बिहार के देहात में भी अब मिलेगा बायोडीजल, सरकार ने बायोफ्यूल पंपों के लिए नियम बदले
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 16 Feb 2026 4:52 PM
सांकेतिक फोटो
Bihar Government: बिहार में गांवों के पास बायोफ्यूल और बायोडीजल पंप खोलने की तैयारी तेज हो गई है. ग्रामीण सड़कों के किनारे ऐसे पंप लगाने की मंजूरी प्रक्रिया आसान बनाने के लिए विभाग ने कमेटी बनाई है. रिपोर्ट आने के बाद हरित ईंधन के नए पंप खोलने का रास्ता साफ होगा.
Bihar Government: बिहार में अब गांव-गांव बायोफ्यूल पंप खोलने की तैयारी शुरू हो गई है. सरकार चाहती है कि देहात में भी एनवायरनमेंट के अनुकूल ईंधन आसानी से मिले. इसी वजह से ग्रामीण सड़कों के किनारे बायोडीजल रिटेल आउटलेट खोलने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है.
ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभी तक सड़क से पेट्रोल पंप तक जाने के लिए जो कनेक्टिंग रोड बनता है, उसमें सरकारी जमीन के इस्तेमाल को लेकर कई तरह की दिक्कतें सामने आती थीं. 2018 में इसके लिए नियम बनाए गए थे, लेकिन बायोफ्यूल पंप के मामले में स्पष्ट प्रक्रिया तय नहीं थी.
कमेटी करेगी तय
अब विभाग ने फैसला लिया है कि जैसे पथ निर्माण विभाग सड़क किनारे पारंपरिक पेट्रोल पंप की अनुमति देता है, वैसे ही ग्रामीण सड़कों पर बायोफ्यूल और बायोडीजल पंप खोलने की मंजूरी दी जाएगी. इसके लिए चीफ इंजिनियर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है. यह कमेटी तय करेगी कि अनुमति लेने की पूरी प्रक्रिया क्या होगी और किन शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा.
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सामान्य पेट्रोल पंप से कितना अलग होता है ये
कमेटी अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपेगी. रिपोर्ट के आधार पर आगे की गाइडलाइन जारी की जाएगी. इसके बाद ग्रामीण इलाकों में बायोफ्यूल पंप खोलना पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा. बायोफ्यूल पंप सामान्य पेट्रोल पंप से अलग होते हैं. यह डीजल वनस्पति तेल, जानवरों की चर्बी या सड़ने-गलने वाला प्राकृतिक कचरा से तैयार किया जाता है. इसे बायोडीजल कहा जाता है.
यह एनवायरनमेंट के लिए बेहतर माना जाता है क्योंकि इससे कार्बन का कम निकलता होता है. सरकार का मानना है कि इससे गांवों में रोजगार के नए मौके भी बनेंगे और हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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