जलालगढ़ के श्री आनंदकंद रामचंद्र ठाकुरबाड़ी से बरसती है विशेष कृपा
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 14 Jun 2026 8:48 AM
ठाकुरबाड़ी, जलालगढ़, पूर्णिया
Ramchandra Thakurbari: पूर्णिया जिले के जलालगढ़ प्रक्षेत्र की हृदयस्थली पर स्थित श्री आनंदकंद रामचंद्र ठाकुरबाड़ी न केवल गहरी आस्था का केंद्र है, बल्कि इस पूरे व्यावसायिक क्षेत्र की मुख्य पहचान भी है. बाजार के बीचों-बीच स्थापित इस ऐतिहासिक मंदिर में माथा टेक कर ही स्थानीय लोग अपने दिन की शुरुआत करते हैं.
पूर्णिया के जलालगढ़ से निकेश राय की रिपोर्ट
Ramchandra Thakurbari: जलालगढ़ बाजार के मुख्य केंद्र में स्थित श्री आनंदकंद रामचंद्र ठाकुरबाड़ी चौक आस्था, अध्यात्म और सामाजिक समरसता की एक अनोखी कड़ियों को पेश करता है. राहगीरों और दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए यह भव्य मंदिर इस इलाके का सबसे बड़ा लैंडमार्क बन चुका है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की अत्यंत मनोहारी प्रतिमाएं स्थापित हैं. इसके अलावा मंदिर परिसर में एक दिव्य शिवलिंग और हनुमान जी की प्रतिमा भी विराजमान है, जबकि निकास द्वार के दक्षिणी हिस्से में माता शीतला का विग्रह स्थापित है, जहां हर सुबह श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.
परिसर में स्थित कुएं के जल की महत्ता और प्राकृतिक छांव
ठाकुरबाड़ी का पूरा परिसर काफी बड़े भूभाग में फैला हुआ है जो इसकी भव्यता को दर्शाता है. मंदिर प्रांगण के भीतर एक प्राचीन कुआं स्थित है, जिसके पवित्र जल का उपयोग आज भी दैनिक पूजन विधि और अनुष्ठानों में अनिवार्य रूप से किया जाता है. इसके साथ ही परिसर में स्थित विशाल पीपल और आंवले के पेड़ न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि मंदिर आने वाले भक्तों और राहगीरों को चिलचिलाती धूप में शीतल छांव व मानसिक शांति प्रदान करते हैं.
एकादशी-पूर्णिमा को विशेष अनुष्ठान और रविवार का महाप्रसाद
ठाकुरबाड़ी की दैनिक और साप्ताहिक गतिविधियों में मारवाड़ी समाज सहित पूरे स्थानीय व्यापारिक वर्ग की अटूट आस्था जुड़ी हुई है. आम दिनों के मुकाबले एकादशी और पूर्णिमा की तिथि को यहां विशेष भव्य पूजन का आयोजन किया जाता है. वहीं, प्रत्येक रविवार की शाम को होने वाली महाआरती में विशेष महाप्रसाद का भोग लगाया जाता है, जिसे ग्रहण करने और आरती में शामिल होने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ उमड़ती है.
मलेमास में 6 दशकों से अखंड रामायण पाठ की अनूठी परंपरा
“इस ठाकुरबाड़ी की सबसे बड़ी विशेषता यहां पिछले 60 वर्षों (6 दशकों) से चली आ रही धार्मिक परंपरा है, जिसके तहत हर मलेमास (अधिकमास) के दौरान पूरे महीने अखंड श्रीरामचरितमानस पाठ का आयोजन किया जाता है.”
इस दौरान पूरा जलालगढ़ क्षेत्र मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के भजनों और चौपाइयों से गुंजायमान रहता है. स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, मलेमास के दौरान इस पावन स्थल पर किए जाने वाले रामायण पाठ और दर्शन से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और पूरे सीमांचल क्षेत्र पर प्रभु की विशेष कृपा बनी रहती है.
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लेखक के बारे में
By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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