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परवान चढ़ा मकर संक्रांति का बाजार, होगा तीन करोड़ से अधिक का कारोबार

Updated at : 12 Jan 2026 6:59 PM (IST)
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परवान चढ़ा मकर संक्रांति का बाजार, होगा तीन करोड़ से अधिक का कारोबार

बिहार का पारंपरिक पर्व मकर संक्रांति के अब महज 24 घंटे शेष रह गये हैं. यही कारण है कि बाजारों की रौनक बढ़ गयी है.

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प्रमंडल के विभिन्न बाजारों में पूर्णिया से की जा रही तिलकुट की सप्लाई

दूध-दही की हुई एडवांस बुकिंग, कम हुआ गांवों से आने वाले दूध का आवक

पूर्णिया. बिहार का पारंपरिक पर्व मकर संक्रांति के अब महज 24 घंटे शेष रह गये हैं. यही कारण है कि बाजारों की रौनक बढ़ गयी है. तिलकुट के आइटमों के साथ दूध और दही के कारोबार में अचानक तेजी आ गयी है. ठंड से राहत और बाजारों में मजबूत ग्राहकी को देख कारोबारियों की उम्मीदें भी बढ़ी हैं. इस बार मकर संक्रांति में पांच करोड़ से अधिक के कारोबार का अनुमान लगाया जा रहा है. कारोबारियों की मानें तो सिर्फ दूध की खपत दस लाख लीटर से अधिक होने वाली है, जबकि सौ टन से अधिक दही की बिक्री हो सकती है. जिले के सभी डेयरी फार्म और दूध-दही की दुकानों में इसकी तैयारी पहले से की गई है. दूसरी ओर तिलकुट का कारोबार भी अब उफान पर आ गया है, जबकि बाजारों में चूड़ा-गुड़ व मुरही की बिक्री पहले से तेज है.

गौरतलब है कि मकर संक्रांति के मौके पर कभी गया के भरोसे रहने वाला पूर्णिया आज खुद आत्मनिर्भर हो गया है. गया से निकल कर तिलकुट का कारोबार अब पूरे पूर्णिया शहर में फैल गया है. अपने पूर्णिया में ही बड़े पैमाने पर तिलकुट का मौसमी उद्योग चलाया जा रहा है जबकि सौ के करीब तिलकुट की छोटी-बड़ी दुकानें चल रही हैं, जहां मकर संक्रांति तक करोड़ से अधिक के कारोबार होने की संभावना बतायी गयी है. फूलन तिलकुट भंडार के मालिक ब्रजेश कुमार यादव बताते हैं कि मकर संक्रांति को लेकर बाजार में तिलकुट की डिमांड भी बढ़ गयी है और ग्राहक दूर-दूर से आकर खरीदारी कर रहे हैं. श्री यादव कहते हैं कि अब पूर्णिया में ही पर्याप्त मात्रा में तिलकुट का निर्माण किया जा रहा है.

डेयरी फार्म और प्रतिष्ठानों में है दूध-दही की तैयारी

मकर संक्रांति को लेकर जिले में विभिन्न डेयरी कंपनियों के साथ लोकल डेयरी फार्म पर दूध और दही का लोड बढ़ गया है. शहर में दही बेचने वाली दुकानों की संख्या पांच सौ से अधिक है और अमूमन हर दुकान में मकर संक्रांति के लिए बेहतर बुकिंग हुई है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस बार डिमांड के हिसाब से अधिक सप्लाई के लिए तैयारी की गयी है, ताकि अतिरिक्त डिमांड भी पूरी की जा सके.

जानकारों के अनुसार, अकेले कोशी डेयरी में दोदिन के हिसाब से चार से पांच लाख लीटर दूध और एक लाख 60 हजार किलो दही का स्टॉक किया जा रहा है जबकि सामान्य दिनों में यहां पौने 2 लाख लीटर दूध की खपत होती है. इसी अनुपात में सुधा, अमूल और आर्शीवाद का दूध व दही का भी भंडारण किया जा रहा है जबकि विभिन्न दुकानों व प्रतिष्ठानों में लोकल दुग्ध विक्रेताओं की मदद से अलग से तैयारी की गई है. कई विक्रेताओं का अनुमान है कि कुल मिलाकर 15 लाख लीटर और सवा सौ टन के करीब दही की खपत हो सकती है. दूध और दही के बड़े कारोबारी रंजीत छत्री का कहना है कि दूध और दही की खपत लगातार दो दिनों तक होगी. मिष्ठान्न कारोबारी हरि शर्मा कहते हैं कि इस बार मौसम साथ दे रहा है तो ग्राहकी भी है जिससे बेहतर कारोबार की उम्मीद बन रही है.

तिलकुट की अलग-अलग वेराइटी उपलब्ध

गया के तिलकुट का स्वाद अब पूर्णिया में भी मिल रहा है. शहर में संचालित तिलकुट की अलग-अलग दुकानों में चीनी खस्ता, चीनी रवई, चीनी शालीमार, चीनी तिलकुट, गुड़ खस्ता, गुड़ रवई, गुड़, शालीमार, गुड़ तिलकुट, पीनट चिक्की स्वीट्स, तिल बादाम लड्डू, तिल चिकी चिकी मिठाई, ड्राई फ्रूट तिलकुट, खोवा तिलकुट, केशर तिलकुट बनाया जा रहा है. कारोबारी की माने तो गुण व चीनी से बनी तिलकुट का कारोबार इस बार भी सबसे अधिक हो रहा है.

20 सालों से चखा रहे गया के तिलकुट का स्वाद

एक जमाना था जब मकर संक्रांति के मौके पर पूर्णिया के बाजार गया के तिलकुट पर निर्भर थे. उस समय तिलकुट के दाम भी अपेक्षाकृत अधिक होते थे. मगर, हालिया सालों में पूर्णिया में भी तिलकुट का मौसमी उद्योग यहां भी फैल गया है. पहले यहां तिलकुट के लिए प्रसिद्ध गया और पुरुलिया के ही कारीगर आते थे पर अब इसके साथ-साथ पटना और भागलपुर के गोराडीह के कारीगर भी पूर्णिया में काम कर रहे हैं. कारीगरों ने बताया कि वे पिछले बीस सालों से पूर्णिया वालों को गया के तिलकुट का स्वाद चखा रहे हैं. गौराडीह के कारू मंडल ने बताया कि एक सीजन में 20 से 25 हजार की कमाई हो जाती है. कारीगरों ने बताया कि वे लोग माल बनाने वाली जगह पर ही डेरा डालते हैं जिससे रहने खाने का अलग से खर्च नहीं लगता है.

आंकड़ों पर एक नजर

15 लाख लीटर से अधिक दूध की खपत मकर संक्रांति पर होगी

125 टन से ज्यादा दही इस बार गटकने वाले हैं पूर्णिया के लोग500 से अधिक है शहर में दही बेचने वाली दुकानों की संख्या

60 रुपये प्रति लीटर दही का खुदरा बाजार में चल रहा दाम120 से 140 रुपए प्रति किलो बेचा जा रहा है दही

1000 क्विंटल चूड़ा-गुड़ की अब तक हो चुकी है बिक्री250 से लेकर 650 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा तिलकुट

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH CHANDRA

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By AKHILESH CHANDRA

AKHILESH CHANDRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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