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अब असम और त्रिपुरा चुनाव में भी उतरने की तैयारी में जदयू, जानें पार्टी को क्यों है दोनों जगह अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद

Updated at : 15 Dec 2020 7:41 AM (IST)
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अब असम और त्रिपुरा चुनाव में भी उतरने की तैयारी में जदयू, जानें पार्टी को क्यों है दोनों जगह अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद

जनता दल यूनाइटेड(JDU) अगले साल होने वाले असम और 2022 में त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार खड़ा करने की तैयारी में है. असम में अगले साल पश्चिम बंगाल के साथ विधानसभा का चुनाव होना है. चुनाव की तैयारी के सिलसिले में पार्टी के दो वरिष्ठ नेता 21 और 22 दिसंबर को असम और त्रिपुरा का दौरा करेंगे. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार(Nitish kumar) के निर्देश पर पार्टी के नाॅर्थ -इस्ट प्रभारी संजय वर्मा और राष्ट्रीय सचिव रवींद्र सिंह आॅब्जर्वर के रूप में असम जाकर चुनावी तैयारियों का आकलन करेंगे. असम में जदयू के लिए अच्छी संभावनाएं हैं.

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जनता दल यूनाइटेड(JDU) अगले साल होने वाले असम और 2022 में त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार खड़ा करने की तैयारी में है. असम में अगले साल पश्चिम बंगाल के साथ विधानसभा का चुनाव होना है. चुनाव की तैयारी के सिलसिले में पार्टी के दो वरिष्ठ नेता 21 और 22 दिसंबर को असम और त्रिपुरा का दौरा करेंगे. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार(Nitish kumar) के निर्देश पर पार्टी के नाॅर्थ -इस्ट प्रभारी संजय वर्मा और राष्ट्रीय सचिव रवींद्र सिंह आॅब्जर्वर के रूप में असम जाकर चुनावी तैयारियों का आकलन करेंगे. असम में जदयू के लिए अच्छी संभावनाएं हैं.

पार्टी के नाॅर्थ- इस्ट प्रभारी संजय वर्मा ने बताया कि असम के लोग नीतीश कुमार के रेलमंत्रित्व काल को अब भी याद करते हैं. रेल मंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने असम के नवगांव इलाके में करीब 120 और इसी इलाके को जोड़ने वाली 65 किलोमीटर लंबी रेल लाइन मंजूर की थी. प्रदेश के इस पिछड़े इलाके में आज भी गरीबों के लिए रेलमार्ग ही एकमात्र आवागमन का साधन है.

दूसरी बात यह कि असम के करीब 30 से 35 सीटों पर अभी यूडीएफ का कब्जा है. जानकारों के मुताबिक यूडीएफ के नेताओं के प्रति इस बार एंटी इनकंबेंसी फैक्टर दिख रही है. दूसरी ओर, इन सीटों पर भाजपा आमतौर पर अपने उम्मीदवार नहीं देती. कांग्रेस और असम गण परिषद का हालत ठीक नहीं है. ऐसे में यूडीएफ के प्रभाव वाले इलाकों में 30 से 32 सीटों पर जदयू अपने उम्मीदवार खड़ा करे, तो पार्टी इनमें से अाधे से अधिक सीटें जीत सकता है. पिछले दिनों असम से आये पार्टी नेताओं ने इस बात की जानकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष को देते हुए चुनावी तैयारियां शुरू करने का अनुरोध भी किया है.

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त्रिपुरा में 2022 में विधानसभा का चुनाव होना है. यहां वाम दल पूर्व में अच्छी स्थिति में रहा था, पर अब भाजपा के खिलाफ लड़ने में वो ताकतवर नहीं रह गया है. जानकारों के मुताबिक ऐसे में त्रिपुरा में स्थानीय आदिवासी, अल्पसंख्यक और बंगला भाषी मतदाताओं के लिए जदयू बेहतर विकल्प बन सकता है.

जदयू और हमारे नेता नीतीश कुमार के प्रति नाॅर्थ- इस्ट खास कर असम और त्रिपुरा की जनता उम्मीद भरी नजरों से देख रही है. रेल मंत्री के रूप में उनके कार्य को आज भी वहां की जनता याद करती है. सेक्यूलर मन- मिजाज वाले मतदाताओं के लिए नीतीश कुमार उम्मीद की किरण हैं.

संजय वर्मा, प्रभारी जदयू नाॅर्थ -इस्ट

Posted By: Thakur Shaktilochan

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