देश की सबसे पुरानी पार्टी का बिहार में गिर रहा ग्राफ, गुटबाजी हावी, क्या कर रहा हाईकमान

Updated at : 23 Mar 2026 3:06 PM (IST)
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Bihar-Congress-Leaders

राजेश राम और राहुल गांधी

Bihar Congress: देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का हाल बिहार में दिन-ब-दिन खराब होता जा रहा है. चुनाव दर चुनाव प्रदर्शन गिरता जा रहा है. राज्यसभा चुनाव में पार्टी के विधयाकों ने महागठबंधन के उम्मीदवार का साथ नहीं दिया. इन तमाम चुनौतियों के बावजूद केंद्रीय नेतृत्व का ध्यान बिहार में स्थिति को सुधारने पर नहीं है.

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Bihar Congress: बिहार की राजनीति में कभी बादशाहत रखने वाली कांग्रेस आज अपने ही घर में लगी आग बुझाने में नाकाम दिख रही है. पार्टी के भीतर की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि नेता और कार्यकर्ता अब भविष्य को लेकर डरे हुए हैं. विधानसभा चुनाव 2020 में कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद केवल 19 सीटें ही जीत पाई थी. इस खराब स्ट्राइक रेट ने महागठबंधन की सरकार बनने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था. 2025 के विधानसभा चुनाव में स्थिति और खराब हो गई. पार्टी का प्रदर्शन पहले से भी कमजोर रहा और 6 सीटों पर सिमट गईं. इससे पता चलता है कि पार्टी का जनाधार लगातार सिमट रहा है.

फिलहाल पार्टी का क्या है हाल

बिहार कांग्रेस दो फाड़ हो चुकी है. एक गुट वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी के साथ खड़ा है, तो दूसरा गुट उन्हें हटाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है. हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में जिस तरह विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर रुख अपनाया, उसने साफ कर दिया कि नेतृत्व पर किसी का नियंत्रण नहीं रह गया है. एक खेमा अब खुलकर हाईकमान का दरवाजे खटखटा रहा है ताकि जल्द से जल्द नया चेहरा सामने लाया जा सके और पार्टी मजबूत हो.

हाईकमान का ध्यान कहां है?

अभी बिहार कांग्रेस को हाईकमान के साथ की जरूरत है लेकिन उनका पूरा फोकस पश्चिम बंगाल और असम पर है. बिहार पर बिल्कुल ध्यान नहीं है. इस उपेक्षा के कारण जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का उत्साह पूरी तरह खत्म हो गया है.

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स्थिति और बदतर हो सकती है

ऐसे समय में कांग्रेस ने तुरंत अपनी आंतरिक गुटबाजी खत्म नहीं की और एक मजबूत, सबको साथ लेकर चलने वाला नेतृत्व नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में स्थिति 2025 और 2020 से भी बदतर हो सकती है. पार्टी को केवल गठबंधन के भरोसे रहने के बजाय अपनी जमीन तलाशनी होगी. वरना, बिहार जैसे राज्य में कांग्रेस महज एक वोट कटवा या छोटे सहयोगी दल के रूप में सिमट कर रह जाएगी.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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