बंगाल वोटर लिस्ट विवाद : सुप्रीम कोर्ट का 13 याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार, कहा- ट्रिब्यूनल जायें

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Supreme Court On Bengal Voter List West Bengal Election 2026

Supreme Court on Bengal Voter List: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई से मना किया. कोर्ट ने इसे ‘समय पूर्व’ बताया और याचिकाकर्ताओं को न्यायाधिकरण जाने का निर्देश दिया.

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Supreme Court on Bengal Voter List: बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से ठीक 10 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची विवाद (SIR) पर बड़ा फैसला सुनाया है. सोमवार को शीर्ष अदालत ने उन 13 याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिनमें विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) के तहत नाम काटे जाने को चुनौती दी गयी थी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता पहले से ही अपीलीय न्यायाधिकरणों (Appellate Tribunals) के पास जा चुके हैं. यह याचिका समय से पहले की गयी है. अदालत ने कहा कि न्यायिक हस्तक्षेप का उद्देश्य चुनाव को बढ़ावा देना है, उसे रोकना नहीं.

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दो संवैधानिक संस्थाओं के बीच न पिसें मतदाता : कोर्ट

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने मतदान के अधिकार पर एक बेहद महत्वपूर्ण और भावुक टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि जिस देश में आपका जन्म हुआ है, वहां वोट देने का अधिकार न केवल संवैधानिक है, बल्कि भावनात्मक भी है. यह सरकार चुनने और लोकतंत्र का हिस्सा होने की भावना से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि मतदाता को निर्वाचन आयोग और न्यायिक प्रक्रिया जैसी दो संवैधानिक संस्थाओं के बीच फंसा हुआ महसूस नहीं करना चाहिए. हमें उचित प्रक्रिया के अधिकारों की रक्षा करनी होगी.

लंबित हैं 34 लाख अपील, ट्रिब्यूनल पर भारी बोझ

सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किये. उन्होंने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में मतदाता सूची से नाम हटने के खिलाफ लगभग 30 से 34 लाख अपील लंबित हैं. कलकत्ता हाईकोर्ट ने इन अपीलों के निपटारे के लिए 19 न्यायाधिकरण का गठन किया है. पीठ ने टिप्पणी की कि इस हिसाब से हर न्यायाधिकरण के पास अब निपटाने के लिए एक लाख से अधिक अपीलें हैं.

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चुनावी प्रक्रिया में बाधा नहीं डालेगा कोर्ट

याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि निर्वाचन आयोग जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर रहा है. अंतिम तिथि बढ़ायी जानी चाहिए. हालांकि, पीठ ने सख्त लहजे में कहा कि जब तक बड़ी संख्या में मतदाताओं को बाहर न कर दिया जाये या चुनाव पर बहुत बड़ा प्रभाव न पड़े, तब तक चुनाव रद्द नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया (23 और 29 अप्रैल) के इस स्तर पर कोई बाधा नहीं डाली जायेगी.

Supreme Court on Bengal Voter List: अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को सलाह दी है कि वे कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा बनाये गये ट्रिब्यूनल्स में अपने सभी कानूनी उपायों का उपयोग करें. ट्रिब्यूनल्स में सुनवाई की प्रक्रिया सोमवार से ही शुरू हो गयी है.

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