बिहार के 60 प्रतिशत सरकारी- निजी अस्पतालों में अग्निशमन से बचाव के लिए प्लान नहीं

Updated at : 25 Apr 2024 1:38 AM (IST)
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बिहार के 60 प्रतिशत सरकारी- निजी अस्पतालों में अग्निशमन से बचाव के लिए प्लान नहीं

बिहार के 60 प्रतिशत सरकारी- निजी अस्पतालों में अग्निशमन से बचाव के लिए प्लान नहीं पटना. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अस्पताल अग्नि सुरक्षा कार्यक्रम के तहत 16 बिंदुओं पर अग्नि सुरक्षा के इंतजाम का निरीक्षण किया. प्राधिकरण के मुताबिक मार्च 2024 में राज्य के कुल 358 अस्पतालों का निरीक्षण किया गया. जिसमें 24 सरकारी व 313 निजी अस्पताल शामिल हैं.

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बिहार के 60 प्रतिशत सरकारी- निजी अस्पतालों में अग्निशमन से बचाव के लिए प्लान नहीं

पटना. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अस्पताल अग्नि सुरक्षा कार्यक्रम के तहत 16 बिंदुओं पर अग्नि सुरक्षा के इंतजाम का निरीक्षण किया. प्राधिकरण के मुताबिक मार्च 2024 में राज्य के कुल 358 अस्पतालों का निरीक्षण किया गया. जिसमें 24 सरकारी व 313 निजी अस्पताल शामिल हैं. वहीं,राज्य के अब तक कुल 12,846 अस्पतालों का अग्नि प्रवणता सूचकांक के आधार पर निरीक्षण किया जा चुका है,जिसमें पाया गया है कि लगभग 60 प्रतिशत अस्पताल में पूर्ण रूप से आग लगने के बाद सूचना देने, आग बुझाने एवं आग नहीं लगे,इसका बचाव करने में फेल है.देश भर में भी सबसे अधिक अस्पतालों में अगलगी की घटनाएं शार्ट शर्किट के कारण होती है. जिसमें बिहार में जांच के दौरान पाया गया है कि 80 प्रतिशत घटनाओं का कारण शार्ट सर्किट है. बावजूइ इसके अस्पतालों में बिजली की वाइरिंग से लेकर अन्य बिजली के उपकरण को धड़ल्ले से उपयोग में लाया जाता है. अधिकांश अस्पतालों में मिला है कि बिजली की तार लटक रही है और बिजली के तार को जैसे-तैसे कहीं से कहीं ले जाया गया है. वहीं, क्षमता भार से अधिक लोड दिया जाता है. जिसे सुधार करने करने का निर्देश दिया गया है.सरकारी अस्पतालों में आग लगने के बाद सूचना देने की कोई व्यवस्था नहीं है. वहीं, फायर सेल्टी के नाम पर सभी अधिकांश अस्पतालों फायर फाइटर के नाम पर सिलेंडर रखा है, लेकिन जरूरत पड़ने पर उसे कैसे चलाया जाये. इसका प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है. अस्पतालों में अगनिशमन के नाम पर पानी स्टोरेज की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है.वहीं, निजी अस्पतालों का हाल ऐसा है कि आग लगने के बाद लोगों का अस्पताल से बाहर निकलना भी नहीं संभव है. ऐसे अस्पतालों में नियमित जांच करने का निर्णय लिया गया है.

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