बिहार में बिजली बिल वसूलने घोड़े से जाता है यह कर्मी, बोला- पेट्रोल की बढ़ी कीमत से बाइक रखना मुश्किल

बढ़ी कीमतों से इस कदर लोग परेशान हैं कि कुछ लोग तो पुराने विकल्पों की ओर देखने लगे हैं. कुछ ने तो विकल्प तलाश भी लिया है. ऐसे एक लोगों में से एक हैं शिवहर जिले के अभिजीत तिवारी. विद्युत विभाग में काम करनेवाले अभिजीत तिवारी का काम लोगों से बिजली बिल की वसूली करना है. वो घोड़े से वसूली करने जाते हैं.
पटना. पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों को परेशान कर रखा है. तेल पर पैसे खर्च करने से बचने के लिए नये-नये तरीके आजमाये रहे हैं. बढ़ी कीमतों से इस कदर लोग परेशान हैं कि कुछ लोग तो पुराने विकल्पों की ओर देखने लगे हैं. कुछ ने तो विकल्प तलाश भी लिया है. ऐसे एक लोगों में से एक हैं शिवहर जिले के अभिजीत तिवारी. विद्युत विभाग में काम करनेवाले अभिजीत तिवारी का काम लोगों से बिजली बिल की वसूली करना है.
पहले वो यह काम मोटरसाइकिल से करते थे, लेकिन पेट्रोल की बढ़ी कीमतों ने इनको पुराने विकल्पों को वापस जाने को मजबूर कर दिया है. अभिजीत अब घोड़े पर सवार होकर बिजली बिल वसूलने लोगों के घर जाते हैं. वो बताते हैं कि मोटरसाइकिल रखने से बेहतर है घोड़े पालना. पेट्रोल की कीमत इतनी बढ़ गयी है कि बाइक का सफर करना मुश्किल हो चुका है.
उन्होंने कहा कि घोड़े की अपेक्षा पेट्रोल खर्च दोगुना से अधिक है. इसलिए वह घोड़े की सवारी कर रहे हैं. शाहपुर निवासी अभिजीत ने कहा कि बाइक से चलना मुश्किल हो गया है. घर का बजट अब इसकी अनुमति नहीं दे रहा है. इसलिए घोड़े का सहारा लिया है. बिजली बिल वसूलने के लिए अब घोड़े पर ही जा रहे हैं. अभिजीत इलाके में चर्चा का विषय बन गये हैं. लोग इसे महंगाई का साइड इफेक्ट बता रहे हैं, जबकि, अभिजीत तिवारी का कहना है कि यह समझदारी है. आपको जो सत्ता विकल्प मिल रहा है, आप उसका ही उपयोग करें.
ऐसा सोचनेवाले देश में अभिजीत अकेले नहीं हैं. पिछले दिनों ऐसा ही एक मामला महाराष्ट्र में सामने आया था. महाराष्ट्र के औरंगाबाद में ईंधन के बढ़ते दाम से परेशान शेख युसुफ ने मोटरसाइकिल त्यागकर अपने घर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित अपने कार्यस्थल पर घोड़े से जाना शुरू किया था. दरअसल शेख युसुफ ने कोविड-19 के कारण लागू किये गये लॉकडाउन के दौरान कार्यालय आने-जाने में परेशानी महसूस की.
मीडिया से बात करते हुए युसुफ ने कहते हैं कि लॉकडाउन के बाद गैराज लंबे समय तक बंद रहे और मोटरसाइकिल का रख-रखाव एक समस्या बन गया था. इसके अलावा ईंधन के दाम दाम भी बढ़ रहे हैं, इसलिए मैंने अपने वाहन को अलग रख दिया और एक काठियावाड़ी घोड़ा खरीदा.” उन्होंने बताया कि वह अब (घर और कार्यस्थल के बीच) रोज 30 किलोमीटर की यात्रा घोड़े से करते हैं और घर का सामान लेने एवं पारिवारिक समारोहों में भी घोड़े पर ही बैठकर जाते हैं.
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