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Bihar Flood: कोसी का कहर, घरों से लेकर सड़कों तक निगल गई नदी

Updated at : 03 Sep 2025 8:37 AM (IST)
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Bihar Flood Kosi wreaks havoc, river swallows everything from homes to roads

Bihar Flood Kosi wreaks havoc, river swallows everything from homes to roads

Bihar Flood: कोसी, जिसे ‘बिहार की दुखिनी’ , बिहार का शोक कहा जाता है, एक बार फिर से अपना रौद्र रूप दिखा रही है. नदी का जलस्तर बढ़ने से सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं और गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है.

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Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है. सुपौल, दरभंगा और आसपास के जिलों में कोसी नदी के उफान ने ग्रामीणों की जिंदगी को तबाह कर दिया है.

सिर्फ सुपौल जिले में ही 80 से ज्यादा घर नदी में विलीन हो गए हैं, जबकि कई गांव कटाव की चपेट में आ चुके हैं. हालात ऐसे हैं कि लोग अपना सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं.

कोसी में समा गए गांव, उजड़ गए आशियाने

सुपौल जिले के बलवा पंचायत और किशनपुर प्रखंड की दुबियाही पंचायत में अब तक करीब 100 से ज्यादा घर कोसी में समा चुके हैं. बलवा के लालगंज वार्ड-13 में सोमवार की रात को 40 परिवारों के 60 घर नदी में बह गए. इसी तरह बेलागोठ गांव का वार्ड आठ पूरी तरह से मिट चुका है, जबकि वार्ड सात का बड़ा हिस्सा नदी में समा गया है.
पिछले 24 घंटों में वार्ड छह में तीन दर्जन से अधिक घरों को कोसी ने निगल लिया. हालात यह हैं कि सड़क पर दो से तीन फीट तक पानी भर गया है. नाव की कमी से लोग घरों में कैद हैं और बाहर निकलने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं.

दरभंगा और आसपास का हाल

दरभंगा जिले में किरतपुर अंचल के कई गांव पानी में डूब चुके हैं. भंडरिया गांव पूरी तरह से घिर चुका है. यहां से निकलने का रास्ता बंद हो गया है क्योंकि भंडरिया-कदवारा और भंडरिया-रघुनाथपुर सड़कों पर पानी बह रहा है.
किरतपुर अंचल का ढाका भलुआहा गांव सबसे ज्यादा प्रभावित है. वहीं, बनरी, लक्ष्मीनियां और चकला जैसे गांवों के लोग मवेशियों के साथ ऊंचे स्थानों पर शरण लेने लगे हैं. कई ग्रामीण पश्चिमी तटबंध के किनारे झोपड़ियां डालकर अस्थायी ठिकाना बना रहे हैं.

प्रशासन की तैयारी और लोगों की जद्दोजहद

बाढ़ प्रभावित इलाकों में सामुदायिक किचन की व्यवस्था शुरू की गई है. सुपौल के डीएम ने कहा है कि राहत कार्य जारी हैं, लेकिन हकीकत यह है कि नाव और राहत सामग्री की कमी के कारण ग्रामीणों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
भागलपुर में भी तिलकामांझी विश्वविद्यालय कैंपस तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है. सीनेट हॉल, बूढ़ानाथ और सखीचंद घाट पर भी पानी भरने से हालात चिंताजनक हैं.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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