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Patna News: सार्वजनिक शौचालयों की हालत खस्ता, क्या खराब रखरखाव वाटर प्लस सर्टिफिकेशन को खतरे में डाल देगा?

Updated at : 08 Feb 2026 8:57 AM (IST)
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Patna News: सार्वजनिक शौचालयों की हालत खस्ता, क्या खराब रखरखाव वाटर प्लस सर्टिफिकेशन को खतरे में डाल देगा?

Patna News: पटना के सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है, जिससे ओडीएफ और वाटर प्लस सर्टिफिकेशन खतरे में पड़ सकते हैं. गंदगी, टूटी दरवाजे और लंबे समय से बंद शौचालय शहर की स्वच्छता को चुनौती दे रहे हैं. ओडीएफ सर्टिफिकेशन बनाए रखने के लिए नगर निगम को अब बेहतर रखरखाव और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी.

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Patna News: पटना नगर निगम को स्वच्छता सर्वेक्षण में वाटर प्लस का सर्टिफिकेशन प्राप्त है. यह ओडीएफ प्लस प्लस से भी ऊपर की श्रेणी में आता है. निगम को स्वच्छता सर्वेक्षण (swachh survekshan) में थ्री स्टार रेटिंग प्राप्त है. इसके लिए ओडीएफ (ODF) में क्वालिफाइ करने के लिए अनिवार्य होता है. इस बार नगर निगम ने फाइव स्टार रेटिंग के लिए आवेदन किया है. लेकिन, शौचालयों के रखरखाव की स्थिति को देखते हुए ओडीएफ सर्टिफिकेशन को बचाना भी चुनौती है. मालूम हो कि, वाटर प्लस की श्रेणी में आने वाले शहर को शौचालय में प्रयोग होने वाले पानी का ट्रीटमेंट कर रीयूज करना होता है. इसके अलावे शहर में खुले में शौच मुक्त बनना होता है.

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लेकिन, सार्वजनिक जगहों पर शौचालयों (public toilets) में गंदगी व खराब स्थिति होने के चलते लोग दीवार के किनारे खुले में टॉयलेट कर रहे हैं. गुरुवार को प्रभात खबर संवाददाता ने शहर के प्रमुख जगहों पर बने पब्लिक टॉयलेट की स्थिति को लेकर पड़तालकी. स्थिति ऐसी थी कि कहीं शौचालय में गंदगी का अंबार था. कहीं दरवाजा टूटा और पानी की उपब्ध नहीं था तो कहीं कई माह से तैयार पड़े पब्लिक टॉयलेट को अब तक बंद ही रखा गया है. पेश है रिपोर्ट.

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1. अंटा घाट: अंटा घाट के पास बने इ-टॉयलेट और स्थायी शौचालय का उपयोग स्वच्छता के बजाय बकरी बांधने और सामान रखने के लिए किया जा रहा है.शौचलय के ऊपर भी सामान रख दिया गया है. इसके चारों ओर बांस की चाली भी रखकर अतिक्रमण कर दिया गया है. यहां चार शौचालय मिले.

2. गांधी मैदान: गांधी मैदान स्थित कारगिल चौक के पास बने शौचालय में गंदगी का अंबार है. शौचालय से पानी का भी रिसाव हो रहा है, जिससे आसपास भी गंदे हो रहे हैं. इसके अलावे मैदान के अंदर का शौचालय में गंदगी रहती है. गांधी मैदान के पास इंस्टॉल हुए इ-टॉयलेट को भी जर्जर बना दिया गया है.

3. मीठापुर: मीठापुर बायपास के पास हाइटेक टॉयलेट के गेट के पास झोपड़ी बना अतिक्रमण किया गया है. यह बंद भी पड़ाहै. इसी के आगे एक स्थायी शौचालय भी बना है, लेकिन इसमें ताला लटक रहा है. नूतन राजधानी अंचल कार्यालय के सामने भी हाइटेक टॉयलेट का बोर्ड क्षतिग्रस्त हो रहा है.

4. गर्दनीबाग: गर्दनीबाग रोड नंबर 15 में बने 18 स्थायी शौचालय पूरी तरह बंद पड़ेहैं. लंबे समय से इसका उपयोग नहीं हुआ है. वहीं जीपीओ गोलंबर और तारामंडल के पास बने चार शौचालयों के आसपास गंदगी फैली हुई है. आर ब्लॉक के दोनों तरफ के शौचालय में गंदगी देखने को मिली.

