नीट छात्रा मामले पर पटना हाई कोर्ट ने कहा- यह कोई जनहित याचिका नहीं, जिसमें जांच की मॉनिटरिंग जरूरी हो

Updated at : 02 Feb 2026 4:21 PM (IST)
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patna high court on neet chhatra case

पटना हाई कोर्ट की सांकेतिक तस्वीर

Patna NEET Student Death Case: नीट छात्रा की मौत मामले में पटना हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि सरकार जांच सीबीआई को सौंप चुकी है, इसलिए फिलहाल अदालत की निगरानी जरूरी नहीं है. हालांकि सीबीआई जांच से असंतुष्ट होने पर याचिकाकर्ता को फिर कोर्ट आने की छूट दी गई है.

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Patna NEET Student Death Case: नीट छात्रा की मौत के मामले में पटना हाई कोर्ट ने दाखिल याचिका का निपटारा कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार इस मामले की जांच पहले ही सीबीआई को सौंप चुकी है. ऐसे में फिलहाल हाई कोर्ट के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है. यह आदेश न्यायाधीश अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने दिया. कोर्ट ने नीट छात्रा के पिता नवीन कुमार की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया.

सुनवाई के दौरान छात्रा के पिता ने कोर्ट से मांग की थी कि सीबीआई की जांच की मॉनिटरिंग सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या हाई कोर्ट के किसी वर्तमान जज की निगरानी में कराई जाए. हालांकि कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया.

हाई कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

हाई कोर्ट ने साफ कहा कि जब सरकार ने खुद इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया है, तो सीबीआई को स्वतंत्र रूप से जांच करने दी जानी चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कोई जनहित याचिका नहीं है, जिसमें जांच की मॉनिटरिंग जरूरी हो.

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना जांच रिपोर्ट आए ही मॉनिटरिंग का आदेश देना उचित नहीं है. पहले सीबीआई को अपना काम करने दिया जाए. अगर जांच पूरी होने के बाद याचिकाकर्ता को कोई कमी या आपत्ति लगती है, तो वह दोबारा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं.

परिवार को धमकियां दी जा रही हैं- याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उन्हें और उनके परिवार को धमकियां दी जा रही हैं. आरोप लगाया गया कि राज्य के डीजीपी और पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक की ओर से उन पर दबाव बनाया जा रहा है. उनसे यह स्वीकार करने को कहा जा रहा है कि उनकी बेटी ने आत्महत्या की है.

कोर्ट ने कहा अब जांच सीबीआई के पास है

याचिका में यह भी कहा गया कि परिवार और रिश्तेदारों को अलग-अलग तरीकों से डराया और धमकाया जा रहा है. उद्देश्य इस मामले को दबाना बताया गया. परिवार का कहना है कि वे सच्चाई सामने लाना चाहते हैं. इन आरोपों पर कोर्ट ने कहा कि अब जांच सीबीआई के पास है. इसलिए याचिकाकर्ता को सीबीआई जांच में पूरा सहयोग करना चाहिए. कोर्ट ने भरोसा जताया कि निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आएगी.

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर सीबीआई जांच के दौरान या जांच पूरी होने के बाद याचिकाकर्ता को किसी तरह की शिकायत होती है, तो वे फिर से अदालत आ सकते हैं. इस आदेश के साथ ही हाई कोर्ट ने याचिका का निष्पादन कर दिया. अब पूरे मामले की आगे की जांच सीबीआई करेगी.

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लेखक के बारे में

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अभिनंदन पांडेय डिजिटल माध्यम में पिछले 2 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर तक का मुकाम तय किए हैं. अभी डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास करते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखते हैं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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