जमुई के चकाई में एक महीने से पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण, आधा किलोमीटर दूर से ला रहे पानी
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 23 May 2026 12:49 PM
चकाई के कोहवाराटांड गांव में पेयजल संकट
Jamui News: चकाई के कोहवाराटांड गांव में पेयजल संकट गहराया, खराब मोटर और टूटे चापाकल से बढ़ी लोगों की परेशानी
Jamui News: चकाई (जमुई) से जयकुमार शुक्ला की रिपोर्ट. जमुई जिले के चकाई प्रखंड स्थित रामचंद्रडीह पंचायत के कोहवाराटांड गांव में पिछले एक महीने से पेयजल संकट गहराया हुआ है. नल जल योजना बंद होने और गांव के चापाकलों के खराब पड़े रहने से करीब 200 परिवारों को भीषण गर्मी में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है. ग्रामीणों को पानी के लिए आधा किलोमीटर दूर दूसरे टोले में जाना पड़ रहा है, जबकि स्नान और अन्य जरूरतों के लिए तालाब का सहारा लेना पड़ रहा है.
बज्रपात के बाद बंद हुई पानी सप्लाई
ग्रामीणों के अनुसार पहले गांव में नल जल योजना के तहत नियमित पानी सप्लाई होती थी, लेकिन करीब एक माह पहले अचानक पानी आना बंद हो गया. शिकायत के बाद संवेदक ने जांच कर बताया कि बज्रपात की वजह से मोटर का बुस जल गया है.
मिस्त्री मोटर का खराब हिस्सा खोलकर ले गया और जल्द मरम्मत कर पानी चालू करने का भरोसा दिया गया, लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी सप्लाई बहाल नहीं हो सकी.
टूटा चापाकल बना संकट की बड़ी वजह
गांव में पहले से सीमित जल स्रोत थे. ग्रामीणों ने बताया कि टोले में केवल एक चापाकल चालू अवस्था में था, लेकिन एक मछली लदे वाहन की टक्कर से वह भी क्षतिग्रस्त हो गया.
गांव में मौजूद अन्य दो चापाकल भी लंबे समय से खराब पड़े हैं और उनकी मरम्मत नहीं करायी गयी है. ऐसे में ग्रामीणों के सामने पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.
आधा किलोमीटर दूर से ढोना पड़ रहा पानी
भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों को पीने का पानी लाने के लिए आधा किलोमीटर दूर दूसरे टोले में जाना पड़ रहा है. महिलाएं और बच्चे बाल्टी और बर्तन लेकर रोज कई चक्कर लगाने को मजबूर हैं.
स्नान और घरेलू उपयोग के लिए लोग गांव के बगल स्थित तालाब का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है.
ग्रामीणों ने डीएम से लगायी गुहार
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से जल्द पेयजल संकट दूर करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि अगर खराब मोटर और चापाकलों की मरम्मत करा दी जाए तो गांव को बड़ी राहत मिल सकती है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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