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नीतीश की यात्राएं-9 : मुख्यमंत्री के हाथों में आवेदन देने की लगी थी होड़, लोगों के चेहरे पर दिखी थी नयी उम्मीद

Updated at : 16 Jan 2025 1:55 PM (IST)
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Nitish Kumar Yatra

Nitish Kumar Yatra

Nitish Kumar Yatra: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर प्रदेश की यात्रा पर हैं. 2005 में नवंबर महीने में मुख्यमंत्री बनने के पूर्व वे जुलाई महीने में न्याय यात्रा पर निकले थे. विकास यात्रा उनकी दूसरी यात्रा थी. नीतीश कुमार की अब तक 15 से अधिक यात्राएं हो चुकी हैं. आइये पढ़ते हैं इन यात्राओं के उद्देश्य और परिणाम के बारे में प्रभात खबर पटना के राजनीतिक संपादक मिथिलेश कुमार की खास रिपोर्ट की नौवीं कड़ी..

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Nitish Kumar Yatra: विकास यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लौरिया-बगहा मार्ग पर पांच किलोमीटर दूर कटैया गांव में पहुंचे. यहां दिन में जनता दरबार भी लगा. मुख्यमंत्री के आगमन की सूचना से यहां के निवासी आह्लादित थे. गांव पहुंचने पर स्थानीय लोगों के चेहरे पर गजब की खुशी दिखायी दे रही थी. गांव की एक महिला की प्रतिक्रिया थी, “मुख्यमंत्री जी हमनी के गांव में रहब सन, हमनी के धन्य हो गइनी.” गांव के लड़कों को खुशी थी कि मुख्यमंत्री आयेंगे, तो जनता दरबार में यहां हाई स्कूल खोलने की मांग करेंगे. 20 जनवरी को लौरिया के जैन साहू हाईस्कूल परिसर में मुख्यमंत्री की सभा हुई. रात्रि विश्राम कटैया गांव में हुआ. वहीं रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, जहां बिहार गीत का गायन हुआ. कुछ स्थानीय लोगों ने अपनी बात भी कही. अगले दिन मुख्यमंत्री जब पतिलार आये तो उन्हें बगहा की मशहूर इमरती परोसी गयी.

नीतीश ने खुद ही चलाया था चापाकल

मुख्यमंत्री के आने की सूचना मात्र से गांवों की कई समस्याओं का समाधान हो गया. एक साल पहले यहां ट्रांसफार्मर जल गया था, शिकायतें की गयी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. अब मुख्यमंत्री के आने की सूचना जैसे ही अधिकारियों को मिली, आनन-फानन में जले ट्रांसफार्मर को बदला गया. खराब चापाकल बदले जा रहे, कुछ की मरम्मत की गयी. सीएम के आने से पहले चौतरवा-पतिलार सड़क को दुरुस्त कर दिया गया था. पतिलार के सभी सरकारी भवन भी चकाचक हो गये. मुख्यमंत्री के आगमन के पहले पतिलार में दस एकड़ में स्वीस काटेज बनाया गया था. मुख्यमंत्री को टेंट के भीतर ही रात गुजारनी थी. खुद की हाथों से उन्हें चापाकल चलाकर पानी लेना था. हुआ भी ऐसा ही.

लोगों के चेहरे पर से हट चुकी थी निराशा

लौरिया की सभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार अब विकास की यात्रा पर है. कलम में स्याही भरने का समय है. यह दुनिया ज्ञान की है. जो पढ़ेगा वह आगे बढ़ेगा. दरअसल मुख्यमंत्री को सामने देख लोगों में सरकार के प्रति अपेक्षा भी बढ़ी है. मुख्यमंत्री इस पूरे यात्रा में यश और अपयश साथ लेकर चल रहे थे. कानून व्यवस्था, सड़क और अस्पताल की स्थिति में सुधार मुख्यमंत्री को यश दिला रहा था. वहीं इंदिरा आवास और बीपीएल सूची में गड़बड़ी उनके हिस्से में अपयश साबित हो रही थी. खास यह था कि लोगों में निराशा के भाव नहीं थे. सबके चेहरे पर यह खुशी थी कि मुख्यमंत्री अपना काम कर रहे हैं.

हर किसी को नीतीश कुमार पर था विश्वास

छपरा के फिरोज आलम ने कहा था कि सरकार टाइट है. मुखिया और बीडीओ गड़बड़ी कर रहे. मुख्यमंत्री जनता दरबार में सबकी बातें सुनी. सरकार को सामने देख लोग अपनी समस्याएं रख रहे थे. पड़ोस की बेलवा गांव से आयी एक महिला को सरकारी नौकरी की दरकार थी. गूंगी और बहरी इंटर पास इस महिला के पति को भी उम्मीद है कि खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों में उसने अपना आवेदन दिया है. पतिलार में मुख्यमंत्री को इंदिरा आवास में गड़बड़ी की शिकायत मिली, तत्काल एफआईआर का आदेश दिया. आदिवासी थारू महेश को कैंसर रोग के इलाज की दरकार थी, तत्काल साथ में खड़े स्वास्थ्य विभाग के निदेशक को मदद पहुंचाने का निर्देश मिला. एक उम्मीद के साथ पूरे गांव ने मुख्यमंत्री को वहां से विदा किया.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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