Patna : ट्रैफिक पुलिस को मिले 500 बॉडी वार्न कैमरे, वर्दी पर लगा कर करेंगे ड्यूटी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 03 Aug 2024 1:00 AM
पटना ट्रैफिक पुलिस को 500 बॉडी वार्न कैमरे दिये हैं. अब इन कैमरों से ही ट्रैफिक पुलिस और वाहन चालकों पर नजर रखी जायेगी.
संवाददाता, पटना : बिहार पुलिस मुख्यालय ने पटना ट्रैफिक पुलिस को 500 बॉडी वार्न कैमरे दिये हैं. अब इन कैमरों से ही ट्रैफिक पुलिस और वाहन चालकों पर नजर रखी जायेगी. ड्यूटी के दौरान उन्हें वर्दी पर यह कैमरा लगाना होगा. जवानों को इसका प्रशिक्षण दिया जा चुका है. वाहनों की जांच, चालान या अन्य कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों की हर हरकत कैमरे में कैद होगी. अधिकारियों का मानना है कि इससे ट्रैफिक पुलिस के काम में पारदर्शिता आयेगी, वहीं वाहन चालक भी जवानों के साथ अभद्रता करने से बाज आयेंगे. बॉडी वार्न कैमरे में सॉफ्टवेयर होता है, जिसमें रिकॉर्डिंग रहती है. इसके डाटा के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है. किसी कार्रवाई के दौरान फुटेज को डिलीट करना या छिपाना संभव नहीं होता है.
ट्रैफिक पुलिस के साथ अभद्रता करने वाले भी पकड़े जायेंगे :
ट्रैफिक पुलिस के ड्यूटी से गायब रहने और वाहन चालकों के साथ मारपीट व बदसलूकी की शिकायतें सामने आती रहती हैं. ट्रैफिक पुलिस के साथ अभद्रता के मामले भी सामने आते रहते हैं. कार्रवाई के दौरान चालक व पुलिस के बीच होने वाली बातचीत कैमरे में ऑडियो-वीडियो के साथ रिकॉर्ड होगी. दोनों पक्षों में विवाद होने पर फुटेज से पता चल जायेगा कि गलती किसकी है और पुलिस आगे की कार्रवाई में इसे साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल कर सकेगी.ड्यूटी के दौरान गायब रहने की खोलेगा पोल :
शहर में अक्सर जाम के दौरान ट्रैफिक पुलिस के जवान गायब रहते हैं. कभी-कभी एक ओर जाम लगा होता है और दूसरी ओर पुलिस चालान काटने में लगी रहती है. बॉडी वार्न कैमरा होने पर जवान ड्यूटी से इधर-उधर नहीं जा सकेंगे. जवानों के इधर-उधर जाने पर कैमरा आसपास के लोकेशन को बताकर उसकी पोल खोल देगा. ट्रैफिक एसपी अशोक कुमार चौधरी ने बताया कि कुछ बांटे जा चुके हैं और शनिवार को बाकी वितरित कर दिये जायेंगे.क्या है बॉडी वार्न कैमरा :
यह छोटा डिवाइस होता है. इसे वर्दी पर फिट किया जाता है. कैमरे में लैंस लगा होता है, जो चारों दिशाओं में घूम सकता है. क्षमता के अनुसार, इसमें डाटा 15 दिन तक स्टोर रह सकता है. इस कैमरे को जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) से कंट्रोल रूम से जोड़ा जा सकता है. ऐसे में कंट्राेल रूम से ही जवान की हर गतिविधि और कार्य स्थल पर उसकी मौजूदगी को अधिकारी ऑनलाइन मॉनिटर कर सकेंगे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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