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‘रंगभूमि’ : सामाजिक असमानता और वर्ग विभाजन का प्रामाणिक दस्तावेज : डॉ नीरज

Updated at : 17 Jun 2025 12:54 AM (IST)
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‘रंगभूमि’ : सामाजिक असमानता और वर्ग विभाजन का प्रामाणिक दस्तावेज : डॉ नीरज

जनवादी लेखक संघ, बिहार और जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा, बिहार के संयुक्त सहयोग में प्रेमचंद के कालजयी उपन्यास ‘रंगभूमि’ के सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया.

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प्रेमचंद के उपन्यास ‘रंगभूमि’

के सौ साल पूरे होने पर हुई विचार गोष्ठी

– फोटो हैसंवाददाता,पटनाजनवादी लेखक संघ, बिहार और जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा, बिहार के संयुक्त सहयोग में प्रेमचंद के कालजयी उपन्यास ‘रंगभूमि’ के सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. जमाल रोड स्थित संघ कार्यालय में रविवार को आयोजित इस गोष्ठी का विमर्श विषय आज के संदर्भ में रंगभूमि था. डॉ नीरज सिंह ने अध्यक्षता की और कुमार विनीताभ ने संचालन किया. डॉ नीरज सिंह ने ‘रंगभूमि’ को सामाजिक असमानता और वर्ग विभाजन का प्रामाणिक साहित्यिक दस्तावेज बताया. उन्होंने उपन्यास के मुख्य पात्र सूरदास को जनहित और स्वाभिमान के लिए प्राण न्योछावर करने वाला अद्भुत व्यक्तित्व बताया. उन्होंने रचनाकारों से आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में संघर्षरत सूरदासों को तलाशने और उन्हें अपनी कृतियों में प्रमुखता देने का आह्वान किया. वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के प्रो नीलांबुज सरोज ने कहा कि ‘रंगभूमि’ में प्रेमचंद ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद की ओर से भूमि अधिग्रहण की नीतियों और ग्रामीण जनता के प्रति अपनाये गये बर्बर रुख को दर्शाया है. उन्होंने रंगभूमि के मुद्दों को आज भी प्रासंगिक बताया. जनवादी लेखक संघ, पटना के संरक्षक मंजुल कुमार दास ने ‘रंगभूमि’ में नौकरशाही और पूंजीवाद के विरुद्ध जनसंघर्ष, सत्य-अहिंसा के प्रति आग्रह, ग्रामीण शोषण और स्त्री दुर्दशा के मार्मिक चित्रण को रेखांकित किया. प्राच्य प्रभा के संपादक विजय कुमार सिंह ने इसे परतंत्र भारत की सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और आर्थिक समस्याओं के बीच राष्ट्रीयता की भावना से परिपूर्ण उपन्यास बताते हुए प्रेमचंद के जनवादी विचारों की परिपक्वता का प्रमाण कहा. नाट्य संस्था ‘प्रेरणा’ के अध्यक्ष हसन इमाम ने प्रेमचंद को जनपक्षीय चेतना से संपन्न लेखक और ‘रंगभूमि’ को इसका सर्वोत्तम दृष्टांत बताया. गोष्ठी में अरुण कुमार मिश्र, अखिलेश कुमार, प्रो. रवि प्रकाश मिश्र, लता प्रासर, राजकुमार शाही समेत कई वक्ताओं ने विचार रखे. वहीं सीतामढ़ी के कमरुद्दीन नदाफ और मुन्ना प्रसाद ने जनवादी गीतों से श्रोताओं को मुग्ध किया. जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा के महासचिव मुन्ना प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापित किया. कार्यक्रम के अंत में जनवादी लेखक संघ समस्तीपुर इकाई के सचिव डॉ. रामदेव महतो के असामयिक निधन पर मौन श्रद्धांजलि अर्पित की गयी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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