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आइआइटी पटना में तैयार पोर्टेबल पावर इन्वर्टर से रोशन होगा नाइजीरिया, पहली खेप रवाना

Updated at : 13 Dec 2024 2:42 AM (IST)
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आइआइटी पटना में तैयार पोर्टेबल पावर इन्वर्टर से रोशन होगा नाइजीरिया, पहली खेप रवाना

आइआइटी पटना समर्थित स्टार्टअप एमोससिस पोर्टेबल पावर एलएलपी की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप लागोस (नाइजीरिया) गयी.

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-पहली खेप को उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने हरि झंडी दिखा कर किया रवाना

-आइआइटी पटना के इंक्यूबेशन सेंटर के मार्गदर्शन में पोर्टेबल पावर साल्यूशन को मिल चुका है पेटेंटसंवाददाता, पटनाआइआइटी पटना समर्थित स्टार्टअप एमोससिस पोर्टेबल पावर एलएलपी की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप लागोस (नाइजीरिया) गयी. बुधवार को उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने हरी झंडी दिखाकर पहली खेप को रवाना किया. उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि आइआइटी पटना नवाचार के क्षेत्र में बेहतर काम कर रहा है. समर्पित कोशिशों के कारण संभव हुआ है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में यहां के स्टार्टअप की पहुंच को बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगा. बिहार के व्यापारिक माहौल, नवाचार की क्षमता और स्टार्टअप संस्कृति के प्रति दृष्टिकोण में तेजी से परिवर्तन आ रहा है. इसका लाभ भी राज्य को मिल रहा है. उद्योग विभाग स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए कई आकर्षक योजनाओं को प्रारंभ किया है. नवाचार में आस्था रखने वाले विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक आदि इसका लाभ उठाएं.

कीनिया और तंजानिया भी जायेगा पोर्टेबल पावर एलएलपी

प्रो एके ठाकुर ने बताया कि नाइजीरिया के बाद कीनिया और तंजानिया भी खेप जायेगा. डिमांड के अनुरूप प्रोडक्शन नहीं हो पा रहा है. अभी आइआइटी पटना के इंक्यूबेशन सेंटर में प्रतिमाह 1000 का उत्पादन हो रहा है. अगले साल बड़े स्तर पर उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने बताया कि आइआइटी के इतिहास पहली बार किसी उत्पाद का प्रोटोटाइप, पेटेंट, उत्पाद और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिक्री का सफर तय किया है.

मिला है पेटेंट, पारंपरिक इन्वर्टर की तुलना में 40 प्रतिशत कम वजन

पोर्टेबल पावर एलएलपी आइआइटी पटना द्वारा विकसित और पेटेंट बैटरी का इसमें उपयोग किया गया है. फिजिक्स के अध्यक्ष रहे प्रो एके ठाकुर के मार्गदर्शन में इसे विकसित किया गया है. इसे यूपीएस, होम इंवर्टर, सोलर बैटरी पैक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी पैक्स आदि में उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है. शोधार्थियों ने उद्योग मंत्री को बताया कि यह पारंपरिक इन्वर्टर की तुलना में 40 प्रतिशत कम वजन का है. इसमें अगल से बैटरी असेंबल करने की आवश्यकता नहीं होती है. पारंपरिक इनवर्टर की तुलना में दोगुना लाइफ (10 वर्ष) होता है. डीन एकेडमिक प्रो एके ठाकुर, इन्क्यूबेशन सेंटर के प्रोफेसर इंचार्ज डॉ सुधीर कुमार, जयंत शांडिल्या व अभिजीत कुमार, एमोसिस पोर्टेबल पावर के निदेशक ने उद्योग मंत्री को विभिन्न देशों से इसे लेकर मिल रहे फीडबैक की जानकारी दी.

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