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कबीर की वाणी आज भी हमें आत्मचिंतन की ओर प्रेरित करती है : प्रो अनंत

पूर्णिया महिला महाविद्यालय

– पूर्णिया महिला महाविद्यालय में हिन्दी विभाग की ओर से ‘वर्तमान समय में कबीर की प्रासंगिता ” विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी पूर्णिया. पूर्णिया महिला महाविद्यालय में शुक्रवार को हिन्दी विभाग की ओर से ‘वर्तमान समय में कबीर की प्रासंगिता ”””” विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य प्रो. अनंत प्रसाद गुप्ता ने कहा कि कबीर वर्तमान समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने कि वे अपने समय में थे. कबीर की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दी साहित्य के हजार वर्षों के इतिहास में कबीर जैसा व्यक्तित्व लेकर कोई कवि या लेखक उत्पन्न नहीं हुआ. उनकी वाणी समय , सीमाओं और समाज से परे आज भी हमें आत्मचिंतन की ओर प्रेरित करती है. अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ उषा शरण ने कबीर की प्रासंगिता और उनके अद्भुत योगदान पर बात की. कार्यक्रम में साक्षी प्रिया ,निकिता कुमारी , फूल कुमारी , रूपाली ,रानी कुमारी, अदिति कुमारी आदि ने कबीर की प्रासंगिकता पर भाषण दिया . अरुणा ने कबीर के दोहों का पाठ किया. साक्षी कुमारी और मौसम कुमारी ने मंच संचालन किया. राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक कुमार गौरव ने कबीर पर ओजस्वी वक्तव्य दिया और इतिहास विभाग के प्राध्यापक सह परीक्षा नियंत्रक डॉ राकेश रोशन सिंह ने कबीर के दोहों की समीक्षा करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया. महिला महाविद्यालय के सारे शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों ने इस संगोष्ठी को सफल बनाने में अहम भूमिका निभायी.——————–कबीर का सारा बल सदाचरण पर है : प्रो. मीना हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. मीना कुमारी रजक ने कहा कि कबीर पुस्तकीय ज्ञान का खंडन, कबीर शास्त्र ज्ञान पर नही अपितु अभिनवजन्य ज्ञान पर बल देते हैं . कबीर का सारा बल सदाचरण पर है. कबीर मध्यकाल से लेकर 21वीं सदी तक प्रासंगिक हैं .उनकी प्रासंगिकता के बारे में विचार करते हुए उनके विचारों को आत्मसात करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि यह कबीर की प्रासंगिकता पर यह सेमिनार केवल एक कड़ी है. इसकी उपयोगिता और सार्थकता को स्थापित करने के लिए यहां सामने आये विचारों को आगे बढ़ाने की जरूरत है. कबीर की प्रासंगिकता आज पहले से ज्यादा : डॉ. नीतू हिन्दी विभाग की प्राध्यापिका डॉ नीतू कुमारी ने कहा कि कबीर की प्रासंगिकता आज पहले से ज्यादा है क्योंकि वे जिस साहस,आत्म परीक्षण, धैर्य, सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण की बात करते हैं उसकी जरूरत आज के इस डिजिटल युग में और भी ज्यादा है. आज की पीढ़ी को अगर शांति और समाज में एकता चाहिए तो तो उनकी बातों को अपने आचरण में उतरना चाहिए. कबीरदास का सच युगों तक गूंजता है : डॉ. प्रेरणा हिन्दी विभाग की प्राध्यापिका डॉ प्रेरणा ने कबीर के योगदान को याद करते हुए कहा कि कबीर की वाणी हर पाखंड को ललकारती है. उनमें भक्ति की गहराई और समाज – सुधार की धार एक साथ मिलती है. कबीरदास का सच शोर नहीं करता, पर युगों तक गूंजता है. डॉ प्रेरणा ने कबीर साहब पर लिखी अपनी कविता का भी पाठ किया.

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