Women of the Week: निर्मला देवी ने विलुप्त हो रही सुजनी कला को दिया जीवन, कई महिलाओं की बदली तकदीर

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 16 Feb 2025 4:30 AM

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सुजनी कलाकार निर्मला देवी

Women of the Week: मुजफ्फरपुर के गायघाट के भुसरा गांव की रहने वाली निर्मला देवी नन मैट्रिक हैं. इसके बावजूद उन्होंने सुजनी कला से जोड़कर सैंकड़ों महिलाओं की तकदीर भी बदल दी. अब इस कला को जीआई टैग भी मिल चुका है.

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Women of the Week: बीते गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने वरिष्ठ सुजनी कलाकार निर्मला देवी को पद्मश्री अवार्ड देने का ऐलान किया था. 76 वर्षीय निर्मला देवी आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं. इन्होंने सुजनी कढ़ाई व सुजनी कलाकृतियों को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि देश-विदेश तक में लोकप्रिय बनाया. निर्मला देवी ने सुजनी कढ़ाई कला को राष्ट्रीय पटल पर एक नयी पहचान दी, जिसके लिए उन्हें यह अवार्ड देने की घोषण की गयी है. हालांकि उन्हें पहले भी कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय अवार्ड मिल चुका है. पहली सुजनी कढ़ाई कलाकार निर्मला देवी से पेश है बातचीत के प्रमुख अंश.

निर्मला देवी की सुजनी कढ़ाई

आप इस कला से कैसे जुड़ीं ? तब आपकी उम्र क्या रही होगी?

मैंने इस कला को अपनी मां जानकी देवी से सीखा था. वह भी शौकिया काम करती थीं. मैं छह साल की उम्र से सुजनी कढ़ाई कर रहीं हूं. 1988 में मेरे गांव में अदिति नामक एक गैर-लाभकारी संस्था से बीजी श्रीनिवासन आयी थीं. वे इस गांव में गरीबी को देखकर वहां पर महिलाओं से बात की. बीजी श्रीनिवासन को सुजनी कला के बारे में जानकारी मिली. पहले वह इससे जुड़ीं, उसके बाद तीन महिलाओं की टीम बनी. बीजी दीदी ने कपड़ा और धागा लाकर दिया, जिससे एक बेडसीट तीन लोगों ने मिलकर बनाया. उस वक्त तीनों को इस काम के लिए 75 रुपये मिले थे.

निर्मला देवी की सुजनी कढ़ाई

उस वक्त आपने अन्य महिलाओं को इससे कैसे जोड़ा?

मेरे गांव भुसरा में उस वक्त अदिति संस्था के साथ महिला विकास समिति कोऑपरेटिव की शुरुआत हुई थी. बीजी दीदी ने इस कला और रोजगार के लिए अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़ने को कहा था. जिसके लिए वह घर-घर महिलाओं से इस कला से जुड़ने बात कीं. कुछ इसके लिए राजी हुईं, तो कुछ के घरवालों ने सवाल उठाए. जो राजी हुई उन महिलाओं को प्रशिक्षण के लिए जोड़ा. महिला विकास कॉपरेटिव था, तो सिर्फ अपने पंचायत में काम कर सकते थे. जिसके बाद दिल्ली से कैलाश आये और उन्होंने इसे रजिस्टर करवाया. जिसके बाद अलग-अलग जिलों में इस कला का प्रशिक्षण देना शुरू किया. एक साल में 700 महिलाएं जुड़ गयी. धीरे-धीरे इसका नेटवर्क बढ़ा. अभी मेरे साथ 200 महिलाएं जुड़कर काम कर रही हैं.

सुजनी कढ़ाई करती निर्मला देवी

आप मार्केटिंग प्रशिक्षण के लिए दिल्ली भी गयी थीं. इसके बारे में बताएं?

1989-90 दो साल तक बीजी श्रीनिवासन दीदी ने हमारे उत्पादों को खरीदा और इसकी मार्केटिंग की. फिर वह वापस दिल्ली चली गयीं. जाने से पहले 1991 में उन्होंने मुझे खुद से मार्केटिंग करने को कहा, जिसके लिए उन्होंने मुझे दिल्ली बुलाया और ट्रेन का टिकट दिया. पहली बार अकेले दिल्ली गयी जहां वे मुझे सेंट्रल कॉटेज लेकर गयीं जहां, डिजाइनर सुशांत मिले. उनसे मुझे बेडशीट, कुशन कवर के माप के बारे में पता चला. मैं जो अपना बेडशीट लेकर गयी थी, उसकी कीमत मुझे 1300 रुपये और 750 रुपये मिले.

आप प्रशिक्षण देने के लिए विदेश भी गयी थीं?

1991 और 2003 में विदेश गयी थी. पहली बार लंदन और उसके बाद अमेरिका जाकर सुजनी कला का डेमो दिया था. अभी मेरी टीम बेडशीट, कुशन कवर, साड़ी, दुपट्टा बनाती है. और ये सभी उत्पाद जयपुर, अहमदाबाद, रायपुर, दिल्ली जाता है. इस काम में मुझे सबका सहयोग मिल रहा है.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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