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कैंपस : श्रीअरविंद महिला कॉलेज में छात्राओं ने सीपीआर देने की विधि सीखी

Updated at : 30 Aug 2024 8:47 PM (IST)
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कैंपस : श्रीअरविंद महिला कॉलेज में छात्राओं ने सीपीआर देने की विधि सीखी

श्रीअरविंद महिला कॉलेज में गृह विज्ञान विभाग की ओर से प्राथमिक चिकित्सा पर कार्यशाला का आयोजन किया गया.

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संवाददाता, पटना

श्रीअरविंद महिला कॉलेज में गृह विज्ञान विभाग की ओर से प्राथमिक चिकित्सा पर कार्यशाला का आयोजन किया गया. वहीं इतिहास विभाग की ओर से संगोष्ठी का आयोजन किया गया. गृह विज्ञान और स्वास्थ्य केंद्र विभाग ने रोटरी क्लब ऑफ पटना मिडटाउन के सहयोग से एक कार्यशाला का आयोजन किया. इसका विषय प्राथमिक चिकित्सा: आपातकालीन स्थितियों का सामना और सीपीआर कैसे करें था. इस कार्यशाला में रोटरी क्लब ऑफ पटना मिडटाउन के प्रेसिडेंट डॉ वीपी सिंह, डॉ अपूर्व निधि, और डॉ. समीउल्लाह ने मुख्य वक्ता के रूप में थे. उन्होंने प्राथमिक चिकित्सा और सीपीआर के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला और उपस्थित छात्राओं को आपातकालीन स्थितियों में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षित किया. कॉलेज की प्राचार्या प्रो साधना ठाकुर ने कहा कि आज के समय में इस तरह के जानकारी किसी के पास होनी चाहिए, जिससे जरूरत पड़ने पर किसी की जान बचायी जा सके. गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ विमी सिंह ने बताया इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता और सीपीआर के महत्वपूर्ण कौशल से परिचित कराना है. इसके बाद, विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत सत्र आयोजित किये गये, जिसमें छात्राओं ने बड़ी उत्सुकता के साथ भाग लिया. कार्यक्रम का संचालन हेल्थ सेंटर के सदस्य गोपाल कुमार द्वारा किया गया. कार्यक्रम में हेल्थ सेंटर की सदस्य डॉ सपना बरुआ सहित शिक्षक डॉ प्रभा मिश्रा, डॉ बलिराज मौर्या, डॉ पुष्पा राय उपस्थित रहे.

संगोष्ठी का हुआ आयोजन

इतिहास विभाग में अंतर्विषयक अनुसंधान में सरकारी दस्तावेज का उपयोग क्यों और कैसे विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस आयोजन के मुख्य अतिथि सह वक्ता प्रो प्रभाकर प्रसाद सिंह( पूर्व प्राध्यापक बी आर अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय) ने अंतर्विषयक अनुसंधान में सरकारी दस्तावेज के उपयोग पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि सरकारी दस्तावेज शोध के लिए पूर्ण एवं प्रभावशाली स्रोत है, जिसका उपयोग शिक्षाविद, शोधार्थी, तत्कालीन शासन की नीतियों व चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने में उपयोग कर सकते हैं. सरकारी दस्तावेज आज डिजिटल और गैर डिजिटल दोनों ही रूपों में अभिलेखागारों में संरक्षित हैं. इतिहास विभाग की अध्यक्ष के को-ऑर्डिनेटर प्रो अंजलि प्रसाद ने सभी का स्वागत किया. प्राचार्या प्रो साधना ठाकुर ने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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