बिहार में रजिस्ट्री का नया नियम, 10 लाख से महंगी जमीन-मकान के लिए अब पैन कार्ड हुआ अनिवार्य
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 27 Jan 2026 9:36 PM
AI फोटो
Bihar Land Registry: बिहार में अब 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की जमीन और मकान की रजिस्ट्री के लिए पैन (PAN) कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है. टैक्स चोरी रोकने और ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के निर्देश पर यह फैसला लिया है. अब बिना पैन कार्ड या फॉर्म-60 के बड़ी संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा.
Bihar Land Registry: बिहार में अब 10 लाख रुपये या उससे अधिक कीमत की जमीन या मकान की रजिस्ट्री के लिए पैन कार्ड देना अनिवार्य कर दिया गया है. बिहार सरकार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने इस संबंध में सभी जिला अवर निबंधकों और निबंधन कार्यालयों को सख्त निर्देश जारी किए हैं. यह फैसला आयकर विभाग से मिले पत्र के बाद लिया गया है. इसका मकसद बड़े लेन-देन में पारदर्शिता लाना और टैक्स चोरी रोकना है.
हाल ही में किए गए सर्वे और मौके पर जांच के दौरान बिहार के कई निबंधन कार्यालयों में 10 से 30 लाख रुपये तक की रजिस्ट्री ऐसे मामलों में पाई गई, जिनमें पैन कार्ड से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया था.
इसी को देखते हुए सरकार ने अब साफ निर्देश दिया है कि बिना पैन कार्ड के 10 लाख रुपये या उससे अधिक की रजिस्ट्री नहीं होगी. सभी रजिस्ट्रार और सब-रजिस्ट्रार को कहा गया है कि वे आयकर अधिनियम की धारा 139A और इससे जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करें.
पैन नहीं तो फॉर्म-60 जरूरी, लापरवाही पर आयकर विभाग की नजर
नये आदेश के अनुसार, यदि किसी पक्षकार के पास पैन कार्ड नहीं है (कंपनी या फर्म को छोड़कर), तो उन्हें आयकर नियमावली के तहत फॉर्म-60 में घोषणा पत्र देना होगा. निबंधन कार्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर बड़े लेन-देन में या तो पैन दर्ज हो या फिर फॉर्म-60 प्राप्त किया गया हो. साथ ही, संबंधित अधिकारियों को इन पैन कार्ड का आधार नंबर की तरह ही भौतिक सत्यापन भी करना अनिवार्य होगा.
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अधिकारियों की लापरवाही पर आयकर विभाग सख्त
आयकर विभाग के अपर निदेशक रूपेश अग्रवाल ने इंस्पेक्टर जनरल को लिखे पत्र में बिहार के निबंधन कार्यालयों की काम करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं. जांच में पाया गया है कि बिहार के 137 में से 83 अवर निबंधक कार्यालयों ने अब तक फॉर्म-61 भरने के लिए आवश्यक रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया है. चौंकाने वाली बात यह है कि जिन 54 कार्यालयों ने रजिस्ट्रेशन कराया भी है, उन्होंने 10 लाख से ऊपर के बड़े लेन-देन होने के बावजूद फॉर्म-61 के जरिए कोई जानकारी साझा नहीं की है.
हर छह महीने में देनी होगी रिपोर्ट
आयकर नियमों के तहत, बिना पैन वाले लेन-देन की जानकारी फॉर्म-61 के जरिये साल में दो बार आयकर विभाग को देनी होती है. अप्रैल से सितंबर तक के लेन-देन के लिए 31 अक्टूबर तक की तिथि तय है. वहीं, अक्टूबर से मार्च तक के लेन-देन के लिए 30 अप्रैल तक की तिथि तय है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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