Riga Sugar Mill : बिहार में खुला एक और बंद कारखाना, पहले सत्र में गन्ना किसानों को मिलेंगे 80 करोड़

Author Ashish jha
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Sugar mil

Riga Sugar Mill : वर्तमान में लगभग 400 मजदूर रीगा चीनी मिल में मरम्मत एवं अन्य आवश्यक कार्यकर रहे हैं. चालू गन्ना पेराई सत्र 2024-25 के दौरान इस चीनी मिल में 15 से 20 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई होने की उम्मीद है. इससे लगभग 80 करोड़ रुपये गन्ना कृषकों को मिलेंगे.

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Riga Sugar Mill : पटना. सीतामढ़ी जिले में चार वर्षों से बंद रीगा चीनी मिल 20 दिसंबर से चालू हो रहा है. वर्तमान में लगभग 400 मजदूर रीगा चीनी मिल में मरम्मत एवं अन्य आवश्यक कार्यकर रहे हैं. चालू गन्ना पेराई सत्र 2024-25 के दौरान इस चीनी मिल में 15 से 20 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई होने की उम्मीद है. इससे लगभग 80 करोड़ रुपये गन्ना कृषकों को मिलेंगे. इससे सीतामढ़ी, शिवहर एवं मुजफ्फरपुर जिले के किसानों को लाभ के साथ यहां आर्थिक विकास भी होगा. इस वर्ष तीन जिलों के लगभग 5 हजार से 7 हजार गन्ना कृषक इससे लाभन्वित होंगे.

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किसान परिवार से आते हैं मिल के नये मालिक

मेसर्स रीगा सुगर कम्पनी लि., रीगा, सीतामढ़ी पेराई सत्र 2020-21 से बंद पड़ी हुई थी. इसका मामला एनसीएलटी कोलकाता बेंच में चल रहा था. एनसीएलटी कोलकाता बेंच द्वारा मेसर्स निरानी सुगर्स लिमिटेड को सफल निवेशक घोषित किया गया है एवं उनके द्वारा सम्पूर्ण निविदा की राशि जमा कर दी गयी है. मिल के नये मालिक मेसर्स निरानी शुगर, बैंगलोर के चेयरमैन मरूगेश आर. निरानी हैं. चेयरमैन निरानी ने कहा कि वे खुद किसान परिवार से हैं. वे अभी 12 चीनी मिलें संचालित कर रहे हैं, जिनमें अब रीगा चीनी मिल भी जुड़ गया है. उनके मिलों में करीब 20 हजार कामगार हैं. उन्होंने कहा कि करीब 25 वर्षों से इस कारोबार में हैं. मिल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एस. निरानी ने कहा कि फिलहाल इस मिल की क्षमता 11 मेगावाट बिजली उत्पादन की है. इसे बढ़ाकर 20 मेगावाट करेंगे. सरकार को भी बिजली की आपूर्ति करेंगे.

1932 में स्थापित किया गया था चीनी मिल

बांगुर ब्रदर्स ने बिहार के सीतामढ़ी भ्रमण के दौरान रीगा में लखनदेई नदी के किनारे चीनी मिल के लिए स्थल का चयन किया था. फिर काफी विचार कर वर्ष 1932 में शुगर मिल स्थापित किया था. वर्ष 1934 के भूकंप में चीनी मिल ध्वस्त हो गया था. इसे काफी क्षति पहुंची थी. मरम्मत कराकर 1934 में ही चीनी मिल को चालू कराया गया था. वर्ष 1950 में एमएम बांगुर ब्रदर्स ने इस चीनी मिल को ओमप्रकाश धानुका के पिता पुरुषोत्तम लाल धानुका के हाथ सौंप दिया. तब से धनुका परिवार के ही अधीन यह मिल है. पिछले 4 वर्षों से मिल के बंद रहने से 40 हजार गन्ना किसानों के साथ हजारों कामगार, छोटे-बड़े दुकानदार, व्यापारी, वाहन कारोबारी, उनसे जुड़े परिवार के कम से कम 5 लाख की आबादी बुरी तरह प्रभावित हुई है. इन सब के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है. मिल चालू होने से लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक होगी और पुराने दिन फिर लौट आएंगे.

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