमंडल में 20914 हेक्टेयर में मखाना की खेती होती है. मखाना बीज का प्रोडक्शन 47356 टन और मखाना लावा का प्रोडक्शन 23678 टन होता है, जो कोसी और दरभंगा को बहुत पीछे छोड़ जाता है.
पूर्णिया से है आयात-निर्यात की पूरी गुंजाइश
पूर्णिया एक ऐसा प्रमंडलीय मुख्यालय है जहां से आयात-निर्यात की पूरी गुंजाइश है. पूर्णिया अगर हवाई मार्ग से जुड़ा है तो रेल और सड़क ट्रांसपोर्टिंग की भी पर्याप्त सुविधाएं सुलभ हैं. पूर्णिया में ही गुलाबबाग मंडी भी है जो मखाना की खरीद, बिक्री एवं निर्यात के लिए सबसे बड़ा एवं एक मात्र केंद्र है. गुलाबबाग मखाना और मक्का का हॉट मार्केट बना हुआ है जहां देश की बड़ी कंपनियां सक्रिय हैं और विदेशों से भी कारोबार होता है. मखाना कारोबार से यहां के हजारों लोग जुड़े हैं जिन्हें इससे अच्छी आमदनी हो रही है. इस लिहाज से यह माना जा रहा है कि मखाना कारोबार और इसके आयात-निर्यात को बढ़ावा देने के लिए पूर्णिया ही उपयुक्त जगह है जहां मखाना तकनीक को विकसित किए जाने की जरुरत है. लोग कहते हैं कि इससे स्वाभाविक रुप से किसानों की जिंदगी संवर जाएगी.————–
आंकड़ों पर एक़ नजर
20914 हेक्टेयर में मखाना की खेती होती है पूर्णिया प्रमंडल में
47356 टन मखाना बीज का प्रोडक्शन होता है पूर्णिया में23678 टन होता है पूर्णिया में मखाना लावा का प्रोडक्शन
05 सालों में तीगुना से भी अधिक मखाना के रकवा में हुई है वृद्धि——————————
मखाना बोर्ड से होगा लाभ
मखाना की ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर दिया जाएगा जोरप्रशिक्षण के साथ मिलेगी अनुदान और वित्तीय सहायता
उत्पादन में होगी बढ़ोतरी, बढ़ेगी किसानों की आयमखाने का बढ़ेगा निर्यात, अर्थव्यवस्था में आएगी मजबूती
युवाओं के लिए बनेंगे रोजगार के कई नये अवसरकिसानों को मिलेगा मखाने का उचित मूल्य होगा आर्थिक सुधार
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