'सरेंडर के बाद गोली मारने' के आरोप पर मानवाधिकार आयोग सख्त, भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार से मांगा जवाब

Edited by Vikash Jha
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मृत भरत तिवारी की फाइल फोटो

Bharat Tiwari Encounter: आरा के भरत भूषण तिवारी मौत मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है. आयोग ने मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर एसपी से चार सप्ताह में जांच रिपोर्ट तलब की है.

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Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर जिले के आरा में भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए बिहार के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से चार सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट मांगी है. आयोग में दायर शिकायत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें गोली मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई.

अवकाश प्राप्त न्यायाधीश से जांच कराने की मांग

शिकायत में इस पूरी घटना को मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन बताया गया है. शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इसकी जांच किसी अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की निगरानी में कराने की पुरजोर मांग की है. इसके साथ ही पीड़ित पक्ष की ओर से मुठभेड़ में सीधे तौर पर शामिल रहे पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई करने तथा प्रभावित पीड़ित परिवार को उचित वित्तीय मुआवजा देने की भी मांग प्रमुखता से उठाई गई है.

आयोग ने आरोपों को माना संज्ञान लेने योग्य

आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपने आदेश में कहा है कि शिकायत में लगाए गए आरोप पूरी तरह से संज्ञान लेने योग्य हैं. इसलिए मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर एसपी से चार सप्ताह के भीतर फैक्ट फाइंडिंग जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है. आयोग इस बात की गहनता से पड़ताल करना चाहता है कि मुठभेड़ के दौरान प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया था या नहीं. इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है.

13 जुलाई को होगी मामले की अगली सुनवाई

मानवाधिकार आयोग के इस बड़े कदम के बाद भोजपुर में हुए इस कथित एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच और पुलिस की भूमिका को लेकर कानूनी व राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होगी, जिसमें सभी संबंधित अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट के साथ मौजूद रहना होगा. तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट न सौंपने की स्थिति में आयोग द्वारा आगे की सख्त कार्रवाई की जा सकती है.

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By Vikash Jha

विकाश झा एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और कंटेंट प्रोफेशनल हैं, जिन्हें मीडिया, डिजिटल कंटेंट और सोशल मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में छह वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2020 में भोपाल से हुई, जिसके बाद उन्होंने ETV Bharat, Bharat Express और News24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न जिम्मेदार भूमिकाओं का निर्वहन किया। News24 से आगे बढ़ते हुए उन्होंने Adglobal360 India Pvt. Ltd. के माध्यम से बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया। स्पोर्ट्स, हाइपरलोकल और पॉलिटिकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं। क्रिकेट के प्रति उनका गहरा लगाव है और वे क्रिकेट को सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अपनी लेखनी का महत्वपूर्ण विषय मानते हैं। उन्हें यात्रा करना, नए लोगों और स्थानों को जानना तथा समाज और राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले विकाश डिजिटल मीडिया की तेज रफ्तार दुनिया में तथ्यों पर आधारित, प्रभावशाली और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।

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