छपरा की जेपी यूनिवर्सिटी के लिए 5 अरब के बजट पर लगी मुहर, स्टूडेंट लाइफ साइकिल मेंटेन करने की होगी कवायद

जेपीयू के इतिहास में पहली बार सीनेट की बैठक की अध्यक्षता राज्यपाल ने की. हालांकि बैठक का समय 11.30 से निर्धारित था. लेकिन बैठक शुरू होने तक महज 50 फीसदी सीनेट सदस्य ही पहुंचे. 60 सदस्यों की सीनेट में पहले सत्र में 30 सीनेट सदस्य ही शामिल हो सके.
छपरा. जयप्रकाश विश्वविद्यालय में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की अध्यक्षता में आयोजित सीनेट की बैठक करीब तीन घंटे तक चली. बैठक में शैक्षणिक सत्र 2023-24 के लिए पांच अरब के घाटे का बजट प्रस्तुत किया गया. जिसे सदस्यों के साथ चर्चा के बाद पारित कर दिया गया. बजट में विश्वविद्यालय में शैक्षणिक व्यवस्थाओं के विकास, निर्माण व अन्य प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने को प्राथमिकता दी गयी है. वहीं छात्र हित में स्टूडेंट लाइफ साइकिल को मेंटेंन रखने की कवायद शुरू करने का भी निर्णय लिया गया. इसके तहत यूएमआइएस पोर्टल को और अधिक सशक्त बनाया जायेगा. जिसके लिए 5.46 करोड़ रुपये खर्च होंगे.
स्टूडेंट लाइफ साइकिल को तैयार कर उसे व्यवस्थित बनाते हुए छात्रों का नामांकन, रजिस्ट्रेशन, उपस्थिति, मूल्यांकन आदि से जुड़े कार्य आसान हो जायेंगे. इसके अलावे बजट, सीनेट, सिंडिकेट, डिग्री, मार्क्स सीट समेत कई अन्य कार्यों को निष्पादित करने में भी स्टूडेंट लाइफ साइकिल की भूमिका अहम होगी.
बजट में स्थापना मद में 2.52 अरब की राशि प्रस्तावित है. वहीं विकास मद में 77.63 करोड़, निर्माण व प्रोजेक्ट मद में 61.50 करोड़, नयी अंशदायी पेंशन योजना में 12.80 करोड़, विभिन्न मद में 64.30 करोड़ की राशि निर्गत करने का अनुमोदन हुआ. वहीं पिछले सत्र में विश्वविद्यालय को 20.40 करोड़ का आय हुआ. ऐसे में कुल मिलाकर इस बार भी बजट घाटे का है. पिछले साल 4.58 अरब का बजट था. जिसमें आंशिक वृद्धि इस बार की गयी.
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत राज्यपाल कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह 11.15 में विश्वविद्यालय कैंपस पहुंचे. जहां विश्वविद्यालय प्रशासन तथा जिला प्रशासन की मौजूदगी में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. वहीं 11.30 से सीनेट हॉल में बैठक कार्यवाही प्रारंभ हुई. सबसे पहले राज्यपाल ने लोकनायक की प्रतिमा व उनके तैल चित्र पर पुष्पांजलि की जिसके बाद दीप प्रज्जवलन हुआ. दीप प्रज्वलन के बाद स्वागत गीत की प्रस्तुति एनएसएस की छात्राओं ने दी. जिसके बाद रिविलगंज के वेद विद्यालय के बटुकों ने संस्कृत के श्लोक पढ़े. तत्पश्चात कुल गीत की प्रस्तुति हुई.
कार्यक्रम में राज्यपाल का स्वागत करते हुए कुलपति प्रोफेसर फारुक अली ने स्वागत भाषण में कहा कि जेपीयू ने अपने 30 वर्ष के कार्यकाल में बहुत कुछ हासिल किया है. उन्होंने कहा कि जहां विकास है वहां बाधा भी होगी. कोई भी व्यक्ति नियम के उपर नहीं है. कानून संगत कार्य होना चाहिये. जब कोई कड़ा निर्णय लिया जाता है तो उसका विरोध भी होता है जो काम के प्रभाव को दिखाता है. उन्होंने कहा कि कोरोना के प्रभाव उबरते हुए विगत दो सालों में कई परीक्षाएं ली गयी है. स्नातक व पीजी के सत्रों को नियमित किया जा रहा है.
प्रतिकुलपति प्रो. लक्ष्मी नारायण सिंह ने बजट प्रस्तुत करने के बाद विश्वविद्यालय के विकास के प्रति संगठित होकर काम करने की जरूरत बतायी. कार्यक्रम का संचालन कर रहे रजिस्ट्रार डॉ आरपी बब्लू ने कहा कि विश्वविद्यालय सतत विकास की ओर अग्रसर है. कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रधान सचिव रॉबर्ट एल चोग्थू, राजभवन के पदाधिकारी प्रतेश देशाई समेत सीनेट के सभी सदस्य डीएम राजेश मीणा, एसडीओ अरूण कुमार सिंह आदि भी सुरक्षा व्यवस्था की मॉनिटरिंग करते रहे.
जेपीयू के इतिहास में पहली बार सीनेट की बैठक की अध्यक्षता राज्यपाल ने की. हालांकि बैठक का समय 11.30 से निर्धारित था. लेकिन बैठक शुरू होने तक महज 50 फीसदी सीनेट सदस्य ही पहुंचे. 60 सदस्यों की सीनेट में पहले सत्र में 30 सीनेट सदस्य ही शामिल हो सके. हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी सीनेट सदस्यों को पूर्व में ही सूचना भेज दी थी.
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बजट पर चर्चा के दौरान सीनेट सदस्य व एमएलसी डॉ वीरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि बजट पास होने में वित्त समिति में नामित सदस्यों द्वारा निर्णय लिया गया है. जिससे संकट की स्थिति पैदा हो गयी है. उन्होंने राज्यपाल से कहा कि वित्त समिति में सिंडिकेट द्वारा चयनित सदस्य होते है. जबकि बजट नामित सदस्यों द्वारा पास किया गया है. इस पर राज्यपाल ने भी कहा कि यह कानूनी चूक हो गयी है जिसे सुधार लिया जायेगा. वहीं परीक्षा फल में विलंब, सत्र की अनियमितता, भोजपुरी के पढ़ाई, प्रमाण पत्रों की समय पर उपलब्ध कराना, कर्मचारियों की नियुक्ति व नियमित करण आदि का मुद्दा पटल प रखा गया. सीनेट सदस्य चुल्हन सिंह ने भी आरोपित शिक्षकों को विश्वविद्यालय का अधिकारी बनाये जाने का मुद्दा उठाया. जिसपर थोड़ी देर के लिए सदन में गहमा-गहमी का माहौल रहा.
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