देश के बड़े शहरों से पूर्णिया कोर्ट स्टेशन का बढ़े रेल कनेक्टिविटी : सांसद

Updated at : 25 Mar 2026 6:26 PM (IST)
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देश के बड़े शहरों से पूर्णिया कोर्ट स्टेशन का बढ़े रेल कनेक्टिविटी : सांसद

सांसद बोले

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पप्पू यादव ने लोकसभा में उठाया ट्रेनों की भीड़ व कन्फर्म टिकट की कमी का मुद्दा

कहा-सुनिश्चित हो पूर्णिया व आसपास से महानगरों के लिए अधिक ट्रेनों का संचालन

पूर्णिया. पूर्णिया के लोकप्रिय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने लोकसभा के प्रश्नकाल में एक बार फिर अपने क्षेत्र की जनता की आवाज मजबूती से उठायी. उन्होंने लंबी दूरी की ट्रेनों में लगातार बढ़ती भीड़, कन्फर्म टिकट की कमी और पूर्णिया कोर्ट को देश के बड़े शहरों से रेलवे के माध्यम से जोड़ने का महत्वपूर्ण मुद्दा संसद में रखा. सांसद ने स्पष्ट कहा कि पूर्णिया, कोसी और सीमांचल जैसे क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग रोजगार, पढ़ाई और इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई, पंजाब, गुजरात, बेंगलुरु और अन्य महानगरों की ओर जाते हैं, लेकिन आज भी इस क्षेत्र के लोगों को पर्याप्त रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है. उन्होंने सरकार से मांग की कि पूर्णिया कोर्ट और आसपास के इलाकों से बड़े शहरों के लिए अधिक ट्रेनों का संचालन सुनिश्चित किया जाए. प्रश्नकाल के दौरान सांसद श्री यादव ने कहा कि सीमांचल और कोसी क्षेत्र से सबसे अधिक गरीब मजदूर, छात्र और आम परिवार पलायन करते हैं. ऐसे में रेलवे सिर्फ एक यात्रा का साधन नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन, रोजगार और भविष्य से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है. उन्होंने कहा कि जब युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रियाओं और उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है, तब ट्रेन में सीट न मिलना उनके लिए बड़ी समस्या बन जाती है. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पूर्णिया जैसे उभरते शहरी और शैक्षणिक केंद्र को अभी तक उस स्तर की रेल कनेक्टिविटी नहीं मिल पाई है, जिसकी क्षेत्र को लंबे समय से आवश्यकता है. सांसद ने इसे क्षेत्रीय असमानता और विकास के असंतुलन का मुद्दा भी बताया. सांसद श्री यादव ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से विगत पांच वर्षों के दौरान लंबी दूरी की ट्रेनों में लगातार बढ़ती प्रतीक्षा सूची और अत्यधिक भीड़भाड़ की स्थिति का विस्तृत ब्यौरा मांगा. उन्होंने पूछा कि बिहार सहित पूर्वी राज्यों को जोड़ने वाले मार्गों पर प्रतीक्षा सूची में शामिल यात्रियों की संख्या कितनी रही और इस दौरान अतिरिक्त क्षमता सृजित करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए?क्या यात्रियों की बढ़ती मांग और रेलवे क्षमता विस्तार के बीच मौजूद अंतर की पहचान की गई है? उन्होंने रिकॉर्ड राजस्व के बावजूद कन्फर्म टिकटों की कमी के कारणों पर भी सवाल उठाया और पूछा कि यात्री क्षमता और सेवा उपलब्धता का मूल्यांकन करने के लिए रेलवे के पास क्या निगरानी और समीक्षा तंत्र मौजूद है?

सांसद के सवालों पर रेल मंत्री ने दिया जवाब

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने जवाब में बताया कि भारतीय रेल में ट्रेनों की अधिभोगिता व्यस्त और कम व्यस्त अवधि के अनुसार अलग-अलग होती है. उन्होंने कहा कि लोकप्रिय मार्गों पर व्यस्त समय में अधिभोगिता 100 प्रतिशत तक पहुंच जाती है, जबकि कम लोकप्रिय रूटों पर यह अपेक्षाकृत कम रहती है. मंत्री ने सदन को बताया कि प्रतीक्षा सूची के पैटर्न की नियमित निगरानी की जाती है और अतिरिक्त मांग को पूरा करने के लिए नई ट्रेनों का संचालन, मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाना, रूट विस्तार और स्थायी आधार पर अतिरिक्त डिब्बे जोड़ने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही, प्रतीक्षा सूची की सीमा को भी उपलब्ध सीटों की वास्तविक क्षमता के अनुसार युक्तिसंगत बनाया गया है। हालांकि, सांसद पप्पू यादव का स्पष्ट संकेत था कि ज़मीनी हकीकत अब भी इस दावे से बहुत अलग है, क्योंकि आम यात्रियों को टिकट और यात्रा दोनों स्तर पर भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है.

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AKHILESH CHANDRA

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