खेतों के प्रकार से लेकर उपज तक का डाटा होगा तैयार

पटना : इस वित्तीय वर्ष में दो बड़े कार्य शुरू होने है़ं जनगणना 2021 के अलावा इस बार 11वीं कृषि गणना भी शुरू की जायेगी़ राज्य में राजस्व व भूमि सुधार विभाग के माध्यम से इसका डाटा तैयार होगा़ कृषि गणना में अंचलवार खेतों के प्रकार, सिंचाई प्रबंध से लेकर आदि की जानकारी एक फाॅर्म […]
पटना : इस वित्तीय वर्ष में दो बड़े कार्य शुरू होने है़ं जनगणना 2021 के अलावा इस बार 11वीं कृषि गणना भी शुरू की जायेगी़ राज्य में राजस्व व भूमि सुधार विभाग के माध्यम से इसका डाटा तैयार होगा़ कृषि गणना में अंचलवार खेतों के प्रकार, सिंचाई प्रबंध से लेकर आदि की जानकारी एक फाॅर्म के माध्यम से तैयार की जायेगी़ दूसरी जानकारी किस अंचल में किस प्रकार के फसल की पैदावार होती है और इसकी उत्पादकता क्या है, इसका डाटा भी बनाया जायेगा़ गौरतलब है कि कृषि गणना प्रत्येक पांच वर्षों में कराया जाने वाला केंद्र सरकार का कार्यक्रम हैं, जो कृषि, सहकारिता व किसान कल्यांण विभाग की ओर से सभी राज्यों में कराया जाता है़ फिलहाल राज्य में 11वीं कृषि गणना की जायेगी़
इससे पहले वित्तीय वर्ष 2015-16 में कृषि गणना पूरी की गयी है़ राजस्व कर्मचारी गांवों का तैयार करेंगे आंकड़ा कृषि गणना में सबसे महत्वपूर्ण कार्य राजस्व कर्मचारी के होते हैं. राजस्व कर्मचारी ही राजस्व गांवों में जाकर वहां के खेतों के क्षेत्रफल से लेकर खेतों के प्रकार की जानकारी लेते है़ इसके अलावा गांव के फसल के प्रकार का भी डाटा तैयार किया जाता है़ कर्मचारी अपना डाटा अंचल में जमा करते हैं. वहां से जिले में डीएम के अधीन जिला सांख्यिकी पदाधिकारी जिलों के आंकड़ों को तैयार कर विभाग में भेजते हैं.
विभाग में कृषि गणना संभाग में पूरे राज्य का आंकड़ा तैयार कर उसे केंद्र को भेज दिया जाता है़ इसमें एक से दो वर्ष का समय लग जाता है़ क्यों जरूरी है कृषि गणना कृषि गणना राज्य या देश के विकास की बुनियाद होती है़ उस गणना के आधार पर ही राज्य में कृषि के उपयोग में ली जाने वाली जमीन, फसल के प्रकार व उसके उत्पादकता की सही जानकारी मिलती है़ कृषि गणना से मिले आंकड़ों के आधार पर ही राज्य व केंद्र सरकार अपनी कृषि संबंधित योजनाओं को तैयार करते हैं.
कृषि गणना के लिए काम कर चुके राजस्व व भूमि सुधार विभाग के अधिकारी सुनील नाथ मिश्रा बताते हैं कि कृषि गणना का डाटा किसी भी राज्य के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है़ गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 तक इससे पहले वाली कृषि गणना का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है़ इसके लिए आवंटित 93 लाख, 93,000 की राशि के खिलाफ अब तक मात्र 16 लाख, 73,460 की राशि ही खर्च हो पायी है़
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लेखक के बारे में
By Pritish Sahay
12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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