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Kendriya Vidyalaya: बिहार के 14 जिलों में खुलेंगे 16 नए केंद्रीय विद्यालय, इस जिले को मिलेगा तीसरा स्कूल

Updated at : 25 Jun 2025 8:38 AM (IST)
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kendriya vidyalaya| 16 new Kendriya Vidyalayas will be opened in 14 districts of Bihar

kendriya vidyalaya

Kendriya Vidyalaya: बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने वाला है. राज्य के 14 जिलों में 16 नए केंद्रीय विद्यालय खोले जाएंगे. मुजफ्फरपुर को तीसरा केंद्रीय विद्यालय मिलेगा, जो बेला औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा. इस फैसले से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का नया विकल्प मिलेगा और केंद्रीय कर्मियों सहित आम लोगों के बच्चों को भी लाभ होगा.

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Kendriya Vidyalaya: बिहार के शिक्षा परिदृश्य में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. राज्य सरकार ने केंद्रीय विद्यालयों के विस्तार की दिशा में अहम कदम उठाया है. शिक्षा विभाग ने राज्य के 14 जिलों में 16 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की योजना तैयार की है. इनमें से मुजफ्फरपुर जिले को विशेष तवज्जो दी गई है, जहां तीसरे केंद्रीय विद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है. यह नया विद्यालय बेला औद्योगिक क्षेत्र में बनाया जाएगा.

इससे पहले गन्नीपुर और झपहां में केंद्रीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं. शिक्षा विभाग के सचिव अजय कुमार यादव ने जिलों के डीएम को निर्देश दिया है कि वे उपयुक्त जमीन की पहचान कर प्रस्ताव भेजें. साथ ही, 11 बिंदुओं पर आधारित एक विस्तृत रिपोर्ट भी शिक्षा विभाग को सौंपने को कहा गया है.

हर विद्यालय के लिए 8 से 10 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी, जिसमें स्कूल भवन, प्रशासनिक इकाई, स्टाफ क्वार्टर, छात्रावास और खेल मैदान जैसी सुविधाएं शामिल रहेंगी. शिक्षा विभाग की यह कवायद साफ संकेत देती है कि सरकार राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को लेकर गंभीर है.

पटना और नालंदा जिले को दो-दो नए विद्यालय मिलेंगे, जबकि बाकी जिलों- पूर्णिया, मुंगेर, कैमूर, भोजपुर, मधेपुरा, मधुबनी, दरभंगा, शेखपुरा, गया, अरवल और भागलपुर में एक-एक विद्यालय की स्थापना की जाएगी.

आम नागरिकों के बच्चे भी कर सकते हैं पढ़ाई

गौरतलब है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) द्वारा संचालित ये विद्यालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध होते हैं और अब तक मुख्यतः केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों को ध्यान में रखकर खोले जाते थे. हालांकि अब आम नागरिकों के बच्चे भी इसमें पढ़ सकते हैं, बशर्ते सीट उपलब्ध हो.

इस कदम से न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में एकरूपता आएगी, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए द्वार भी खुलेंगे. यह पहल बिहार में शिक्षा की समग्र गुणवत्ता को एक नई ऊंचाई देने में मददगार साबित हो सकती है.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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