बिहार में बालू घाट नीलामी की अड़चनें खत्म करने की तैयारी, सरकार का बड़ा फैसला, जल्द मिलेगी रफ्तार

Published by :Abhinandan Pandey
Published at :13 Apr 2026 3:03 PM (IST)
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vijay sinha on sand ghat auction

विजय सिन्हा की फाइल फोटो

Bihar News: बिहार में बालू घाटों की नीलामी में आ रही देरी को खत्म करने के लिए सरकार एक्शन मोड में है. पर्यावरणीय मंजूरी की जटिल प्रक्रिया को आसान बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नीलामी तेज हो और निर्माण कार्यों को रफ्तार मिल सके.

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Bihar News: बिहार में बालू घाटों की नीलामी को लेकर लंबे समय से चली आ रही अड़चनें अब दूर होती नजर आ रही हैं. राज्य सरकार ने इस दिशा में सख्त और तेज कदम उठाने शुरू कर दिए हैं, जिससे न सिर्फ प्रक्रिया में तेजी आएगी बल्कि निर्माण कार्यों को भी नई रफ्तार मिलेगी.

नीलामी प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश

उप मुख्यमंत्री सह खान एवं भू-तत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ निर्देश दिया है कि बालू घाटों की नीलामी में हो रही देरी को हर हाल में खत्म किया जाए. इसके लिए उन्होंने पर्यावरणीय मंजूरी की जटिल प्रक्रियाओं को आसान और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया है.

राज्य में कुल 463 पीले बालू घाट चिन्हित किए गए हैं, लेकिन अब तक सिर्फ 360 घाटों की ही नीलामी पूरी हो सकी है. बाकी घाट पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया में फंसे हुए हैं, जिससे राजस्व और निर्माण दोनों प्रभावित हो रहे हैं.

CTE-CTO प्रक्रिया बनी बड़ी बाधा

नीलामी में सबसे बड़ी रुकावट स्थापना की सहमति (CTE) और संचालन की सहमति (CTO) की लंबी और जटिल प्रक्रिया है. इन अनुमतियों में देरी के कारण कई घाटों की नीलामी अटक गई है.

मंत्री ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे आपसी समन्वय बढ़ाएं और सभी जरूरी अनुमतियां तय समय सीमा के भीतर जारी करें. उनका कहना है कि प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाना सरकार की प्राथमिकता है.

केंद्र सरकार से भी किया गया अनुरोध

राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर केंद्र के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भी पत्र लिखा है. इसमें मंजूरी प्रक्रिया को आसान और तेज करने का आग्रह किया गया है, ताकि राज्यों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े.

निर्माण कार्यों को मिलेगी नई रफ्तार

सरकार का मानना है कि जैसे ही सभी बालू घाटों की नीलामी पूरी होगी, निर्माण कार्यों में तेजी आएगी. खासकर सड़क, पुल और भवन निर्माण परियोजनाओं को इसका सीधा फायदा मिलेगा. इसके अलावा, बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ने से कीमतों में भी संतुलन आने की उम्मीद है, जिससे आम लोगों और ठेकेदारों दोनों को राहत मिलेगी.

राजस्व बढ़ने की भी उम्मीद

बालू घाटों की पूरी नीलामी होने से राज्य सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी. कुल मिलाकर, सरकार के इस कदम को विकास और व्यवस्था सुधार की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है.

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अभिनंदन पांडेय डिजिटल माध्यम में पिछले 2 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर तक का मुकाम तय किए हैं. अभी डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास करते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखते हैं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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