650 करोड़ का ESIC अस्पताल, फिर भी हार्ट और किडनी मरीजों को नहीं मिल रहा इलाज
Published by : Nikhil Anurag Updated At : 03 Jun 2026 8:12 PM
ESIC अस्पताल बिहटा
Patna News: बिहटा स्थित 650 करोड़ रुपये की लागत से बने ESIC अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस, कैथ लैब, एमआरआई, सीटी स्कैन और कीमोथेरेपी जैसी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं. विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीकी कर्मियों की कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए पटना और निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है.
Patna News: (मोनु कुमार मिश्रा की रिपोर्ट) पटना से सटे बिहटा में 650 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित ESIC अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज को क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का केंद्र माना गया था. उम्मीद थी कि यहां गंभीर बीमारियों का इलाज बड़े शहरों की तरह उपलब्ध होगा, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है. अस्पताल में कई महत्वपूर्ण जीवनरक्षक सुविधाएं अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं, जिसके कारण मरीजों को लगातार रेफर किया जा रहा है. सबसे चिंताजनक स्थिति हृदय और किडनी रोगियों की है. अस्पताल परिसर में डायलिसिस मशीनें मौजूद हैं, लेकिन प्रशिक्षित टेक्नीशियन और नेफ्रोलॉजिस्ट के अभाव में उनका संचालन नहीं हो रहा है. किडनी के मरीजों को सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें पटना या निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है.
हार्ट मरीजों के लिए भी नहीं हैं जरूरी सुविधाएं
सूत्रों के अनुसार अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती होने के बावजूद कैथ लैब जैसी महत्वपूर्ण सुविधा उपलब्ध नहीं है. इसके अलावा टू-डी इको, होल्टर मॉनिटरिंग और ट्रेडमिल टेस्ट (टीएमटी) जैसी आवश्यक जांच सेवाएं भी शुरू नहीं हो सकी हैं. परिणामस्वरूप हार्ट अटैक, हृदय संबंधी जटिल बीमारियों और अन्य गंभीर मामलों में आने वाले मरीजों को तत्काल दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अस्पताल में आवश्यक उपकरणों और सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है.
एमआरआई और सीटी स्कैन तक की सुविधा नहीं
अस्पताल में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन की सुविधा नहीं होने से न्यूरो, ट्रॉमा और गंभीर चोट के मामलों में भी मरीजों को बाहर भेजना पड़ता है।”. जांच के लिए निजी केंद्रों पर निर्भरता बढ़ने से मरीजों का आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है.कई बार जांच में देरी होने से उपचार प्रभावित होने की शिकायतें भी सामने आती हैं.
कैंसर मरीज भी परेशान
कैंसर रोगियों के लिए कीमोथेरेपी सेवा शुरू नहीं हो सकी है.ऐसे मरीजों को इलाज के लिए पटना या अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों में जाना पड़ता है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च और परेशानी का कारण बन रहा है.
सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल, लेकिन विशेषज्ञों की कमी
जानकारी के अनुसार अस्पताल में नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और न्यूरो सर्जरी जैसी कई सुपरस्पेशियलिटी सेवाएं पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो सकी हैं. कई विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और तकनीकी कर्मियों की कमी बताई जा रही है. इससे अस्पताल की उपचार क्षमता प्रभावित हो रही है.
करोड़ों का निवेश, मरीजों को नहीं मिल रहा पूरा लाभ
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर अत्याधुनिक भवन और चिकित्सा ढांचा तैयार किया, लेकिन यदि मशीनों का संचालन और विशेषज्ञों की नियुक्ति समय पर नहीं होती है तो आम लोगों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा.उनका आरोप है कि कागजों पर उपलब्ध सुविधाओं और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है.
क्षेत्र के लाखों लोगों की उम्मीदें अस्पताल से जुड़ी
बिहटा, बिक्रम, पालीगंज, नौबतपुर, दानापुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों सहित बिहार के कोने कोने के लोग बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर ईएसआईसी अस्पताल पहुंचते हैं. लेकिन आवश्यक सुविधाओं के अभाव में उन्हें रेफर कर दिया जाता है.इससे मरीजों के साथ-साथ उनके परिजनों को भी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है.
क्या कहते हैं डीन
ईएसआईसी अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज के डीन प्रो. (डॉ.) बिनय कुमार विश्वास ने अस्पताल में कुछ महत्वपूर्ण सेवाओं के पूरी तरह संचालित नहीं होने की बात स्वीकार की है. उन्होंने बताया कि तकनीकी कर्मियों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने की प्रक्रिया चल रही है.डायलिसिस, कीमोथेरेपी समेत अन्य सुविधाओं को जल्द शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अस्पताल को चरणबद्ध तरीके से पूर्ण क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है और भविष्य में मरीजों को अधिकतम सुविधाएं यहीं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है.
प्रमुख कमियां एक नजर में
1.डायलिसिस मशीनें उपलब्ध, लेकिन सेवा शुरू नहीं.
2.नेफ्रोलॉजिस्ट और टेक्नीशियन की कमी.
3.कैथ लैब की सुविधा नहीं.
4.टू-डी इको, होल्टर मॉनिटरिंग और टीएमटी का अभाव.
5.एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन उपलब्ध नहीं.
6.कीमोथेरेपी सेवा शुरू नहीं.
7.कई सुपरस्पेशियलिटी विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी.
8.गंभीर मरीजों को लगातार पटना रेफर किया जा रहा.
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