बंगाल वोटर लिस्ट विवाद : सुप्रीम कोर्ट का 13 याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार, कहा- ट्रिब्यूनल जायें

Published by :Mithilesh Jha
Published at :13 Apr 2026 7:25 PM (IST)
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Supreme Court on Bengal Voter List West Bengal Election 2026

Supreme Court on Bengal Voter List: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई से मना किया. कोर्ट ने इसे 'समय पूर्व' बताया और याचिकाकर्ताओं को न्यायाधिकरण जाने का निर्देश दिया.

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Supreme Court on Bengal Voter List: बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से ठीक 10 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची विवाद (SIR) पर बड़ा फैसला सुनाया है. सोमवार को शीर्ष अदालत ने उन 13 याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिनमें विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) के तहत नाम काटे जाने को चुनौती दी गयी थी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता पहले से ही अपीलीय न्यायाधिकरणों (Appellate Tribunals) के पास जा चुके हैं. यह याचिका समय से पहले की गयी है. अदालत ने कहा कि न्यायिक हस्तक्षेप का उद्देश्य चुनाव को बढ़ावा देना है, उसे रोकना नहीं.

दो संवैधानिक संस्थाओं के बीच न पिसें मतदाता : कोर्ट

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने मतदान के अधिकार पर एक बेहद महत्वपूर्ण और भावुक टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि जिस देश में आपका जन्म हुआ है, वहां वोट देने का अधिकार न केवल संवैधानिक है, बल्कि भावनात्मक भी है. यह सरकार चुनने और लोकतंत्र का हिस्सा होने की भावना से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि मतदाता को निर्वाचन आयोग और न्यायिक प्रक्रिया जैसी दो संवैधानिक संस्थाओं के बीच फंसा हुआ महसूस नहीं करना चाहिए. हमें उचित प्रक्रिया के अधिकारों की रक्षा करनी होगी.

लंबित हैं 34 लाख अपील, ट्रिब्यूनल पर भारी बोझ

सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किये. उन्होंने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में मतदाता सूची से नाम हटने के खिलाफ लगभग 30 से 34 लाख अपील लंबित हैं. कलकत्ता हाईकोर्ट ने इन अपीलों के निपटारे के लिए 19 न्यायाधिकरण का गठन किया है. पीठ ने टिप्पणी की कि इस हिसाब से हर न्यायाधिकरण के पास अब निपटाने के लिए एक लाख से अधिक अपीलें हैं.

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चुनावी प्रक्रिया में बाधा नहीं डालेगा कोर्ट

याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि निर्वाचन आयोग जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर रहा है. अंतिम तिथि बढ़ायी जानी चाहिए. हालांकि, पीठ ने सख्त लहजे में कहा कि जब तक बड़ी संख्या में मतदाताओं को बाहर न कर दिया जाये या चुनाव पर बहुत बड़ा प्रभाव न पड़े, तब तक चुनाव रद्द नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया (23 और 29 अप्रैल) के इस स्तर पर कोई बाधा नहीं डाली जायेगी.

Supreme Court on Bengal Voter List: अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को सलाह दी है कि वे कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा बनाये गये ट्रिब्यूनल्स में अपने सभी कानूनी उपायों का उपयोग करें. ट्रिब्यूनल्स में सुनवाई की प्रक्रिया सोमवार से ही शुरू हो गयी है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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