पीएमसीएच में कोल्ड निमोनिया से बच्चे की मौत, नौ बच्चों का चल रहा इलाज

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कड़ाके की ठंड में देखभाल में बेपरवाही से बच्चों की तबीयत बिगड़ रही है. शहर के पीएमसीएच, आइजीआइएमएस, पटना एम्स और एनएमसीएच समेत अलग-अलग अस्पतालों में कोल्ड निमोनिया के लक्षण वाले बच्चे इलाज को पहुंच रहे हैं.

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– ठंड में अनदेखी से निमोनिया व कोल्ड डायरिया बच्चों पर पड़ रहा भारी संवाददाता, पटना कड़ाके की ठंड में देखभाल में बेपरवाही से बच्चों की तबीयत बिगड़ रही है. शहर के पीएमसीएच, आइजीआइएमएस, पटना एम्स और एनएमसीएच समेत अलग-अलग अस्पतालों में कोल्ड निमोनिया के लक्षण वाले बच्चे इलाज को पहुंच रहे हैं. वहीं पीएमसीएच के शिशु रोग विभाग में इलाज कराने आये 11 वर्षीय सोनू (बदला नाम) की कोल्ड डायरिया से मौत हो गयी. मूलरूप से पश्चिमी चंपारण के रहने वाले बच्चे की तबीयत खराब होने के बाद उसे परिजन शहर के बाइपास स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया जहां तीन दिन तक इलाज के बाद उसी हालत खराब हो गयी. परिजनों ने बताया कि डॉक्टरों ने संबंधित अस्पताल में कोल्ड डायरिया होने की बात कही. वहीं गंभीर हालत के बाद परिजन पीएमसीएच लेकर गएं जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. डायरिया व निमोनिया से पीड़ित नौ बच्चों का हो रहा इलाज कोल्ड डायरिया व निमोनिया से पीड़ित नौ बच्चों का इलाज पीएमसीएच के शिशु रोग विभाग में चल रहा है. इनमें चार बच्चों को कोल्ड डायरिया और पांच निमोनिया की चपेट में आये हैं. जबकि बीते एक महीने में 40 से अधिक बच्चे डिस्चार्ज होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी है. बाल रोग विशेषज्ञ के मुताबिक परिजन समय पर चेत जाते तो बच्चे गंभीर बीमारियों से बच सकते थे. लेकिन परिजनों की लापरवाही के चलते इनको अस्पताल में भर्ती करना पड़ा. वहीं डॉक्टरों के अनुसार सर्दी, गलन की अधिकता से वायरल बुखार, जुकाम, खांसी की चपेट में आने की आशंका रहती है. बच्चों, बुजुर्गों में शुरुआती दौर में ही इलाज मिल जाये तो निमोनिया से बचाव हो जाता है. लेटलतीफी से छाती में बलगम भरने लगता है. जो अनदेखी से निमोनिया बन जाता है. बचाव के उपाय – सर्दी, खांसी है तो नाक, मुंह ढंकने के लिए रूमाल का प्रयोग करें. – भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें. हाथ धोते रहें. – गुनगुना पानी, तरल पदार्थ का सेवन करें. पौष्टिक आहार लें. – बच्चों, बुजुर्गों को ठंड से बचाएं. तबीयत बिगड़े तो डॉक्टर को दिखाएं. बच्चों की सांस फूलने लगे तो इलाज में देर न करें आइजीआइसी अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ एनके अग्रवाल ने बताया कि ठंड में लापरवाही बच्चों पर भारी पड़ सकती है. यही वजह है कि कुछ बच्चे कोल्ड डायरिया की चपेट में आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि इम्यूनिटी कम होने की वजह से बच्चों में सर्दी, खांसी होना आम है. पर इन बीमारियों के साथ तेज बुखार हो और पसीना निकले, सांस फूलने लगे, बच्चा रात में सो न सके, सूखी खांसी आए या दस्त होने लगे, उल्टी हो तो बिल्कुल भी देर न करें. डॉक्टर को दिखाएं क्योंकि यह निमोनिया और कोल्ड डायरिया का संकेत है.

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