Tej Pratap Yadav: तेज प्रताप यादव की नई सियासी पिच, शाहपुर में इंजीनियरिंग कॉलेज और क्रिकेट स्टेडियम का वादा

Tej Pratap Yadav:
Tej Pratap Yadav: पार्टी से निष्कासन, बगावती तेवर और अब युवाओं के लिए बड़े-बड़े वादे—तेज प्रताप यादव अपने नए राजनीतिक अवतार में नज़र आ रहे हैं. शाहपुर में उन्होंने न सिर्फ चुनावी मंसूबे जताए, बल्कि विकास का ब्लूप्रिंट भी सामने रखा.
Tej Pratap Yadav: राजद अध्यक्ष लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव अब बिहार की राजनीति में एक अलग राह पर चलते नज़र आ रहे हैं. ‘टीम तेज प्रताप’ के बैनर तले वे पूरे राज्य में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं. शनिवार को शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के बिहिया में उन्होंने जन संवाद यात्रा के दौरान न सिर्फ युवाओं से वादे किए.
बिहिया (शाहपुर)।राजद से निष्कासित होने के बाद तेज प्रताप यादव पूरी तरह से अपने सियासी एजेंडे के साथ मैदान में उतर चुके हैं. शनिवार को वे शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के बिहिया पहुंचे, जहां उन्होंने ‘जन संवाद यात्रा’ के तहत जनसभा को संबोधित किया. कार्यक्रम में टीम तेज प्रताप के कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया—मुकुट पहनाकर, माला पहना कर और “तेज प्रताप जिंदाबाद” के नारों के बीच.
अपने संबोधन में तेज प्रताप ने घोषणा की कि अगर शाहपुर से उनकी टीम का प्रत्याशी चुनाव जीतता है, तो शाहपुर में एक इंजीनियरिंग कॉलेज और क्रिकेट स्टेडियम की स्थापना की जाएगी. उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य और क्षेत्र के विकास से जोड़ा. तेज प्रताप ने कहा, “हमारी सरकार बनेगी तो पूरे राज्य में बिजली फ्री करेंगे और हर गरीब महिला को रोजगार देंगे.”
तेवर बदले, टोपी का रंग भी
राजनीति के इस नए मोड़ पर तेज प्रताप ने खुद को आरजेडी की पारंपरिक हरी टोपी से भी अलग कर लिया है. अब ‘टीम तेज प्रताप’ पीले रंग की टोपी पहन रही है—एक प्रतीकात्मक बदलाव जो उनके स्वतंत्र राजनीतिक रुख की ओर इशारा करता है. तेज प्रताप ने ऐलान किया कि “हमारी टीम पूरे बिहार में उम्मीदवार उतारेगी” और महुआ से चुनाव लड़ने की भी बात दोहराई
पिता के विरोधियों पर निशाना, बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात
कार्यक्रम के दौरान तेज प्रताप यादव ने राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी पर भी हमला बोला और आरोप लगाया कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव को जेल भिजवाने में उनका हाथ था. साथ ही उन्होंने कहा कि शाहपुर के मौजूदा राजद विधायक ने अपने क्षेत्र में कोई ठोस काम नहीं किया.
कार्यक्रम के बाद तेज प्रताप ने जवानियां गांव में बाढ़ पीड़ितों से भी मुलाकात की. उन्होंने आरोप लगाया कि गांव पिछले कई सप्ताह से बाढ़ से तबाह है, लेकिन एनडीए सरकार ने कोई मदद नहीं पहुंचाई. उन्होंने कहा कि “हम सत्ता में रहें या न रहें, जनता के बीच रहना हमारी जिम्मेदारी है.”
तेज प्रताप यादव इस बार न तो सिर्फ भावुक बयानों तक सीमित हैं, न ही पार्टी की छांव में. वे अपने राजनीतिक भविष्य की नई पिच पर उतर चुके हैं—जहां वादों में विकास है, तेवर में बगावत और रणनीति में युवाओं की पकड़. अब देखना यह है कि बिहार की जनता इस नई सियासी पारी को कैसे लेती है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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