5. हाइकोर्ट के पास: बेली रोड के किनारे विद्युत भवन व हाइकोर्ट के बीच में इंस्टॉल दो इ-टॉयलेच क्षतिग्रस्त मिली. यही स्थिति एएन कॉलेज व बोरिंग रोड की है. बीएन कॉलेज के पीछे स्थापित इ-टॉयलेट्स की हालत बेहद जर्जर पाई गई. कई जगह दरवाजे टूटे हुए हैं, अंदर गंदगी जमा है और पानी की व्यवस्था नहीं है.

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हाइटेक टॉयलेट्स खुलने से खुले में शौच हुआ कम

शहर में 21 जगहों पर हाइटेक टॉयलेट्स बनाए गये हैं. लगभग को बंद रखा जा रहा था, लेकिन नगर आयुक्त के निर्देश पर हाल ही में इन्हें फिर से खोला गया है. इसके ऊपर सोलर पैनल भी रखा गया है. इससे बिजली की खपत भी नहीं होती है. यह सर्वेक्षण में बेहतर साबित होगा. हालांकि, दीघा गोलंबर से गांधी मैदान अंडरपास तक जेपी गंगा पथ पर करीब 4.59 किलोमीटर लंबा आधुनिक वॉकवे विकसित किया जा रहा है. लेकिन, इस एरिया में सिर्फ एक शौचालय मौजूद है.

सीएसआर मद से इंस्टॉल पिंक टॉयलेट भी बंद

इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन ने शहर के प्रमुख चौराहों पर पिंक टॉयलेट्स लगाए हैं. लेकिन, अधिकांश पिंक टॉयलेट्स भी बंद पड़ेहैं. जबकि, इन पिंक शौचालयों में महिलाओं के लिए पानी, नियमित सफाई, सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता, उपयोग किए गए नैपकिन का सुरक्षित निस्तारण और महिला सहायिका की सुविधा जैसी सुविधाएं प्रदान की गई हैं, लेकिन इन शौचालयों का संचालन ठीक से नहीं हो पा रहा है.

रखरखाव के अभाव में 4.49 करोड़ रुपये का इ-टॉयलेट

पटना स्मार्ट सिटी विकास प्रोजेक्ट के तहत इ-टॉयलेट पर लगभग 4.49 करोड़ रुपये का खर्च किया गया. शहर में कुल 32 ई-टॉयलेट लगाए गए थे. लेकिन, ये सभी इ-टॉयलेट रखरखाव की कमी के कारण अब पूरी तरह निष्क्रिय हैं, जिनमें गंदगी भरी हुई है या पोस्टर चिपकाए जा रहे हैं. साल 2023 से ही इसकी स्थिति खराब है. इंस्टॉल करने के बाद एक बार भी इसपर ध्यान नहीं दिया गया.करोड़ रुपये के इ-टॉयलेट का उपयोग एक से दा माह भी लोग नहीं कर पाये.

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फील्ड असेस्मेंट के लिए 53 टॉयलेट्स को किया गया है चिन्हित

स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान फील्ड असेस्मेंट टीम के लिए 53 टॉयलेट्स की स्थिति पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. वहीं, इस बार नगर निगम ने खुले में शौच करने वालों को नगर शत्रु का दर्जा देते हुए जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है. बता दें कि, पाटलिपुत्र अंचल में 11, नूतन राजधानी अंचल में 19, बांकीपुर अंचल में 10, कंकड़बाग अंचल में सात और अजीमाबाद व पटना सिटी अंचल में दो-दो शौचालय को चिन्हित किया गया है. टीम इन शौचलय की स्थिति का जायजा लेने के बाद रिपोर्ट तैयार करेगी.

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मेयर सीता साहू से सीधी बात

1. वाटर प्लस मिलने के बावजूद सार्वजनिक शौचालय की स्थिति खराब है, इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय की गई है?
– स्वच्छ रखने की हम सब की जिम्मेदारी है. एजेंसियों को भुगतान पेंडिंग होने से रखरखाव नहीं हो पा रही थी. बोर्ड बैठक में बकाया भुगतान के लिए प्रस्ताव रखा जायेगा.

2. करोड़ों रुपये की लागत से बने इ-टॉयलेट का भी रखरखाव नहीं हो रही है?
– यह स्मार्टसिटी का प्रोजेक्ट है. इसे इंस्टॉल करने से पहले बेहतर प्लानिंग नहीं होने का नतीजा है. इसका भी सर्वे कराकर ठीक किया जायेगा.

3. वाटर प्लस के अनुरुप व खुले में टॉयलेट रोकने के लिए क्या करेंगी?
– खुले में शौच करने पर जुर्माना किया जा रहा है. लोगों को जागरूक किया जा रहा है. अब खुले में शौच काफी कम हुआ है. रखरखाव के लिए जवाबदेही तय की जायेगी.

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हिमांशु देव

लेखक के बारे में

By हिमांशु देव

सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.

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