साहित्य चिंतन को एक नयी दृष्टि प्रदान करता है : कुलपति

Author Juhi smita
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साहित्य चिंतन को एक नयी दृष्टि प्रदान करता है : कुलपति

जेडी वीमेंस कॉलेज के मुख्य सभागार में समकालीन कथा साहित्य में सामाजिक प्रतिरोध विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार की शुरुआत की गयी

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जेडी वीमेंस कॉलेज में शुरू हुआ राष्ट्रीय सेमिनार

संवाददाता, पटना

जेडी वीमेंस कॉलेज के मुख्य सभागार में समकालीन कथा साहित्य में सामाजिक प्रतिरोध विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार की शुरुआत की गयी. इसके पहले दिन विभिन्न सत्रों में विद्वानों ने साहित्य, समाज और प्रतिरोध के विविध आयामों पर चर्चा की. समारोह का आरंभ दीप प्रज्वलन, स्वागत गान और महाविद्यालय गान के साथ हुआ. मुख्य अतिथि एवं उद्घाटनकर्ता, विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो गिरीश कुमार मिश्र ने शोधार्थियों को शोध पत्र की तकनीकी बारीकियों को समझने पर जोर दिया. पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो उपेंद्र प्रसाद ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा कि साहित्य चिंतन को एक नयी दृष्टि प्रदान करता है. कॉलेज की प्राचार्या डॉ मीरा कुमारी ने अतिथियों का सम्मान किया, जबकि हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ रेखा मिश्रा ने मंच संचालन किया. प्रो शिवनारायण ने विषय प्रवेश कराया.

साहित्य में भारतीयता और समरसता पर जोर

मुख्य वक्ता जेएनयू दिल्ली की प्रो वंदना झा ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य में प्रतिरोध के साथ समरसता की बातें भी होनी चाहिए. उन्होंने फणीश्वरनाथ रेणु को जमीन से जुड़ा लेखक बताया. उन्होंने भारत की रचना के लिए पांच परिवर्तनों—समरसता, कौटुंबिक सामंजस्य, पर्यावरण रक्षा, स्वदेशी भावना और नागरिक कर्तव्य को अनिवार्य बताया.

विभिन्न राज्यों से आये विशेषज्ञों ने साझा किया विचार

दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो अर्चना त्रिपाठी ने बाजारवाद के साहित्य पर प्रभाव और युवा पीढ़ी के ठहराव पर बात की. मणिपुर से आयीं प्रो विजयलक्ष्मी ने पूर्वोत्तर साहित्य की स्थिति पर चर्चा की. रांची विश्वविद्यालय के प्रो जंग बहादुर पांडे ने भारत को ऋषि और कृषि प्रधान देश बताया. पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय की अवकाश प्राप्त प्रो ऊषा सिंह ने वर्तमान समस्याओं के समाधान पर जोर दिया. प्रथम दिन के अंत में महाविद्यालय के संगीत विभाग की छात्राओं ने विभागाध्यक्ष डॉ रीता दास के नेतृत्व में मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये. इसमें गणेश वंदना, कथक नृत्य (तराना) और सूफी गीतों की प्रस्तुति हुई, जिसका समापन होली के गीतों के साथ हुआ. आयोजन सचिव डॉ नलिनी रंजन ने धन्यवाद ज्ञापन किया.

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